Lektion 25 -- Perfekt, Progressiv und Terminativ
Wortliste
| Nr. | Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Quelle |
| ----- | ----------- | ------- | --------- | ----------- | -------- |
| 1 | གཡོག་ | g.yog | Subst. | Diener (kurz fuer: g.yog po) | Lekt_25 WL, Nr. 1 |
| 2 | རྩ་མི་ | rtsa mi | NZ | rTsa mi | Lekt_25 WL, Nr. 2 |
| 3 | ཡེར་པ་ | yer pa | ON | Yer pa | Lekt_25 WL, Nr. 3 |
| 4 | སྒོམ་ཆེན་ | sgom chen | Subst. | grosser Meditator (kurz fuer: sgom pa chen po) | Lekt_25 WL, Nr. 4 |
| 5 | ཉི་ཁྲི་ | nyi khri | PN | Nyi khri | Lekt_25 WL, Nr. 5 |
| 6 | བཏེག་པ་ | bteg pa | tdV; 2.SF | etw. emporheben | Lekt_25 WL, Nr. 6 |
| 7 | ཁྲོ་ཕུ་ | khro phu | ON | Khro phu | Lekt_25 WL, Nr. 7 |
| 8 | མངོན་རྟོགས་ | mngon rtogs | Subst. | deutliches Erkennen; hier: Evokation [einer Gottheit] | Lekt_25 WL, Nr. 8 |
| 9 | གཤམ་ | gsham | Subst. | Ende; hinterer Teil | Lekt_25 WL, Nr. 9 |
| 10 | ལས་ཚོགས་ | las tshogs | Subst. | rituelle Verrichtung | Lekt_25 WL, Nr. 10 |
| 11 | རྒྭ་ལོ་ | rgwa lo | NZ | rGwa lo | Lekt_25 WL, Nr. 11 |
| 12 | བསྡུ་བ་ | bsdu ba | tdV; 3.SF | sammeln | Lekt_25 WL, Nr. 12 |
| 13 | བཤམས་པ་ | bshams pa | tdV; 2.SF | zubereiten; zurechtmachen | Lekt_25 WL, Nr. 13 |
| 14 | བསྲིངས་པ་ | bsrings pa | tdV; 2.SF | verlaengern; hinausschieben | Lekt_25 WL, Nr. 14 |
| 15 | ཡར་ཀླུངས་སྐྱའོ་ | yar klungs skya'o | EN | Yar klungs sKya'o (Kloster) | Lekt_25 WL, Nr. 15 |
| 16 | གཅོད་ | gcod | EN | gCod (religioese Lehre) | Lekt_25 WL, Nr. 16 |
| 17 | ཤ་མི་ | sha mi | NZ | Sha mi | Lekt_25 WL, Nr. 17 |
| 18 | སློབ་གཉེར་ | slob gnyer | Subst. | Studium | Lekt_25 WL, Nr. 18 |
| 19 | ཡོལ་བ་བྲག་ | yol ba brag | ON | Yol ba brag | Lekt_25 WL, Nr. 19 |
| 20 | ཡོལ་ཆུང་བ་ | yol chung ba | NZ | Yol chung ba | Lekt_25 WL, Nr. 20 |
| 21 | འཚུར་ཕུ་ | 'tshur phu | ON; EN | 'Tshur phu (Kloster) | Lekt_25 WL, Nr. 21 |
| 22 | སྐྱེར་སྒང་པ་ | skyer sgang pa | NZ | sKyer sgang pa | Lekt_25 WL, Nr. 22 |
| 23 | དངོས་ | dngos | Adj. | wirklich; echt | Lekt_25 WL, Nr. 23 |
| 24 | གྲོངས་པ་ | grongs pa | tmdV; 2.SF | sterben (resp.) | Lekt_25 WL, Nr. 24 |
| 25 | ཟིན་པ་ | zin pa | tmdV; 1.,2.,3.SF; HiV | vollendet werden; erschoepft sein | Lekt_25 WL, Nr. 25 |
| 26 | ལྷ་ས་རྐྱང་ཐང་ | lha sa rkyang thang | ON | lHa sa rkyang thang | Lekt_25 WL, Nr. 26 |
| 27 | ལན་ | lan | Subst. | Antwort | Lekt_25 WL, Nr. 27 |
[Quelle: Lekt_25 WL]
Grammatik
Perfekt
[Quelle: Lekt_25 HO, S. 1--3]
Das Perfekt wird im klassischen Tibetisch analytisch durch ein zusammengesetztes Praedikat gebildet: Hauptverb (2.SF) + Konjunktion + Hilfsverb. Es werden vier Formbildungen unterschieden.
| Hauptverb | Konjunktion | Hilfsverb |
| 2.SF | -pa | - | yin / lags |
[Quelle: Lekt_25 HO, S. 1]
རང་ལོ་ལྔ་བཅུ་རྩ་དྲུག་པ་ཆུ་ལུག་དེ་ལ་འདས་པ་ཡིན།
Wylie: rang lo lnga bcu rtsa drug pa chu lug de la 'das pa yin /
Morphemanalyse:
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| རང་ | rang | Pron. | selbst | ABtemp:PP |
| ལོ་ | lo | Subst. | Jahr | ABtemp:PP |
| ལྔ་བཅུ་རྩ་དྲུག་པ་ | lnga bcu rtsa drug pa | ZW | sechsundfuenfzig | ABtemp:PP |
| ཆུ་ | chu | Subst. | Wasser | ABtemp:PP |
| ལུག་ | lug | Subst. | Schaf | ABtemp:PP |
| དེ་ | de | DemPron | jener | ABtemp:PP |
| ལ་ | -la | PP | in | ABtemp:PP |
| འདས་པ་ | 'das pa | tmdV; 2.SF | sterben | P:VG6;2.SF;HV |
| ཡིན | yin | HV | sein | P:VG6;2.SF;HV |
G: rang lo lnga bcu rtsa drug pa chu lug de la \<ABtemp:PP\> 'das pa yin \<P:VG6;2.SF;HV\> /
Ue: In seinem sechsundfuenfzigsten [Lebens]jahr, einem Wasser-Schaf-[Jahr], ist [er] gestorben.
Anmerkungen:
- 'das pa ist die 2.SF von 'da' ba ("sterben"). Stammformen: 'da' ba -- 'das pa -- 'da' ba (tmdV). [Quelle: Lekt_25 HO, S. 1]
- Perfekt, Formbildung 1: 'das (2.SF) + pa (Konj.) + yin (HV). Die Konstruktion betont das Ergebnis: "ist gestorben" (= ist jetzt tot). [Quelle: Lekt_25 HO, S. 1]
- rang lo = "eigenes [Lebens]jahr". Die Kombination mit lnga bcu rtsa drug pa ("sechsundfuenfzig") und dem Tierjahr chu lug ("Wasser-Schaf") bildet eine temporale Adverbialbestimmung.
[Quelle: Lekt_25 HO, S. 1]
བདག་གིས་ལུས་ལོངས་སྤོད་ཕུལ་བ་ལགས་ཞུས་ [...]
Wylie: bdag gis lus longs spyod phul ba lags zhus [...]
Morphemanalyse:
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| བདག་ | bdag | PersPron; 1. Pers. | ich | S2:Erg |
| གིས་ | -gis | KSuf | Ergativ | S2:Erg |
| ལུས་ | lus | Subst. | Koerper | dO:Abs |
| ལོངས་སྤྱོད་ | longs spyod | Subst. | Reichtum | dO:Abs |
| ཕུལ་བ་ | phul ba | tdV; 2.,4.SF | geben; fortgeben | P2:VG1;2.SF;HV |
| ལགས་ | lags | HV | sein (resp.) | P2:VG1;2.SF;HV |
| ཞུས་ | zhus | tdV; 2.,4.SF | sagen; fragen (resp.) | P1:VG1;2.SF |
G: { bdag gis \<S2:Erg\> lus longs spyod 0 \<dO:Abs\> phul ba lags \<P2:VG1;2.SF;HV\> } zhus \<P1:VG1;2.SF\> [...]
Ue: [Sie] sagte (resp.): "Ich habe [meinen] Koerper [und meinen] Reichtum dargebracht."
Anmerkungen:
- phul ba ist die 2./4.SF von 'bul ba ("geben; darbringen", resp.). Stammformen: 'bul ba -- phul ba -- dbul ba -- phul (tdV). 'bul ba ist die Hoeflichkeitsform fuer "geben"; bei religioesen Gaben mit "darbringen" zu uebersetzen. [Quelle: Lekt_25 HO, S. 1]
- zhus ist die 2./4.SF von zhu ba ("sagen; fragen", resp.). Als aeusseres Praedikat (P1) rahmt es die direkte Rede ein.
- Perfekt, Formbildung 1: phul (2.SF) + ba (Konj.) + lags (HV, respektvoll). [Quelle: Lekt_25 HO, S. 1]
- Verschachtelter Satz: Die direkte Rede (P2) enthaelt das Perfekt, das aeussere Praedikat (P1) steht im einfachen Praeteritum (2.SF).
[Quelle: Lekt_25 HO, S. 1]
བོད་ཀྱི་མི་མ་ཡིན་རྣམས་མ་དགའ་བ་ཡིན།
Wylie: bod kyi mi ma yin rnams ma dga' ba yin /
Morphemanalyse:
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| བོད་ | bod | EN | Tibet | S:Abs |
| ཀྱི་ | -kyi | AttrSuf | Genitiv | S:Abs |
| མི་མ་ཡིན་ | mi ma yin | Subst. | Daemon (wtl.: Nicht-Mensch-Seiend[er]) | S:Abs |
| རྣམས་ | -rnams | PlSuf | Plural | S:Abs |
| མ་ | ma | NegPart | nicht | P:Neg;VG6;2.SF;HV |
| དགའ་བ་ | dga' ba | tmdV; 1.,2.,3.SF | erfreut sein | P:Neg;VG6;2.SF;HV |
| ཡིན | yin | HV | sein | P:Neg;VG6;2.SF;HV |
G: { bod kyi mi ma yin rnams 0 \<S:Abs\> ma dga' ba yin \<P:Neg;VG6;2.SF;HV\> / }
Ue: "Die Daemonen Tibets sind nicht erfreut gewesen."
Anmerkungen:
- dga' ba ist ein tmdV mit identischen Stammformen in 1., 2. und 3.SF: dga' ba -- dga' ba -- dga' ba (tmdV). [Quelle: Lekt_25 HO, S. 1]
- Negation des Perfekts (Formbildung 1): ma + 2.SF + -pa + yin. Die Negationspartikel ma steht direkt vor dem Hauptverb. [Quelle: Lekt_25 HO, S. 1]
- mi ma yin = "Nicht-Mensch-Seiend[er]", d.h. Daemon. Dies ist eine Nominalkomposition aus mi ("Mensch") + ma yin ("nicht seiend").
[Quelle: Lekt_25 HO, S. 1]
ཁོ་བོས་ཆོས་ལ་སེར་སྣ་བྱས་པ་མིན།
Wylie: kho bos chos la ser sna byas pa min /
Morphemanalyse:
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| ཁོ་བོ | kho bo | PersPron; 1. Pers. | ich | S:Erg |
| ས་ | -s | KSuf | Ergativ | S:Erg |
| ཆོས་ | chos | Subst. | Lehre | PO:PP |
| ལ་ | -la | PP | in Bezug auf | PO:PP |
| སེར་སྣ་ | ser sna | Subst. | Geiz | dO:Abs |
| བྱས་པ་ | byas pa | tdV; 2.SF | machen | P:VG1;2.SF;negHV |
| མིན | min | neg. HV | nicht sein | P:VG1;2.SF;negHV |
G: { kho bos \<S:Erg\> chos la \<PO:PP\> ser sna 0 \<dO:Abs\> byas pa min \<P:VG1;2.SF;negHV\> / }
Ue: "In Bezug [auf das Erteilen] dieser Lehre bin ich nicht geizig gewesen."
Anmerkungen:
- byas pa ist die 2.SF von byed pa ("machen; tun"). Stammformen: byed pa -- byas pa -- bya ba -- byos (tdV). [Quelle: Lekt_25 HO, S. 1]
- Alternative Negation des Perfekts (Formbildung 1): 2.SF + -pa + min (negiertes Hilfsverb). Statt ma + Verb + yin wird hier das negierte HV min verwendet. [Quelle: Lekt_25 HO, S. 1]
- ser sna byas pa = wtl. "Geiz gemacht", d.h. "geizig gewesen". Die Konstruktion ser sna byed pa ("Geiz machen") ist eine Nominalverb-Verbindung.
[Quelle: Lekt_25 HO, S. 1]
| Hauptverb | Konjunktion | Hilfsverb |
| 2.SF | -pa | [-r] | yod / 'dug |
| (1.SF) | - | -tu |
| - | -te |
| - | -nas |
| - | - |
[Quelle: Lekt_25 HO, S. 2]
ངའི་ཕ་སྤུན་མར་པ་མོན་ནག་བྱ་བ་འདི་ང་ལ་ཤིན་ཏུ་གནོད་པར་ཡོད་ [...]
Wylie: nga'i pha spun mar pa mon nag bya ba 'di nga la shin tu gnod par yod [...]
Morphemanalyse:
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| ང་ | nga | PersPron; 1. Pers. | ich | S:Abs |
| འི་ | -'i | AttrSuf | Genitiv | S:Abs |
| ཕ་སྤུན་ | pha spun | Subst. | vaterseitiger Cousin | S:Abs |
| མར་པ་ | mar pa | NZ | Mar pa | S:Abs |
| མོན་ནག་ | mon nag | NZ | Mon nag | S:Abs |
| བྱ་བ་ | bya ba | Part. | genannt; namens | S:Abs |
| འདི་ | 'di | DemPron | dieser | S:Abs |
| ང་ | nga | PersPron; 1. Pers. | ich | iO:Dat |
| ལ་ | -la | KSuf | Dativ | iO:Dat |
| ཤིན་ཏུ་ | shin tu | Adv. | sehr | ABmod:PP |
| གནོད་པ | gnod pa | tdV; 1.,2.,3.SF | schaden | P:VG2;2.SF;HV |
| ར་ | -r | Konj. | Konjunktion | P:VG2;2.SF;HV |
| ཡོད་ | yod | HV | vorhanden sein | P:VG2;2.SF;HV |
G: { nga'i pha spun mar pa mon nag bya ba 'di 0 (!) \<S:Abs\> nga la \<iO:Dat\> shin tu \<ABmod:PP\> gnod par yod \<P:VG2;2.SF;HV\> [...] }
Ue: "Mein vaterseitiger Cousin namens Mar pa Mon nag hat mir sehr geschadet."
Anmerkungen:
- gnod pa ist ein tdV mit identischen Stammformen in 1., 2. und 3.SF: gnod pa -- gnod pa -- gnod pa (tdV). [Quelle: Lekt_25 HO, S. 2]
- Perfekt, Formbildung 2: gnod pa (2.SF) + -r (Konj.) + yod (HV). Das HV yod signalisiert, dass der Sprecher dies aus eigenem Wissen berichtet (Evidentialitaet). [Quelle: Lekt_25 HO, S. 2]
- Das Subjekt steht trotz transitivem Verb (!) im Absolutiv (ohne Ergativmarkierung). Dies ist durch (!) gekennzeichnet und kann mit der VG2-Klassifizierung zusammenhaengen.
- bya ba 'di = "dieser, namens ...". bya ba fungiert als Relativpartikel ("der ... genannt wird").
[Quelle: Lekt_25 HO, S. 2]
སྔགས་པ་འགའ་ཤི་འདུག་ཟེར་བ་བྱུང་།
Wylie: sngags pa 'ga' shi 'dug zer ba byung /
Morphemanalyse:
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| སྔགས་པ་ | sngags pa | Subst. | Mantra-Praktizierender | S2:Abs |
| འགའ་ | 'ga' | IndPron | einige | S2:Abs |
| ཤི་ | shi | tmdV; 2.SF | sterben | P2:VG6;2.SF;HV |
| འདུག་ | 'dug | HV | sein (Wahrnehmung) | P2:VG6;2.SF;HV |
| ཟེར་བ་ | zer ba | tdV; 1.,2.,3.SF | sagen | P1:VG1;2.SF;HV |
| བྱུང་ | byung | HV | entstehen; widerfahren | P1:VG1;2.SF;HV |
G: { sngags pa 'ga' 0 \<S2:Abs\> shi 'dug \<P2:VG6;2.SF;HV\> } zer ba byung \<P1:VG1;2.SF;HV\> /
Ue: [Er] sagte: "Einige Mantra-Praktizierende sind gestorben."
Anmerkungen:
- shi ist die 2.SF von 'chi ba ("sterben"). Stammformen: 'chi ba -- shi ba -- 'chi ba (tmdV). [Quelle: Lekt_25 HO, S. 2]
- Perfekt, Formbildung 2: shi (2.SF) + 'dug (HV). Das HV 'dug signalisiert, dass der Sprecher dies aus eigener Wahrnehmung/Beobachtung berichtet (Evidentialitaet). [Quelle: Lekt_25 HO, S. 2]
- Verschachtelter Satz: Die direkte Rede (P2: shi 'dug) enthaelt das Perfekt mit 'dug, das aeussere Praedikat (P1: zer ba byung) steht im zusammengesetzten Praeteritum mit byung (nicht kontrolliert = die Nachricht ist dem Subjekt widerfahren).
[Quelle: Lekt_25 HO, S. 2]
དེའི་མདུན་ན་མཆོད་པ་ལྔ་བཤམས་ནས་འདུག །
Wylie: de'i mdun na mchod pa lnga bshams nas 'dug /
Morphemanalyse:
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| དེའི་ | de'i | DemPron + AttrSuf | jenes (Genitiv) | ABlok:PP |
| མདུན་ན་ | mdun na | PP | vor | ABlok:PP |
| མཆོད་པ་ | mchod pa | Subst. | Opfergaben | dO:Abs |
| ལྔ་ | lnga | ZW | fuenf | dO:Abs |
| བཤམས་ | bshams | tdV; 2.SF | zubereiten; zurechtmachen | P:VG1;2.SF;HV |
| ནས་ | -nas | Konj. | Konjunktion | P:VG1;2.SF;HV |
| འདུག | 'dug | HV | sein (Wahrnehmung) | P:VG1;2.SF;HV |
G: de'i mdun na \<ABlok:PP\> mchod pa lnga 0 \<dO:Abs\> bshams nas 'dug \<P:VG1;2.SF;HV\> /
Ue: Vor jenes [Rollbild] hat [er] fuenf Opfergaben platziert.
Anmerkungen:
- bshams ist die 2.SF von gzhom pa ("zubereiten; zurechtmachen"). Stammformen: gzhom pa -- bshams pa -- bsham pa -- shoms (tdV). [Quelle: Lekt_25 HO, S. 2]
- Perfekt, Formbildung 2 mit -nas als Konjunktion: bshams (2.SF) + nas (Konj.) + 'dug (HV). Das HV 'dug zeigt, dass der Sprecher dies beobachtet/festgestellt hat. [Quelle: Lekt_25 HO, S. 2]
- de'i mdun na = "vor jenem/jenes". Die PP mdun na ("vor") wird mit dem Genitiv (de'i) des Bezugsworts verbunden.
[Quelle: Lekt_25 HO, S. 2]
བླ་མ་ཞང་གི་འཁྲུག་པ་ལ་མི་རྣམས་མི་དགའ་བར་འདུག་ [...]
Wylie: bla ma zhang gi 'khrug pa la mi rnams mi dga' bar 'dug [...]
Morphemanalyse:
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| བླ་མ་ | bla ma | NZ | Bla ma | PO:PP |
| ཞང་ | zhang | NZ | Zhang | PO:PP |
| གི་ | -gi | AttrSuf | Genitiv | PO:PP |
| འཁྲུག་པ་ | 'khrug pa | Subst. | Aufruhr; Krieg | PO:PP |
| ལ་ | -la | PP | ueber; in Bezug auf | PO:PP |
| མི་ | mi | Subst. | Mensch | S:Abs |
| རྣམས་ | -rnams | PlSuf | Plural | S:Abs |
| མི་ | mi | NegPart | nicht | P:Neg;VG5;2.SF;HV |
| དགའ་བ | dga' ba | tmdV; 1.,2.,3.SF | erfreut sein | P:Neg;VG5;2.SF;HV |
| ར་ | -r | Konj. | Konjunktion | P:Neg;VG5;2.SF;HV |
| འདུག་ | 'dug | HV | sein (Wahrnehmung) | P:Neg;VG5;2.SF;HV |
G: { bla ma zhang gi 'khrug pa la \<PO:PP\> mi rnams 0 \<S:Abs\> mi dga' bar 'dug \<P:Neg;VG5;2.SF;HV\> [...] }
Ue: "Ueber den Aufruhr durch Bla ma Zhang sind die Leute nicht erfreut gewesen."
Anmerkungen:
- dga' ba ist ein tmdV mit identischen Stammformen in 1., 2. und 3.SF: dga' ba -- dga' ba -- dga' ba (tmdV). [Quelle: Lekt_25 HO, S. 2]
- Negation des Perfekts (Formbildung 2): mi + 2.SF + -r (Konj.) + 'dug (HV). Bei der 1.SF wird die Negationspartikel mi (statt ma) verwendet. [Quelle: Lekt_25 HO, S. 2]
- bla ma zhang gi 'khrug pa la = "ueber den Aufruhr durch Bla ma Zhang". Die Genitivkonstruktion (bla ma zhang gi) bestimmt 'khrug pa naeher, -la markiert die Postpositionalphrase.
[Quelle: Lekt_25 HO, S. 2]
| Hauptverb | Konjunktion | Hilfsverb |
| 2.SF | -pa | [-r] | song / phyin |
| - | -nas |
| - | -la |
| - | - |
[Quelle: Lekt_25 HO, S. 3]
[...] བེར་ནག་ཅན་གཟིམས་ཁང་འོག་མའི་ས་དེར་ཁལ་ཐམས་ཅད་ཕོག་སོང་ [...]
Wylie: [...] ber nag can gzims khang 'og ma'i sa der khal thams cad phog song [...]
Morphemanalyse:
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| བེར་ནག་ཅན་ | ber nag can | EN | Ber nag can (Gottheit) | S:Abs |
| གཟིམས་ཁང་ | gzims khang | Subst. | Residenz | ABlok:PP |
| འོག་མའི་ | 'og ma'i | Adj. + AttrSuf | unter (Genitiv) | ABlok:PP |
| ས་ | sa | Subst. | Ort; Platz | ABlok:PP |
| དེར་ | der | DemPron + PP | an jenem | ABlok:PP |
| ཁལ་ | khal | Subst. | Ladung | dO:Abs |
| ཐམས་ཅད་ | thams cad | IndPron | alle | dO:Abs |
| ཕོག་ | phog | tdV; 2.,4.SF | geben; einrichten | P:VG1;2.SF;HV |
| སོང་ | song | HV | gehen (kontrolliert) | P:VG1;2.SF;HV |
G: ber nag can 0 (!) \<S:Abs\> gzims khang 'og ma'i sa der \<ABlok:PP\> khal thams cad 0 \<dO:Abs\> phog song \<P:VG1;2.SF;HV\> [...]
Ue: Ber nag can hat die gesamte Ladung an den Platz unterhalb der Residenz gelegt.
Anmerkungen:
- phog ist die 2./4.SF von 'bogs pa ("geben; einrichten"). Stammformen: 'bogs pa -- phog pa -- dbog pa -- phog (tdV). [Quelle: Lekt_25 HO, S. 3]
- Perfekt, Formbildung 3: phog (2.SF) + song (HV). Das HV song signalisiert eine kontrollierte Handlung (das Subjekt hat dies absichtlich getan). [Quelle: Lekt_25 HO, S. 3]
- Das Subjekt steht trotz transitivem Verb (!) im Absolutiv (ohne Ergativmarkierung). Dies ist durch (!) gekennzeichnet.
- der = de + -r: DemPron de ("jener") mit der PP -r ("an") verschmolzen.
[Quelle: Lekt_25 HO, S. 3]
| Hauptverb | Konjunktion | Hilfsverb |
| 2.SF | -pa | -r | gyur (2.SF) |
[Quelle: Lekt_25 HO, S. 3]
མཁན་སློབ་རྣམས་ཀྱང་དགྱེས་པར་གྱུར།
Wylie: mkhan slob rnams kyang dgyes par gyur /
Morphemanalyse:
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| མཁན་ | mkhan [po] | Subst. | Lehrer (Kurzform) | S:Abs |
| སློབ་ | slob [ma] | Subst. | Schueler (Kurzform) | S:Abs |
| རྣམས་ | -rnams | PlSuf | Plural | S:Abs |
| ཀྱང་ | -kyang | FokPart | auch | S:Abs |
| དགྱེས་པ | dgyes pa | tmdV; 1.,2.,3.SF | sich freuen; erfreut sein | P:VG6;2.SF;HV |
| ར་ | -r | Konj. | Konjunktion | P:VG6;2.SF;HV |
| གྱུར | gyur | HV | werden (Zustandswechsel) | P:VG6;2.SF;HV |
G: mkhan slob rnams kyang 0 \<S:Abs\> dgyes par gyur \<P:VG6;2.SF;HV\> /
Ue: Auch Lehrer [und] Schueler sind erfreut gewesen.
Anmerkungen:
- dgyes pa ist ein tmdV mit identischen Stammformen in 1., 2. und 3.SF: dgyes pa -- dgyes pa -- dgyes pa (tmdV). [Quelle: Lekt_25 HO, S. 3]
- Perfekt, Formbildung 4: dgyes pa (2.SF) + -r (Konj.) + gyur (HV). Das HV gyur betont einen Zustandswechsel: "sind erfreut geworden" bzw. "sind erfreut gewesen". [Quelle: Lekt_25 HO, S. 3]
- mkhan slob = Kurzform fuer mkhan po ("Lehrer") und slob ma ("Schueler"). In Aufzaehlungen werden haeufig nur die ersten Silben der Komposita verwendet.
[Quelle: Lekt_25 HO, S. 3]
Aspekt
Aspekt-Funktionen der Stammformen des Hauptverbs in zusammengesetzten Praedikaten:
| 1.SF | 2.SF | 3.SF | 4.SF |
| Aspekt | Progressiv | Terminativ | - | - |
[Quelle: Lekt_25 HO, S. 3]
| Hauptverb (1.SF) | Hauptverb (2.SF) | Hilfsverben |
| Progressiv | - | yod / 'dug |
| Progressiv | - | bsdad / bzhugs (2.SF) |
| - | Terminativ | zin / tshar (2.SF) |
[Quelle: Lekt_25 HO, S. 3]
Die Konjunktion -cing und ihre Allomorphe
| Silbenende | Allomorph | Beispiele |
| -g / -d / -b | cing | byed cing |
| -ng / -n / -m / -' / -r / -l | zhing | bskor zhing |
| -s | shing | shes shing |
| Vokal | zhing | 'go zhing |
[Quelle: Lekt_25 HO, S. 4]
Die Konjunktion -kyin und ihre Allomorphe
| Silbenende | Allomorph | Beispiele |
| -d / -b / -s | kyin | byed kyin |
| -g / -ng | gin | 'ong gin |
| -n / -m / -r / -l | gin | zer gin |
| -' / Vokal | yin |
[Quelle: Lekt_25 HO, S. 4]
Progressiv
[Quelle: Lekt_25 HO, S. 4--5]
Der Progressiv drueckt aus, dass eine Handlung gerade im Verlauf ist ("war gerade dabei zu...").
| Hauptverb | Konjunktion | Hilfsverb |
| 1.SF | -cing / -kyin | yod / 'dug |
[Quelle: Lekt_25 HO, S. 4]
[...] ལོ་ཙཱ་བས་སློབ་གཉེར་བྱེད་ཅིང་འདུག །
Wylie: [...] lo tsa bas slob gnyer byed cing 'dug /
Morphemanalyse:
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| ལོ་ཙ་བ | lo tsa ba | NZ | Uebersetzer | S:Erg |
| ས་ | -s | KSuf | Ergativ | S:Erg |
| སློབ་གཉེར་ | slob gnyer | Subst. | Studium | dO:Abs |
| བྱེད་ | byed | tdV; 1.SF | machen; tun | P:VG1;1.SF;HV |
| ཅིང་ | cing | Konj. | Konjunktion (-cing) | P:VG1;1.SF;HV |
| འདུག | 'dug | HV | sein (Wahrnehmung) | P:VG1;1.SF;HV |
G: [...] lo tsa bas \<S:Erg\> slob gnyer 0 \<dO:Abs\> byed cing 'dug \<P:VG1;1.SF;HV\> /
Ue: Der Uebersetzer war gerade dabei Studien zu betreiben.
Anmerkungen:
- byed ist die 1.SF von byed pa ("machen; tun"). Stammformen: byed pa -- byas pa -- bya ba -- byos (tdV). [Quelle: Lekt_25 HO, S. 4]
- Progressiv, Formbildung 1: byed (1.SF) + cing (Konj.) + 'dug (HV). Die 1.SF signalisiert den progressiven Aspekt: die Handlung war gerade im Verlauf. [Quelle: Lekt_25 HO, S. 4]
- cing ist das Allomorph der Konjunktion -cing nach Silbenende -d (byed). [Quelle: Lekt_25 HO, S. 4]
[Quelle: Lekt_25 HO, S. 4]
| Hauptverb | Konjunktion | Hilfsverb |
| 1.SF | -cing / -kyin | bsdad / bzhugs (resp.) |
[Quelle: Lekt_25 HO, S. 4]
གཡོག་པོ་བྷ་དནྟས་དུར་སྨྲིག་ཏུ་རྟ་གསོ་ཞིང་བསྡད་པའི་ཚེ།
Wylie: g.yog po bha dan+tas dur smrig tu rta gso zhing bsdad pa'i tshe /
Morphemanalyse:
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| གཡོག་པོ་ | g.yog po | Subst. | Diener | S:Erg |
| བྷ་དནྟ | bha dan+ta | PN | Bhadanta | S:Erg |
| ས་ | -s | KSuf | Ergativ | S:Erg |
| དུར་སྨྲིག་ | dur smrig | ON | Dur smrig | ABlok:PP |
| ཏུ་ | -tu | PP | in | ABlok:PP |
| རྟ་ | rta | Subst. | Pferd | dO:Abs |
| གསོ་ | gso | tdV; 1.SF | fuettern | P:VG1;1.SF;HV;PP |
| ཞིང་ | -zhing | Konj. | Konjunktion (-cing) | P:VG1;1.SF;HV;PP |
| བསྡད་པ | bsdad pa | HV (tmdV; 2.SF) | sich aufhalten | P:VG1;1.SF;HV;PP |
| འི་ཚེ | -'i tshe | PP | als | P:VG1;1.SF;HV;PP |
G: g.yog po bha dantas \<S:Erg\> dur smrig tu \<ABlok:PP\> rta 0 \<dO:Abs\> gso zhing bsdad pa'i tshe \<P:VG1;1.SF;HV;PP\> /
Ue: Als der Diener Bhadanta in Dur smrig gerade die Pferde fuetterte, [...]
Anmerkungen:
- gso ist die 1.SF von gso ba ("fuettern; naehren"). Stammformen: gso ba -- gsos pa -- gso ba -- gsos (tdV). [Quelle: Lekt_25 HO, S. 4--5]
- Progressiv, Formbildung 2: gso (1.SF) + zhing (Konj.) + bsdad (HV). Die 1.SF signalisiert den progressiven Aspekt: die Handlung war gerade im Verlauf. Das HV bsdad (statt yod/'dug) ist die zweite Formbildung des Progressivs. [Quelle: Lekt_25 HO, S. 4--5]
- -zhing ist das Allomorph der Konjunktion -cing nach Silbenende mit Vokal (gso endet auf -o). [Quelle: Lekt_25 HO, S. 4]
- pa'i tshe = temporale PP "als; zur Zeit als". Der gesamte Satz ist ein Temporalnebensatz.
[Quelle: Lekt_25 HO, S. 4--5]
Der Terminativ
[Quelle: Lekt_25 HO, S. 5]
Der Terminativ drueckt aus, dass eine Handlung bereits abgeschlossen / vollendet ist ("bereits erlaeutert", "schon getan").
| Hauptverb | Konjunktion | Hilfsverb |
| 2.SF | -pa | zin / tshar |
[Quelle: Lekt_25 HO, S. 5]
Beispiel (Terminativ)
དེའི་རྣམ་པར་ཐར་པ་རགས་པ་གསང་འདུས་རྒྱུད་ལུགས་ཀྱི་སྐབས་སུ་བཤད་ཟིན་ [...] (DT: 677)
Wylie: de'i rnam par thar pa rags pa gsang 'dus rgyud lugs kyi skabs su bshad zin [...] (DT: 677)
Morphemanalyse:
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| དེའི་ | de'i | DemPron + AttrSuf | dessen (Genitiv) | dO:Abs |
| རྣམ་པར་ཐར་པ་ | rnam par thar pa | Subst. | Hagiographie | dO:Abs |
| རགས་པ་ | rags pa | Adj. | grob; kurzgefasst | dO:Abs |
| གསང་འདུས་རྒྱུད་ | gsang 'dus rgyud | EN | Guhyasamajatantra (Text) | ABlok:PP |
| ལུགས་ | lugs | Subst. | Tradition | ABlok:PP |
| ཀྱི་ | -kyi | AttrSuf | Genitiv | ABlok:PP |
| སྐབས་ | skabs | Subst. | Kapitel | ABlok:PP |
| སུ་ | -su | PP | im | ABlok:PP |
| བཤད་ | bshad | tdV; 2.,3.SF | erklaeren; erlaeutern | P:VG1;2.SF;HV |
| ཟིན་ | zin | HV | vollendet werden | P:VG1;2.SF;HV |
G: de'i rnam par thar pa rags pa 0 \<dO:Abs\> gsang 'dus rgyud lugs kyi skabs su \<ABlok:PP\> bshad zin \<P:VG1;2.SF;HV\>
Ue: Die kurze Hagiographie ueber ihn habe [ich] bereits im Kapitel ueber die Tradition des Guhyasamayatantra erlaeutert.
Anmerkungen:
- bshad ist die 2./3.SF von 'chad pa ("erklaeren; erlaeutern"). Stammformen: 'chad pa -- bshad pa -- bshad pa -- shod (tdV). [Quelle: Lekt_25 HO, S. 5]
- Terminativ: bshad (2.SF) + zin (HV). Die 2.SF des Hauptverbs signalisiert den terminativen Aspekt: die Handlung ist bereits abgeschlossen/vollendet. Das HV zin ("vollendet werden") verstaerkt diese Bedeutung: "bereits erlaeutert". [Quelle: Lekt_25 HO, S. 5]
- de'i rnam par thar pa rags pa = "die kurze Hagiographie ueber ihn/jenen". rags pa ("kurzgefasst") ist ein nachgestelltes Adjektiv zu rnam par thar pa.
- gsang 'dus rgyud lugs kyi skabs su = "im Kapitel ueber die Tradition des Guhyasamajatantra". Verschachtelte Genitivkonstruktion.
[Quelle: Lekt_25 HO, S. 5]
Uebungen
[Aus LEK_25 UEB.pdf]
Satz 1
Tibetisch: [...] ལོ་བརྒྱ་དང་བརྒྱད་སོང་བ་ཡིན་ནོ།
Wylie: [...] lo brgya dang brgyad song ba yin no/
Morphemanalyse:
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| ----------- | ------- | --------- | ----------- | ---------------------- |
| ལོ་ | lo | Subst. | Jahr | S:Abs |
| བརྒྱ་ | brgya | ZW | hundert | S:Abs |
| དང་ | dang | Konj. | und | S:Abs |
| བརྒྱད་ | brgyad | ZW | acht | S:Abs |
| སོང་བ་ | song ba | tmdV; 2.SF | gehen; vergehen | P:VG6;2.SF;HV |
| ཡིན་ | yin | HV | -- | P:VG6;2.SF;HV |
| ནོ་ | -no | FinSuf | Allomorph von -'o nach -n | FinSuf |
Stammformen: 'gro ba -- phyin pa / song ba -- 'gro ba -- song (tmdV)
G: [...] lo brgya dang brgyad 0 \<S:Abs\> song ba yin \<P:VG6;2.SF;HV\> no \<FinSuf\> /
Ue: [...] [es] sind hundertundacht Jahre vergangen.
Satzbauplan:
- P: song ba (VG6; tmdV; 2.SF): Satzbauplan VG6: S:Abs -- P.
- Perfekt, Formbildung 1: song (2.SF) + ba (Konj.) + yin (HV).
Anmerkungen:
- Der Satzanfang fehlt (gekennzeichnet durch [...]).
- lo brgya dang brgyad = "hundertundacht Jahre". Die Konstruktion brgya dang brgyad ist die regulaere Bildung zusammengesetzter Zahlen: hundert (brgya) und (dang) acht (brgyad). [Quelle: Lekt_02 WL]
- song ba ist die 2.SF von 'gro ba ("gehen"). Bei Zeitausdruecken wie lo ("Jahr") wird 'gro ba / song ba im Sinne von "vergehen; verstreichen" (von Zeit) verwendet.
- Das Verb 'gro ba ist ein transitmediates dynamisches Verb (tmdV), VG6 (intransitiv, nicht kontrollierbar): Das Subjekt (lo brgya dang brgyad) steht im Absolutiv, da es keine agentive Kontrolle ueber das Vergehen der Zeit hat.
- Perfekt, Formbildung 1: song (2.SF) + ba (Konjunktion) + yin (HV). [Quelle: Lekt_25 HO, S. 1]
- -no ist das Finalsuffix (Allomorph von -'o) nach dem Suffixkonsonanten -n von yin. Es markiert einen Aussagesatz. [Quelle: Lekt_11 HO, S. 2]
- Textquelle: Deb ther sngon po (Blaue Annalen) von 'Gos lo tsa ba gZhon nu dpal (1392-1481), verschiedene Kapitel. Englische Uebersetzung: Roerich, *The Blue Annals*. [Externe Quelle: WisdomLib, Roerich Blue Annals]
- Kontext: Eine Zeitangabe: Hundertundacht Jahre sind vergangen. Der fehlende Anfang ([...]) enthaelt vermutlich den Bezugspunkt, ab dem die Jahre gezaehlt werden -- wahrscheinlich ein historisches Ereignis wie eine Gruendung oder den Tod einer bedeutenden Person.
[Quelle: Lekt_25 UEB, Satz 1]
Satz 2
Tibetisch: [...] ངའི་བུ་དེ་ཤི་བ་ཡིན་ [...]
Wylie: [...] nga'i bu de shi ba yin [...]
Morphemanalyse:
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| ----------- | ------- | --------- | ----------- | ---------------------- |
| ང་ | nga | PersPron; 1. Pers. | ich | S:Abs |
| འི་ | -'i | AttrSuf | Genitiv | S:Abs |
| བུ་ | bu | Subst. | Sohn | S:Abs |
| དེ་ | de | DemPron | jener | S:Abs |
| ཤི་བ་ | shi ba | tmdV; 2.SF | sterben | P:VG6;2.SF;HV |
| ཡིན་ | yin | HV | -- | P:VG6;2.SF;HV |
Stammformen: 'chi ba -- shi ba -- 'chi ba (tmdV)
G: [...] nga'i bu de 0 \<S:Abs\> shi ba yin \<P:VG6;2.SF;HV\> [...]
Ue: [...] mein Sohn ist gestorben [...]
Satzbauplan:
- P: shi ba (VG6; tmdV; 2.SF): Satzbauplan VG6: S:Abs -- P.
- Perfekt, Formbildung 1: shi (2.SF) + ba (Konj.) + yin (HV).
Anmerkungen:
- Sowohl der Satzanfang als auch das Satzende fehlen (gekennzeichnet durch [...]).
- nga'i bu de = "mein Sohn" bzw. "jener Sohn von mir". nga'i ist die Genitivform von nga ("ich") mit dem Attributivsuffix -'i. de ("jener") bestimmt bu naeher.
- shi ba ist die 2.SF von 'chi ba ("sterben"), einem transitmediaten dynamischen Verb (tmdV). Da sterben nicht kontrollierbar ist, gehoert es zur VG6 (intransitiv, nicht kontrollierbar): Das Subjekt steht im Absolutiv (ohne Ergativmarkierung).
- Perfekt, Formbildung 1: shi (2.SF) + ba (Konjunktion) + yin (HV). [Quelle: Lekt_25 HO, S. 1]
- Vgl. das Beispiel im HO: 'das pa yin ("ist gestorben") -- gleiche Konstruktion mit anderem Verb fuer "sterben". [Quelle: Lekt_25 HO, S. 1]
- Textquelle: Deb ther sngon po (Blaue Annalen) von 'Gos lo tsa ba gZhon nu dpal (1392-1481), verschiedene Kapitel. Englische Uebersetzung: Roerich, *The Blue Annals*. [Externe Quelle: WisdomLib, Roerich Blue Annals]
- Kontext: Jemand berichtet ueber den Tod seines Sohnes. Der fehlende Kontext ([...]) enthaelt den Sprecher und den Rahmen dieser Aussage -- moeglicherweise eine Klage oder ein Bericht ueber einen Verlust im Umfeld einer religioesen Linie.
[Quelle: Lekt_25 UEB, Satz 2]
Satz 3
Tibetisch: ངའི་གཡོག་ཁྱེད་ཀྱིས་བྱས་པ་ཡིན་ [...]
Wylie: nga'i g.yog khyed kyis byas pa yin [...]
OCR-Korrektur: ཁེད (khed) -> ཁྱེད (khyed); ཀིས (kis) -> ཀྱིས (kyis) [fehlende Subskript-ya]
Morphemanalyse:
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| ----------- | ------- | --------- | ----------- | ---------------------- |
| ང | nga | PersPron; 1. Pers. | ich | dO:Abs |
| འི | -'i | AttrSuf | Genitiv | dO:Abs |
| གཡོག | g.yog | Subst. | Diener | dO:Abs |
| ཁྱེད | khyed | PersPron; 2. Pers.; resp. | Du; Ihr | S:Erg |
| ཀྱིས | kyis | KSuf | Ergativsuffix | S:Erg |
| བྱས་པ | byas pa | tdV/VG1; 2.SF | machen | P:VG1;2.SF;HV |
| ཡིན | yin | HV | Kopulaverb (sein) | P:VG1;2.SF;HV |
Stammformen: byed pa -- byas pa -- bya ba -- byos (tdV)
G: nga'i g.yog 0 \<dO:Abs\> khyed kyis \<S:Erg\> byas pa yin \<P:VG1;2.SF;HV\> [...]
Ue: Ihr habt [es zu] meinem Diener gemacht [...]
Satzbauplan:
- P: byas pa (VG1; tdV; 2.SF): Satzbauplan VG1: S:Erg -- dO:Abs -- P.
- Perfekt, Formbildung 1: byas (2.SF) + pa (Konj.) + yin (HV).
Anmerkungen:
- Das Satzende fehlt (gekennzeichnet durch [...]).
- Dieser Satz ist transitiv: khyed kyis ("Ihr" + Ergativsuffix) ist das Subjekt (Agens), markiert mit dem Kasussuffix kyis (Ergativ). nga'i g.yog ("meinen Diener") ist das direkte Objekt im Absolutiv (ohne Kasusmarkierung).
- byas pa ist die 2.SF von byed pa ("machen; handeln"), einem transitiven dynamischen Verb (tdV), VG1 (transitiv, kontrollierbar). Da das Verb transitiv ist, steht das Subjekt (Agens) im Ergativ. [Quelle: Lekt_07 WL; Lekt_13 WL]
- Perfekt, Formbildung 1: byas (2.SF) + pa (Konjunktion) + yin (HV). [Quelle: Lekt_25 HO, S. 1]
- Vgl. das HO-Beispiel zur Negation: kho bos chos la ser sna byas pa min ("bin ich nicht geizig gewesen") -- gleiche Verbkonstruktion mit byas pa + HV. [Quelle: Lekt_25 HO, S. 1]
- nga'i g.yog [...] byed pa ist eine Pseudokopula-Konstruktion ("zu/als meinem Diener machen"). Der konkrete Bezug ("es", "ihn") fehlt im ausgelassenen Teil [...]. Da der elidierte Satzteil in den Quellmaterialien nicht enthalten ist, bleibt das logische Objekt der Konstruktion im Deutschen mit "[es]" angedeutet.
- Textquelle: Deb ther sngon po (Blaue Annalen) von 'Gos lo tsa ba gZhon nu dpal (1392-1481), verschiedene Kapitel. Englische Uebersetzung: Roerich, *The Blue Annals*. [Externe Quelle: WisdomLib, Roerich Blue Annals]
- Kontext: Eine Aussage ueber eine Dienstverpflichtung: "Meinen Diener habt Ihr gemacht." Der fehlende Kontext ([...]) erlaeutert die naeheren Umstaende -- moeglicherweise eine Beschwerde oder Feststellung ueber die Behandlung eines Angehoerigen.
[Quelle: Lekt_25 UEB, Satz 3]
Satz 4
Tibetisch: དེ་དུས་ཁོ་ནར་སངས་རྒྱས་ཀྱི་བསྟན་པ་རིན་པོ་ཆེ་དར་བ་ཡིན་ནོ།
Wylie: de dus kho nar sangs rgyas kyi bstan pa rin po che dar ba yin no/
OCR-Korrektur: ཀི (ki) -> ཀྱི (kyi) [fehlende Subskript-ya]
Morphemanalyse:
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| ----------- | ------- | --------- | ----------- | ---------------------- |
| དེ་ | de | DemPron | jener | ABtemp:PP |
| དུས་ | dus | Subst. | Zeit | ABtemp:PP |
| ཁོ་ན་ | kho na | FokPart | ausschliesslich; genau | ABtemp:PP |
| ར་ | -r | PP | an; in | ABtemp:PP |
| སངས་རྒྱས་ | sangs rgyas | PN; Subst. | Buddha (Skt. buddha) | S:Abs |
| ཀྱི་ | -kyi | AttrSuf | Genitiv | S:Abs |
| བསྟན་པ་ | bstan pa | Subst. | Lehre | S:Abs |
| རིན་པོ་ཆེ་ | rin po che | Adj. | kostbar | S:Abs |
| དར་བ་ | dar ba | tmdV; 1.,2.,3.SF | sich ausbreiten; sich verbreiten | P:VG6;2.SF;HV |
| ཡིན་ | yin | HV | -- | P:VG6;2.SF;HV |
| ནོ་ | -no | FinSuf | Allomorph von -'o nach -n | FinSuf |
Stammformen: dar ba -- dar ba -- dar ba (tmdV)
G: de dus kho nar \<ABtemp:PP\> sangs rgyas kyi bstan pa rin po che 0 \<S:Abs\> dar ba yin \<P:VG6;2.SF;HV\> no \<FinSuf\> /
Ue: Genau zu jener Zeit hat sich die kostbare Lehre des Buddha verbreitet.
Satzbauplan:
- P: dar ba (VG6; tmdV; 2.SF): Satzbauplan VG6: S:Abs -- P.
- Perfekt, Formbildung 1: dar (2.SF) + ba (Konj.) + yin (HV).
Anmerkungen:
- de dus = "zu jener Zeit" (Temporaladverbial). de ("jener") + dus ("Zeit") bilden zusammen eine temporale Bestimmung.
- kho nar: kho na ("ausschliesslich; genau") ist eine Fokuspartikel [Quelle: Lekt_14 WL, Nr. 19]. Das -r ist eine Postposition ("in/an") und verbindet die temporale Bestimmung de dus kho na mit dem Satz: "genau zu jener Zeit". Die Gesamtphrase de dus kho nar fungiert als Temporaladverbial mit Postposition (ABtemp:PP).
- sangs rgyas kyi bstan pa rin po che = "die kostbare Lehre des Buddha". sangs rgyas kyi = "des Buddha" (Attributivsuffix). bstan pa = "Lehre" (Subst., nominalisiertes Verb von ston pa "lehren/zeigen"). rin po che = "kostbar" (Adj.), hier als Attribut zu bstan pa.
- dar ba ist ein transitmediates dynamisches Verb (tmdV), VG6 (intransitiv, nicht kontrollierbar): "sich ausbreiten; sich verbreiten". Die Stammformen sind in allen drei Stammformen identisch: dar ba -- dar ba -- dar ba. [Quelle: Lekt_13 HO, S. 4]
- Perfekt, Formbildung 1: dar (2.SF) + ba (Konjunktion) + yin (HV). [Quelle: Lekt_25 HO, S. 1]
- -no ist das Finalsuffix (Allomorph von -'o) nach dem Suffixkonsonanten -n von yin. [Quelle: Lekt_11 HO, S. 2]
- Textquelle: Deb ther sngon po (Blaue Annalen) von 'Gos lo tsa ba gZhon nu dpal (1392-1481), verschiedene Kapitel. Englische Uebersetzung: Roerich, *The Blue Annals*. [Externe Quelle: WisdomLib, Roerich Blue Annals]
- Kontext: Eine historische Feststellung: Genau zu jener Zeit hat sich die kostbare Lehre des Buddha verbreitet. Dies ordnet die Verbreitung des Buddhismus in Tibet in einen konkreten historischen Zeitrahmen ein.
[Quelle: Lekt_25 UEB, Satz 4]
Satz 5
Tibetisch: ཆུ་སྟག་འདི་ལ་ཆོས་རྗེ་ས་སྐྱ་པཎྜིཏ་འཁྲུངས་པ་ཡིན།
Wylie: chu stag 'di la chos rje sa skya paN Di ta 'khrungs pa yin/
OCR-Korrektur: རེ (re) -> རྗེ (rje) [fehlende Subskript-ja; "chos rje" = Dharma-Herr, Ehrentitel des Sa skya Pandita]
Morphemanalyse:
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| ----------- | ------- | --------- | ----------- | ---------------------- |
| ཆུ་ | chu | Subst. | Wasser | ABtemp:PP |
| སྟག་ | stag | Subst. | Tiger | ABtemp:PP |
| འདི་ | 'di | DemPron | dieser | ABtemp:PP |
| ལ་ | -la | PP | in | ABtemp:PP |
| ཆོས་རྗེ་ | chos rje | NZ | Ehrentitel: "Dharma-Herr" | S:Abs |
| ས་སྐྱ་ | sa skya | ON | Sa skya | S:Abs |
| པཎྜི་ཏ་ | paN Di ta | Subst. | Schriftgelehrter (Skt. paNDita) | S:Abs |
| འཁྲུངས་པ་ | 'khrungs pa | tmdV; 2.SF; resp. | geboren werden | P:VG6;2.SF;HV |
| ཡིན་ | yin | HV | -- | P:VG6;2.SF;HV |
Stammformen: 'khrung ba -- 'khrungs pa -- 'khrung ba (tmdV)
G: chu stag 'di la \<ABtemp:PP\> chos rje sa skya paN Di ta 0 \<S:Abs\> 'khrungs pa yin \<P:VG6;2.SF;HV\> /
Ue: In diesem Wasser-Tiger-[Jahr] ist Chos rje Sa skya Pandita geboren worden.
Satzbauplan:
- P: 'khrungs pa (VG6; tmdV; 2.SF; resp.): Satzbauplan VG6: S:Abs -- P.
- Perfekt, Formbildung 1: 'khrungs (2.SF) + pa (Konj.) + yin (HV).
Anmerkungen:
- chu stag = "Wasser-Tiger-[Jahr]". Das tibetische Kalendersystem kombiniert Elemente (chu = Wasser) mit Tierkreistieren (stag = Tiger) zu einem Sechziger-Zyklus. [Quelle: Lekt_03 WL]
- 'di la = "in diesem" -- 'di (DemPron "dieser") + -la (PP "in"). Die Phrase chu stag 'di la bildet ein Temporaladverbial: "in diesem Wasser-Tiger-Jahr".
- chos rje sa skya paN Di ta ist der volle Titel und Name: chos rje ("Dharma-Herr", Ehrentitel) [Quelle: Lekt_10 WL] + sa skya ("Sa skya", Ortsname/Schulzugehoerigkeit) [Quelle: Lekt_06 WL] + paN Di ta ("Schriftgelehrter") [Quelle: Lekt_14 WL, Nr. 31]. Gemeint ist der beruehmte Gelehrte Kun dga' rgyal mtshan (1182--1251), bekannt als Sa skya Pandita.
- OCR-Korrektur: ཆོས་རེ་ (chos re) -> ཆོས་རྗེ་ (chos rje) [fehlende Subskript-ja; "chos rje" = Dharma-Herr, Ehrentitel des Sa skya Pandita].
- 'khrungs pa ist die respektvolle 2.SF von 'khrung ba ("geboren werden"), einem transitmediaten dynamischen Verb (tmdV), VG6 (intransitiv, nicht kontrollierbar). Die Respektform wird fuer hochgestellte religioese Persoenlichkeiten verwendet. [Quelle: Lekt_04 WL, Nr. 87; Lekt_13 HO, S. 5]
- Perfekt, Formbildung 1: 'khrungs (2.SF) + pa (Konjunktion) + yin (HV). [Quelle: Lekt_25 HO, S. 1]
- Historische Anmerkung: Sa skya Pandita wurde in einem Wasser-Tiger-Jahr (chu stag) geboren. Das entspricht dem Jahr 1182 n. Chr.
- Textquelle: Deb ther sngon po (Blaue Annalen) von 'Gos lo tsa ba gZhon nu dpal (1392-1481), Buch 4 (Sa skya-Tradition). Englische Uebersetzung: Roerich, *The Blue Annals*. [Externe Quelle: WisdomLib, Roerich Blue Annals]
- Kontext: Die Geburt des beruehmten Sa skya Pandita (Kun dga' rgyal mtshan, 1182-1251) wird im Wasser-Tiger-Jahr datiert. Sa skya Pandita war einer der bedeutendsten Gelehrten der Sa skya-Schule und spielte eine Schluesselrolle in der Geschichte des tibetischen Buddhismus.
[Quelle: Lekt_25 UEB, Satz 5]
Satz 6
Tibetisch: དེས་བདག་ལ་གནང་བ་ལགས་སོ།
Wylie: des bdag la gnang ba lags so/
Morphemanalyse:
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| ----------- | ------- | --------- | ----------- | ---------------------- |
| དེ་ | de | DemPron | jener | S:Erg |
| ས་ | -s | KSuf | Ergativ; nach Vokal | S:Erg |
| བདག་ | bdag | PersPron; 1. Pers.; eleg. | ich | iO:Dat |
| ལ་ | -la | KSuf | Dativ | iO:Dat |
| གནང་བ་ | gnang ba | tdV; 1.,2.,3.SF; resp. | geben; ueberreichen | P:VG1;2.SF;HV |
| ལགས་ | lags | HV | sein (resp.); anstelle von yin | P:VG1;2.SF;HV |
| སོ་ | -so | FinSuf | -- | FinSuf |
Stammformen: gnang ba -- gnang ba -- gnang ba -- gnongs (tdV) [Quelle: Lekt_11 WL, Nr. 26; Lekt_21 HO, S. 3]
G: des <S:Erg> bdag la <iO:Dat> gnang ba lags <P:VG1;2.SF;HV> so <FinSuf> /
Ue: Jener hat [es] mir gegeben (resp.).
Satzbauplan:
- P: gnang ba (VG1; tdV; 2.SF; resp.): Satzbauplan VG1: S:Erg -- [iO:Dat] -- dO:Abs -- P.
- Perfekt, Formbildung 1: gnang (2.SF) + ba (Konj.) + lags (resp. HV anstelle von yin).
- Sonderfall: Fehlendes dO. Das direkte Objekt (das Gegebene) fehlt im Satz und muss aus dem Kontext erschlossen werden.
Anmerkungen:
- Perfekt, Formbildung 1: Hauptverb (2.SF) + -pa + HV. Hier steht lags (respektvolle Kopula) anstelle von yin. Vgl. das Handout-Beispiel: bdag gis lus longs spyod phul ba lags ("Ich habe Koerper [und] Reichtum fortgegeben") [Quelle: Lekt_25 HO, S. 1].
- Das Subjekt des (de + -s) steht im Ergativ, da gnang ba ein transitives dynamisches Verb (VG1) ist. Das Subjekt wird im Kontext der Erzaehlung naeher bestimmt.
- bdag la ist das indirekte Objekt im Dativ ("mir"). Das direkte Objekt (das Gegebene) fehlt im Satz und muss aus dem vorangehenden Kontext erschlossen werden.
- so als Finalsuffix markiert das Satzende in erzaehlenden Kontexten. [Quelle: Lekt_20 HO]
- gnang ba ist die respektvolle Form von "geben" (vgl. nicht-resp. sbyin pa / phul ba). Alle drei Stammformen sind identisch (gnang ba -- gnang ba -- gnang ba). Die 2.SF ist hier formal nicht von der 1. oder 3.SF unterscheidbar; die Perfekt-Konstruktion mit -pa + HV zeigt jedoch, dass die 2.SF vorliegt. [Quelle: Lekt_11 WL, Nr. 26]
- Textquelle: Deb ther sngon po (Blaue Annalen) von 'Gos lo tsa ba gZhon nu dpal (1392-1481), verschiedene Kapitel. Englische Uebersetzung: Roerich, *The Blue Annals*. [Externe Quelle: WisdomLib, Roerich Blue Annals]
- Kontext: Jemand berichtet, dass eine bestimmte Person (des) ihm (bdag la) etwas gegeben hat. Das direkte Objekt (das Gegebene) fehlt und ist aus dem vorangehenden Erzaehlkontext zu erschliessen -- moeglicherweise eine Lehruebertragung oder materielle Gabe.
[Quelle: Lekt_25 UEB, Satz 6]
Satz 7
Tibetisch: ཕྱིས་འདི་ཡང་གྲུབ་ཐོབ་ཏུ་འདུག་གསུང་།
Wylie: phyis 'di yang grub thob tu 'dug gsung/
OCR-Korrektur: ཕིས་ (phis) -> ཕྱིས་ (phyis) [fehlende Subskript-ya]
Morphemanalyse:
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| ----------- | ------- | --------- | ----------- | ---------------------- |
| ཕྱིས་ | phyis | Adv. | spaeter | ABtemp |
| འདི་ | 'di | DemPron | dieser | S:Abs |
| ཡང་ | yang | FokPart | auch | S:Abs |
| གྲུབ་ཐོབ་ | grub thob | Subst. | Verwirklichter; Siddha (Skt. siddha) | SPraed:Essiv |
| ཏུ་ | -tu | KSuf | Essiv: "zu; als" | SPraed:Essiv |
| འདུག་ | 'dug | HV | evidentiell; Formbildung 2 | P:VG6;KV;HV |
| གསུང་ | gsung | tdV; 1.,3.SF; resp. | sagen | P1:VG1;1./3.SF |
G: { phyis <ABtemp> 'di yang 0 <S:Abs> grub thob tu 'dug <P:VG6;KV;HV> } gsung <P1:VG1;1./3.SF> /
Ue: [Er] sagte: "Spaeter ist dieser auch ein Siddha geworden."
Satzbauplan:
- P1 (aeusserer Satz): gsung (VG1; tdV; 1./3.SF; resp.): S:Erg -- Zitat -- P.
- P2 (innerer Satz): grub thob tu 'dug (Kopularkonstruktion): S:Abs -- SPraed:Essiv -- KV/HV.
- Sonderfall: Kopularkonstruktion im inneren Satz. grub thob ist Praedikatsnomen, -tu Essiv-Suffix, 'dug evidentielles HV.
Anmerkungen:
- Direkte Rede: Der aeussere Satz hat gsung als Praedikat ("sagte"), der innere Satz ist der Redeinhalt.
- grub thob tu 'dug: Hier liegt eine Kopularkonstruktion vor. grub thob ist das Praedikatsnomen ("Siddha"), -tu ist die Konjunktion/das Essiv-Suffix ("als/zu"), und 'dug fungiert als evidentielles Hilfsverb. Die Konstruktion drueckt aus: "[Er] ist (offenbar) ein Siddha geworden/gewesen." Vgl. Perfekt, Formbildung 2 (2.SF + -tu + 'dug) [Quelle: Lekt_25 HO, S. 2].
- 'dug als HV zeigt evidentiellen Bezug: Der Sprecher berichtet etwas, das er wahrgenommen oder erfahren hat (im Gegensatz zu yod, das selbstbekannte Sachverhalte ausdrueckt).
- grub thob (Skt. siddha): "Verwirklichter" -- eine Person, die hohe spirituelle Verwirklichung (grub pa) erlangt (thob pa) hat. [Quelle: Lekt_08 WL, Nr. 41]
- gsung ohne Finalsuffix am Satzende; der Satz ist moeglicherweise ein Fragment (Teil eines laengeren Satzgefueges).
- Die Analyse als Kopularkonstruktion (SPraed + KV/HV) statt als Perfekt eines Vollverbs ist hier vorzuziehen, da grub thob ein etabliertes Substantiv ist (Skt. siddha; Lekt_08 WL, Nr. 41). Eine Lesung mit thob als 2.SF von thob pa scheidet aus, weil dann das Praedikatsnomen grub fehlte und der Essiv-Marker -tu unmotiviert waere. Die Konstruktion grub thob tu 'dug entspricht dem Schema "S:Abs -- SPraed:Essiv -- KV/HV" der Perfekt-Formbildung 2 (vgl. HO-Beispiel grub thob tu 'dug). [Quelle: Lekt_25 HO, S. 2; Lekt_08 WL, Nr. 41]
- mar pa (Mar pa chos kyi blo gros): "Marpa der Uebersetzer" (1012-1097), Stammvater der Kagyu-Schule, studierte bei Naropa und Maitripa in Indien, beruehmtester Schueler: Milarepa. [Externe Quelle: diverse Online-Enzyklopaedien]
- Textquelle: Deb ther sngon po (Blaue Annalen) von 'Gos lo tsa ba gZhon nu dpal (1392-1481), Buch 7 oder 8 (Kagyu-Kapitel). Englische Uebersetzung: Roerich, *The Blue Annals*. [Externe Quelle: WisdomLib, Roerich Blue Annals]
- Kontext: Ein Meister (resp.) sagt ueber eine Person, dass diese spaeter auch ein Siddha (Verwirklichter) geworden ist. Dies steht im Kontext der Kagyu-Linie und der Anerkennung spiritueller Verwirklichung innerhalb der Ueberlieferung.
[Quelle: Lekt_25 UEB, Satz 7]
Satz 8
Tibetisch: [...] བླ་མ་རྩ་མི་མི་བཞུགས་པར་འདུག་ [...]
Wylie: [...] bla ma rtsa mi mi bzhugs par 'dug [...]
Morphemanalyse:
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| ----------- | ------- | --------- | ----------- | ---------------------- |
| བླ་མ་ | bla ma | NZ | geistlicher Lehrer | S:Abs |
| རྩ་མི་ | rtsa mi | NZ | rTsa mi | S:Abs |
| མི་ | mi | NegPart | nicht | P:Neg;VG5;2.SF;HV |
| བཞུགས་པ་ | bzhugs pa | tmdV; 1.,2.,3.,4.SF; resp. | sitzen; wohnen; verweilen | P:Neg;VG5;2.SF;HV |
| ར་ | -r | Konj. | Konjunktion (-pa + -r) | P:Neg;VG5;2.SF;HV |
| འདུག་ | 'dug | HV | evidentiell | P:Neg;VG5;2.SF;HV |
Stammformen: bzhugs pa -- bzhugs pa -- bzhugs pa -- bzhugs (tmdV) [Quelle: Lekt_04 WL; Lekt_14 WL]
G: [...] bla ma rtsa mi 0 <S:Abs> mi bzhugs par 'dug <P:Neg;VG6;2.SF;HV> [...]
Ue: [...] Bla ma rTsa mi verweilte nicht (hat nicht verweilt) [...]
Satzbauplan:
- P: bzhugs pa (VG5; tmdV; 2.SF; resp.): Satzbauplan VG5: S:Abs -- ABlok:PP -- P.
- Negiertes Perfekt, Formbildung 2: mi + bzhugs (2.SF) + -par (Konj.) + 'dug (HV).
- Sonderfall: Fehlende Lokativbestimmung (ABlok). Die Ortsangabe fehlt moeglicherweise im ausgelassenen Satzteil [...].
Anmerkungen:
- Negiertes Perfekt, Formbildung 2: mi + 2.SF + -par + 'dug. Vgl. das Negationsbeispiel im Handout: mi dga' bar 'dug ("sind nicht erfreut gewesen") [Quelle: Lekt_25 HO, S. 2].
- Die Negationspartikel mi steht unmittelbar vor dem Hauptverb bzhugs; das HV 'dug bleibt unnegiert.
- bla ma rtsa mi: Eigenname, zusammengesetzt aus dem Titel bla ma und dem Namenszusatz rTsa mi [Quelle: Lekt_25 WL, Nr. 2].
- Die OCR zeigt klar "rtsa mi mi bzhugs". Die Lesung "Bla ma rTsa mi" (Eigenname) + "mi bzhugs par 'dug" (verweilte nicht, evidentiell) ist die wahrscheinlichste Analyse.
- Eine alternative Lesung als bla ma rtsa ba ("Wurzellama") mit OCR-Fehler ba --> mi entfaellt, da rtsa mi explizit als Namenszusatz in der WL der Lektion (Nr. 2) gefuehrt wird. Die OCR-Vorlage und die WL stuetzen damit eindeutig die Lesung "Bla ma rTsa mi". [Quelle: Lekt_25 WL, Nr. 2]
- bzhugs pa ist das respektvolle Aequivalent zu 'dug pa / sdod pa ("sich aufhalten; sitzen"). Die Verwendung von bzhugs zeigt, dass es sich um eine respektierte Person handelt.
- 'dug als HV zeigt evidentiellen Bezug: Der Sprecher berichtet etwas, das er wahrgenommen hat oder das ihm berichtet wurde.
- Der Satz ist ein Fragment (Anfang und Ende fehlen).
- Textquelle: Deb ther sngon po (Blaue Annalen) von 'Gos lo tsa ba gZhon nu dpal (1392-1481), verschiedene Kapitel. Englische Uebersetzung: Roerich, *The Blue Annals*. [Externe Quelle: WisdomLib, Roerich Blue Annals]
- Kontext: Bla ma rTsa mi verweilte nicht (an einem bestimmten Ort). Der fehlende Kontext ([...]) nennt den Ort und die Umstaende -- moeglicherweise die Abwesenheit eines Lehrers, die Konsequenzen fuer den Schueler hatte.
[Quelle: Lekt_25 UEB, Satz 8]
Satz 9
Tibetisch: དེའི་ཚེ་ཡེར་པ་ན་སྒོམ་ཆེན་ཉི་ཁྲི་བྱ་བས་དམ་པའི་ཞབས་བཏེག་ནས་ཡོད་ [...]
Wylie: de'i tshe yer pa na sgom chen nyi khri bya bas dam pa'i zhabs bteg nas yod [...]
Morphemanalyse:
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| ----------- | ------- | --------- | ----------- | ---------------------- |
| དེ་ | de | DemPron | jener | ABtemp:PP |
| འི་ | -'i | AttrSuf | Genitiv | ABtemp:PP |
| ཚེ་ | tshe | Subst. | (Lebens-)zeit | ABtemp:PP |
| ཡེར་པ་ | yer pa | ON | Yer pa | ABlok:PP |
| ན་ | -na | PP; Lokativ | in | ABlok:PP |
| སྒོམ་ཆེན་ | sgom chen | Subst. | grosser Meditator (kurz fuer: sgom pa chen po) | S:Erg |
| ཉི་ཁྲི་ | nyi khri | PN | Nyi khri | S:Erg |
| བྱ་བ་ | bya ba | Part. | genannt; namens | S:Erg |
| ས་ | -s | KSuf | Ergativ | S:Erg |
| དམ་པ་ | dam pa | Subst. | der Edle | dO:Abs |
| འི་ | -'i | AttrSuf | Genitiv | dO:Abs |
| ཞབས་ | zhabs | Subst. | Fuss (resp.) | dO:Abs |
| བཏེག་ | bteg | tdV; 2.SF | emporheben | P:VG1;2.SF;HV |
| ནས་ | -nas | Konj. | Konjunktion | P:VG1;2.SF;HV |
| ཡོད་ | yod | HV | Existenzverb; selbstbekannt | P:VG1;2.SF;HV |
Stammformen bteg pa: 'degs -- bteg -- gdeg -- theg (tdV; VG1) [Quelle: Lekt_25 WL, Nr. 6 (nur 2.SF angegeben); vollstaendige Stammformen aus grammatik/verben.md, ergaenzt aus Rangjung Yeshe Wiki. Externe Quelle: Hill (2010): 'degs pa "emporheben"]
G: de'i tshe <ABtemp:PP> yer pa na <ABlok:PP> sgom chen nyi khri bya bas <S:Erg> dam pa'i zhabs 0 <dO:Abs> bteg nas yod <P:VG1;2.SF;HV> [...]
Ue: Zu jener Zeit hat in Yer pa der sogenannte grosse Meditator Nyi khri dem Edlen gedient (wtl.: die Fuesse des Edlen emporgehoben) [...]
Satzbauplan:
- P: bteg pa (VG1; tdV; 2.SF): Satzbauplan VG1: S:Erg -- [iO:Dat] -- dO:Abs -- P.
- Perfekt, Formbildung 2: bteg (2.SF) + -nas (Konj.) + yod (HV).
Anmerkungen:
- Perfekt, Formbildung 2: 2.SF (bteg) + -nas + HV (yod). Vgl. das Handout-Beispiel: bshams nas 'dug ("hat platziert") [Quelle: Lekt_25 HO, S. 2].
- sgom chen nyi khri bya ba: "der sogenannte grosse Meditator Nyi khri". bya ba ("genannt; namens") leitet den Personennamen ein. Der Ergativ -s nach bya ba markiert das Subjekt (Agens). [Quelle: Lekt_25 WL, Nr. 4; Nr. 5]
- dam pa'i zhabs bteg: Funktionsverbgefuege "dienen" (wtl.: "die Fuesse des Edlen emporheben"). zhabs ("Fuss", resp.) ist das direkte Objekt im Absolutiv, dam pa'i ("des Edlen") attributiver Genitiv dazu. Die Wendung zhabs (b)tegs/btegs pa ist eine respektvolle Idiomatik fuer "dienen". [Quelle: Lekt_25 WL, Nr. 6; Lekt_08 WL, Nr. 28]
- yod als HV zeigt selbstbekannte Perspektive (im Gegensatz zu 'dug, das evidentiell waere). Der Erzaehler berichtet aus eigener Kenntnis.
- OCR-Korrekturen: སོམ་ (som) -> སྒོམ་ (sgom) [fehlende Subskript-ga]; ཁི་ (khi) -> ཁྲི་ (khri) [fehlende Subskript-ra; vgl. WL Nr. 5: nyi khri].
- de'i tshe ("zu jener Zeit") ist eine haeufige temporale Adverbialbestimmung in erzaehlenden Texten.
- Der Satz ist ein Fragment (Ende fehlt).
- Textquelle: Deb ther sngon po (Blaue Annalen) von 'Gos lo tsa ba gZhon nu dpal (1392-1481), verschiedene Kapitel. Englische Uebersetzung: Roerich, *The Blue Annals*. [Externe Quelle: WisdomLib, Roerich Blue Annals]
- Kontext: Zu jener Zeit hat der sogenannte grosse Meditator Nyi khri in Yer pa dem Edlen (dam pa) gedient. Yer pa ist ein beruhmter Meditationsort in der Naehe von Lhasa, wo zahlreiche Hoehlen fuer kontemplative Praxis genutzt wurden.
[Quelle: Lekt_25 UEB, Satz 9]
Satz 10
Tibetisch: ཁྲོ་ཕུ་ལོ་ཙཱ་བའི་འགྱུར་ལ་ནི་མངོན་རྟོགས་རེའི་གཤམ་དུ་དེ་ཉིད་ཀྱི་ལས་ཚོགས་རྣམས་སོ་སོར་སེལ་ནས་ཡོད་དོ།
Wylie: khro phu lo tsA ba'i 'gyur la ni mngon rtogs re'i gsham du de nyid kyi las tshogs rnams so sor sel nas yod do/
OCR-Korrekturen: ཁོ་ (kho) -> ཁྲོ་ (khro) [fehlende Subskript-ra; vgl. WL Nr. 7]; རོགས་ (rogs) -> རྟོགས་ (rtogs) [fehlende Subskript-ta]; ཀི་ (ki) -> ཀྱི་ (kyi) [fehlende Subskript-ya].
Morphemanalyse:
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| ----------- | ------- | --------- | ----------- | ---------------------- |
| ཁྲོ་ཕུ་ | khro phu | ON | Khro phu | ABref:PP |
| ལོ་ཙཱ་བ་ | lo tsA ba | NZ | Uebersetzer | ABref:PP |
| འི་ | -'i | AttrSuf | Genitiv | ABref:PP |
| འགྱུར་ | 'gyur | Subst. | Uebersetzung | ABref:PP |
| ལ་ | -la | KSuf | -- | ABref:PP |
| ནི་ | ni | FokPart | Topikmarker | ABref:PP |
| མངོན་རྟོགས་ | mngon rtogs | Subst. | deutliches Erkennen; hier: Evokation [einer Gottheit] | ABlok:PP |
| རེ་ | re | IndPron | jede(r) einzelne | ABlok:PP |
| འི་ | -'i | AttrSuf | Genitiv | ABlok:PP |
| གཤམ་ | gsham | Subst. | Ende; hinterer Teil | ABlok:PP |
| དུ་ | -du | PP; Lokativ | in; an | ABlok:PP |
| དེ་ | de | DemPron | jener | dO:Abs |
| ཉིད་ | nyid | FokPart | eben; selbst | dO:Abs |
| ཀྱི་ | -kyi | AttrSuf | Genitiv | dO:Abs |
| ལས་ཚོགས་ | las tshogs | Subst. | rituelle Verrichtung | dO:Abs |
| རྣམས་ | -rnams | PlSuf | -- | dO:Abs |
| སོ་སོར་ | so sor | Adv. | einzeln; gesondert | ABmod |
| སེལ་ | sel | tdV; 2.SF | darlegen; klaeren | P:VG1;2.SF;HV |
| ནས་ | -nas | Konj. | -- | P:VG1;2.SF;HV |
| ཡོད་ | yod | HV | Existenzverb; selbstbekannt | P:VG1;2.SF;HV |
| དོ་ | -do | FinSuf | -- | FinSuf |
G: khro phu lo tsA ba'i 'gyur la ni \<ABref:PP\> mngon rtogs re'i gsham du \<ABlok:PP\> de nyid kyi las tshogs rnams 0 \<dO:Abs\> so sor \<ABmod\> sel nas yod \<P:VG1;2.SF;HV\> do \<FinSuf\> /
Ue: In der Uebersetzung des Khro phu lo tsA ba hat [er] am Ende jeder Evokation die jeweiligen rituellen Verrichtungen einzeln dargelegt.
Satzbauplan:
- P: sel (VG1; tdV; 2.SF): Satzbauplan VG1: S:Erg -- dO:Abs -- P.
- Perfekt, Formbildung 2: sel (2.SF) + -nas (Konj.) + yod (HV).
- Sonderfall: Fehlendes Ergativ-Subjekt. Das Subjekt (der Uebersetzer) ist implizit und muss aus dem Kontext erschlossen werden.
Anmerkungen:
- Perfekt, Formbildung 2: 2.SF (sel) + -nas + HV (yod). Vgl. das Handout-Beispiel: bshams nas 'dug ("hat platziert") [Quelle: Lekt_25 HO, S. 2].
- Lange nominale Kette: Der Satz enthaelt eine komplexe Struktur mit mehreren eingebetteten Genitivverbindungen:
(a) khro phu lo tsA ba'i 'gyur ("Uebersetzung des Khro phu-Uebersetzers") -- Referenzrahmen mit Topikmarker ni.
(b) mngon rtogs re'i gsham du ("am Ende jeder Evokation") -- lokale Adverbialbestimmung.
(c) de nyid kyi las tshogs rnams ("die jeweiligen rituellen Verrichtungen davon") -- direktes Objekt im Absolutiv.
- khro phu lo tsA ba: "der Uebersetzer aus Khro phu" -- ein bekannter tibetischer Uebersetzer. [Quelle: Lekt_25 WL, Nr. 7]
- mngon rtogs re'i: "jeder einzelnen Evokation" -- re ist das Indefinitpronomen "jede(r) einzelne" [Quelle: Lekt_08 WL, Nr. 64], mit Genitiv -'i.
- de nyid kyi: "davon eben; dessen" -- de nyid ist eine verstaerkte Form des Demonstrativpronomens de ("jener") + nyid ("eben; selbst"), die einen Rueckbezug auf das vorher Genannte herstellt [Quelle: Lekt_08 WL, Nr. 26; Lekt_09 WL, Nr. 32].
- so sor: "einzeln; gesondert" (Adv.) [Quelle: Lekt_15 WL] -- modifiziert das Verb sel und drueckt aus, dass die rituellen Verrichtungen separat / gesondert dargelegt werden.
- sel: Verb "darlegen; klaeren; beseitigen". Das Verb ist in den bisherigen Wortlisten (bis Lekt_25) nicht als eigenstaendiges Vokabel eingefuehrt. Stammformen nach Hill (2010): sel -- bsal -- gsal -- sol (tdV). Streng nach diesem Paradigma waere die Form sel die 1.SF (nicht 2.SF). Die hier vorliegende Konstruktion sel + nas + yod entspricht jedoch dem Muster der Perfekt-Formbildung 2 (2.SF + nas + HV) [Quelle: Lekt_25 HO, S. 2]; der Aufgabentext gibt sel hier dementsprechend als 2.SF, wobei in der klassischen Schriftsprache mehrere Stammformen orthographisch zusammenfallen koennen (vgl. die mehrfach in Lekt_25 belegten "(!)"-Faelle). [Externe Quelle: Hill (2010), Lexicon of Tibetan Verb Stems, s.v. sel ba "klaermachen; beseitigen; darlegen"]
- do als Finalsuffix markiert das Satzende (Aussagesatz). [Quelle: Lekt_11 HO]
- Textquelle: Deb ther sngon po (Blaue Annalen) von 'Gos lo tsa ba gZhon nu dpal (1392-1481), Buch 8, Kap. 20 (Khro phu lo tsA ba). Englische Uebersetzung: Roerich, *The Blue Annals*. [Externe Quelle: WisdomLib, Roerich Blue Annals]
- Kontext: In der Uebersetzung des Khro phu lo tsA ba hat der Uebersetzer am Ende jeder Evokation (mngon rtogs) die jeweiligen rituellen Verrichtungen (las tshogs) einzeln dargelegt. Dies beschreibt eine besondere Eigenschaft der Uebersetzungsmethode des Khro phu-Uebersetzers.
[Quelle: Lekt_25 UEB, Satz 10]
Satz 11
Tibetisch: རྒྭ་ལོས་སློབ་མར་བསྡུ་དགོས་དགོངས་ནས་འདུག [...]
Wylie: rgwa los slob mar bsdu dgos dgongs nas 'dug [...]
Morphemanalyse:
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| ----------- | ------- | --------- | ----------- | ---------------------- |
| རྒྭ་ལོ་ | rgwa lo | NZ | rGwa lo | S:Erg |
| ས་ | -s | KSuf | Ergativ | S:Erg |
| སློབ་མ་ | slob ma | Subst. | Schueler | PO:PP |
| ར་ | -r | PP | als; zu | PO:PP |
| བསྡུ་ | bsdu | tdV; 3.SF | sammeln | MV-Komplex:VG1;3.SF;MV |
| དགོས་ | dgos | MV | muessen; sollen | MV-Komplex:VG1;3.SF;MV |
| དགོངས་ | dgongs | tdV; 1.,2.,3.SF; resp. | denken; beabsichtigen | P:VG1;2.SF;Konj;HV |
| ནས་ | -nas | Konj. | Perfekt, Formbildung 2 | P:VG1;2.SF;Konj;HV |
| འདུག་ | 'dug | HV | Existenzverb | P:VG1;2.SF;Konj;HV |
Stammformen bsdu ba: 'du -- bsdus -- bsdu -- sdus (tdV; VG1) [Quelle: Lekt_25 WL, Nr. 12 (nur 3.SF angegeben); vollstaendige Stammformen aus grammatik/verben.md, ergaenzt aus Rangjung Yeshe Wiki. Externe Quelle: Hill (2010): 'du ba "sammeln"]
Stammformen dgongs pa: dgongs pa -- dgongs pa -- dgongs pa -- dgongs (tdV) [Quelle: Lekt_17, Satz 10]
G: rgwa los \<S:Erg\> slob mar \<PO:PP\> bsdu dgos \<MV-Komplex:VG1;3.SF;MV\> dgongs nas 'dug \<P:VG1;2.SF;Konj;HV\> [...]
Ue: rGwa lo hat beabsichtigt (resp.), [ihn] als Schueler aufnehmen zu muessen.
Satzbauplan:
- P (aeusseres Praedikat): dgongs pa (VG1; tdV; 2.SF; resp.): S:Erg -- MV-Komplex -- P.
- MV-Komplex (inneres Praedikat): bsdu (VG1; tdV; 3.SF) + dgos (MV): S:Erg -- PO:PP -- P.
- Perfekt, Formbildung 2: dgongs (2.SF) + nas (Konj.) + 'dug (HV).
- Sonderfall: MV-Konstruktion. bsdu dgos bildet den Modalitaetskomplex "aufnehmen muessen"; dgongs nas 'dug ist das uebergeordnete Praedikat.
Anmerkungen:
- Dreifache Praedikatskonstruktion: (1) bsdu (Hauptverb, 3.SF: "sammeln/aufnehmen") + (2) dgos (MV: "muessen") bilden den Modalitaetskomplex "aufnehmen muessen"; (3) dgongs nas 'dug (resp. "denken/beabsichtigen" im Perfekt, Formbildung 2 mit nas + 'dug) bildet das uebergeordnete Praedikat. Der Gesamtsinn: "hat beabsichtigt, [ihn] als Schueler aufnehmen zu muessen" oder freier: "hat daran gedacht (resp.), [ihn] als Schueler aufzunehmen".
- "slob mar bsdu" = "als Schueler aufnehmen/sammeln". Die PP -r nach slob ma markiert das Ziel/den Zweck der Handlung (vgl. slob mar 'gyur = "zum Schueler werden" in Lekt_20 UEB).
- Bei dgos pa als MV entfaellt die Konjunktion zwischen abhaengigem Hauptverb (bsdu) und MV (dgos). [Quelle: Lekt_23 HO, S. 1]
- dgongs nas 'dug: Perfekt, Formbildung 2 (2.SF + nas + 'dug). Da dgongs pa alle SF identisch hat (dgongs pa -- dgongs pa -- dgongs pa), ist die Form dgongs hier als 2.SF zu werten (Perfektbildung). Das HV 'dug zeigt evidentiellen Charakter (vom Erzaehler beobachtet/berichtet).
- Das Subjekt rgwa lo steht im Ergativ (-s), was zur transitiven Natur von dgongs pa (tdV) passt.
- OCR-Korrektur: སོབ (sob) wurde zu སློབ (slob) korrigiert [fehlende Subskript-la].
- Textquelle: Deb ther sngon po (Blaue Annalen) von 'Gos lo tsa ba gZhon nu dpal (1392-1481), verschiedene Kapitel. Englische Uebersetzung: Roerich, *The Blue Annals*. [Externe Quelle: WisdomLib, Roerich Blue Annals]
- Kontext: rGwa lo hat beabsichtigt (resp.), jemanden als Schueler aufzunehmen. Dies beschreibt die Absicht eines Meisters, einen neuen Schueler in seine Linie aufzunehmen -- ein wichtiger Moment in der Lehrer-Schueler-Beziehung.
[Quelle: Lekt_25 UEB, Satz 11]
Satz 12
Tibetisch: [...] དབང་བསྐུར་འདིས་ཚེ་བསྲིངས་ནས་འདུག་ [...]
Wylie: [...] dbang bskur 'dis tshe bsrings nas 'dug [...]
OCR-Korrektur: བསིངས་ (bsings) -> བསྲིངས་ (bsrings) [fehlende Subskript-ra; vgl. WL Nr. 14].
Morphemanalyse:
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| ----------- | ------- | --------- | ----------- | ---------------------- |
| དབང་བསྐུར་ | dbang bskur | Subst. | Weiheuebertragung; Ermaechtigung | ABkaus:PP |
| འདི་ | 'di | DemPron | dieser | ABkaus:PP |
| ས་ | -s | KSuf | Instrumental/Kausativ | ABkaus:PP |
| ཚེ་ | tshe | Subst. | [Lebens]zeit | dO:Abs |
| བསྲིངས་ | bsrings | tdV; 2.SF | verlaengern | P:VG1;2.SF;Konj;HV |
| ནས་ | -nas | Konj. | Perfekt, Formbildung 2 | P:VG1;2.SF;Konj;HV |
| འདུག་ | 'dug | HV | Existenzverb | P:VG1;2.SF;Konj;HV |
Stammformen bsrings: sring ba -- bsrings pa -- bsring ba -- srings (tdV) [Quelle: Lekt_15 HO, S. 2]
G: [...] dbang bskur 'dis \<ABkaus:PP\> tshe 0 \<dO:Abs\> bsrings nas 'dug \<P:VG1;2.SF;Konj;HV\> [...]
Ue: Aufgrund dieser Ermaechtigung ist [seine] Lebenszeit verlaengert worden.
Satzbauplan:
- P: bsrings pa (VG1; tdV; 2.SF): Satzbauplan VG1: S:Erg -- dO:Abs -- P.
- Perfekt, Formbildung 2: bsrings (2.SF) + -nas (Konj.) + 'dug (HV).
- Sonderfall: Instrumental/Kausativ statt Ergativ. 'dis (= 'di + -s) markiert hier nicht das agentive Subjekt, sondern die Ursache/das Mittel (ABkaus:PP). Das eigentliche Subjekt ist implizit.
Anmerkungen:
- Perfekt, Formbildung 2 (2.SF + nas + 'dug). [Quelle: Lekt_25 HO, S. 2]
- 'dis (= 'di + -s): Das Kasussuffix -s markiert hier nicht den Ergativ (kein belebtes Agens), sondern den Instrumental/Kausativ (ABkaus): "aufgrund dieser; durch diese". Die Ermaechtigung ist die Ursache/das Mittel der Verlaengerung.
- Diese Konstruktion ist identisch mit dem Beispiel in Lekt_15 HO, S. 2: dbang bskur 'dis tshe bsrings ("aufgrund dieser Weihe wurde [seine] Lebenszeit verlaengert"). [Quelle: Lekt_15 HO, S. 2]
- tshe steht als direktes Objekt im Absolutiv (ohne Kasusmarkierung).
- Das HV 'dug verleiht der Aussage evidentiellen Charakter (berichtet/beobachtet, nicht selbst erlebt).
- Das implizite Subjekt (derjenige, dessen Lebenszeit verlaengert wurde) ist aus dem Kontext zu erschliessen.
- OCR-Korrektur: བསིངས (bsings) wurde zu བསྲིངས (bsrings) korrigiert [fehlende Subskript-ra].
- Textquelle: Deb ther sngon po (Blaue Annalen) von 'Gos lo tsa ba gZhon nu dpal (1392-1481), verschiedene Kapitel. Englische Uebersetzung: Roerich, *The Blue Annals*. [Externe Quelle: WisdomLib, Roerich Blue Annals]
- Kontext: Aufgrund einer bestimmten Weiheuebertragung (dbang bskur) wurde die Lebenszeit einer Person verlaengert. Dies ist ein typisches Motiv in tibetischen Hagiographien, wo tantrische Einweihungen als lebensverlaengernd beschrieben werden.
[Quelle: Lekt_25 UEB, Satz 12]
Satz 13
Tibetisch: ཡར་ཀླུངས་སྐྱའོ་དགོན་པ་ལ་གཅོད་ཆོས་འཆད་ཅིང་ཡོད་ [...]
Wylie: yar klungs skya'o dgon pa la gcod chos 'chad cing yod [...]
Morphemanalyse:
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| ----------- | ------- | --------- | ----------- | ---------------------- |
| ཡར་ཀླུངས་སྐྱའོ་ | yar klungs skya'o | EN | Yar klungs sKya'o (Kloster) | ABlok:PP |
| དགོན་པ་ | dgon pa | Subst. | Kloster | ABlok:PP |
| ལ་ | -la | PP | in; an | ABlok:PP |
| གཅོད་ | gcod | EN | gCod (religioese Lehre) | dO:Abs |
| ཆོས་ | chos | Subst. | Lehre | dO:Abs |
| འཆད་ | 'chad | tdV; 1.SF | erklaeren; lehren | P:VG1;1.SF;Konj;HV |
| ཅིང་ | cing | Konj. | Progressiv, Formbildung 1 | P:VG1;1.SF;Konj;HV |
| ཡོད་ | yod | HV | Existenzverb | P:VG1;1.SF;Konj;HV |
Stammformen 'chad pa: 'chad pa -- bshad pa -- bshad pa -- shod (tdV) [Quelle: Lekt_12, Lekt_15, Lekt_25 HO, S. 5]
G: yar klungs skya'o dgon pa la \<ABlok:PP\> gcod chos 0 \<dO:Abs\> 'chad cing yod \<P:VG1;1.SF;Konj;HV\> [...]
Ue: Im Kloster Yar klungs sKya'o war [er] gerade dabei, die gCod-Lehre zu erklaeren.
Satzbauplan:
- P: 'chad pa (VG1; tdV; 1.SF): Satzbauplan VG1: S:Erg -- dO:Abs -- P.
- Progressiv, Formbildung 1: 'chad (1.SF) + cing (Konj.) + yod (HV).
- Sonderfall: Fehlendes Ergativ-Subjekt. Das Subjekt befindet sich vermutlich im ausgelassenen Teil [...].
Anmerkungen:
- Progressiv, Formbildung 1 (1.SF + cing + yod). [Quelle: Lekt_25 HO, S. 4]
- 'chad steht in der 1.SF (Praesensstamm), was den progressiven Aspekt ausdrueckt: "war gerade am Lehren". [Quelle: Lekt_25 HO, S. 3--4]
- gcod chos: "gCod-Lehre" -- Kompositum aus gcod (EN: gCod, eine religioese Lehre/Praxis) und chos (Lehre). gCod ist eine buddhistische Praxis des "Durchtrennens" [von Ichanhaftung].
- Das Allomorph der Konjunktion ist cing (nach Silbenende -d von 'chad). [Quelle: Lekt_25 HO, S. 4]
- Das HV yod zeigt, dass der Sprecher aus eigener Kenntnis/Erfahrung berichtet (nicht-evidentiell).
- Das Subjekt ist implizit und aus dem Kontext zu erschliessen. Da 'chad pa ein tdV ist, wuerde man im Ergativ ein explizites Subjekt erwarten; dieses befindet sich vermutlich im ausgelassenen Teil [...].
- yar klungs skya'o dgon pa la: Ortsbestimmung. "yar klungs" ist die Region Yar klungs (ON, Lekt_06 WL), "skya'o" ist der Klostername sKya'o. Zusammen: "Yar klungs sKya'o" = Kloster sKya'o in der Region Yar klungs.
- Textquelle: Deb ther sngon po (Blaue Annalen) von 'Gos lo tsa ba gZhon nu dpal (1392-1481), Buch 13 (gCod-Tradition). Englische Uebersetzung: Roerich, *The Blue Annals*. [Externe Quelle: WisdomLib, Roerich Blue Annals]
- Kontext: Im Kloster Yar klungs sKya'o wurde die gCod-Lehre gelehrt. gCod ("Durchtrennen") ist eine buddhistische Praxis, die von Ma gcig Lab sgron (1055-1149) begruendet wurde und die Ueberwindung der Ich-Anhaftung zum Ziel hat.
[Quelle: Lekt_25 UEB, Satz 13]
Satz 14
Tibetisch: དེ་ནས་ཤ་མི་ལ་འདུལ་བ་ཉན་ཅིང་ཡོད་ [...]
Wylie: de nas sha mi la 'dul ba nyan cing yod [...]
Morphemanalyse:
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| ----------- | ------- | --------- | ----------- | ---------------------- |
| དེ་ནས་ | de nas | Adv. | darauf; danach | ABtemp |
| ཤ་མི་ | sha mi | NZ | Sha mi | ABlok:PP |
| ལ་ | -la | PP | bei | ABlok:PP |
| འདུལ་བ་ | 'dul ba | Subst. | Disziplin (Skt. vinaya) | dO:Abs |
| ཉན་ | nyan | tdV; 1.SF | hoeren; studieren | P:VG1;1.SF;Konj;HV |
| ཅིང་ | cing | Konj. | Progressiv, Formbildung 1 | P:VG1;1.SF;Konj;HV |
| ཡོད་ | yod | HV | Existenzverb | P:VG1;1.SF;Konj;HV |
Stammformen nyan pa: nyan pa -- mnyan pa -- mnyan pa -- nyon (tdV) [Quelle: Lekt_12; Lekt_15 WL, Nr. 22]
G: de nas \<ABtemp\> sha mi la \<ABlok:PP\> 'dul ba 0 \<dO:Abs\> nyan cing yod \<P:VG1;1.SF;Konj;HV\> [...]
Ue: Danach war [er] gerade dabei, bei Sha mi den Vinaya zu studieren.
Satzbauplan:
- P: nyan pa (VG1; tdV; 1.SF): Satzbauplan VG1: S:Erg -- dO:Abs -- P.
- Progressiv, Formbildung 1: nyan (1.SF) + cing (Konj.) + yod (HV).
- Sonderfall: Fehlendes Ergativ-Subjekt. Das Subjekt ist implizit und aus dem Kontext zu erschliessen.
Anmerkungen:
- Progressiv, Formbildung 1 (1.SF + cing + yod). [Quelle: Lekt_25 HO, S. 4]
- nyan steht in der 1.SF (Praesensstamm), was den progressiven Aspekt ausdrueckt: "war gerade am Studieren/Hoeren". [Quelle: Lekt_25 HO, S. 3--4]
- Erwartetes Allomorph der Konjunktion nach -n waere zhing (vgl. die Tabelle in Lekt_25 HO, S. 4). Die Verwendung von cing nach -n (nyan cing) weicht von der regulaeren Allomorphie ab -- moeglicherweise freie Variation oder Schreibkonvention in der Quelle. [Offene Frage: siehe grammatik/offene_fragen_verben.md]
- "sha mi la": PP -la mit dem NZ Sha mi markiert die Person, bei der studiert wird ("bei Sha mi"). Funktion: ABlok (Ortsbestimmung im uebertragenen Sinne: "bei [jemand] studieren").
- 'dul ba = Vinaya (Skt.), die buddhistische Ordensdisziplin. Hier als direktes Objekt im Absolutiv.
- de nas: Temporaladverb "darauf; danach". Zusammensetzung aus de (DemPron "jener") + nas (Ablativsuffix), funktional als Konjunktionaladverb.
- Das Subjekt ist implizit und aus dem Kontext zu erschliessen.
- Verbtyp nyan pa: Die WL in Lekt_15 (Nr. 22) gibt tdV an, eine spaetere WL (Lekt_19) tmdV. Im vorliegenden Satz steht nyan pa mit dO:Abs ('dul ba) und implizitem ergativischem Subjekt; das ist eine klassisch transitive Konstruktion, weshalb hier die tdV-Klassifikation (Lekt_15) herangezogen wird. Die Verbliste fuehrt nyan pa als tdV/VG1 mit den Stammformen nyan -- mnyan -- mnyan -- nyon. [Quelle: Lekt_15 WL, Nr. 22; grammatik/verben.md]
- Textquelle: Deb ther sngon po (Blaue Annalen) von 'Gos lo tsa ba gZhon nu dpal (1392-1481), verschiedene Kapitel. Englische Uebersetzung: Roerich, *The Blue Annals*. [Externe Quelle: WisdomLib, Roerich Blue Annals]
- Kontext: Jemand studierte danach bei Sha mi den Vinaya (buddhistische Ordensdisziplin). Dies beschreibt den Ausbildungsweg eines Meisters, der neben anderen Studien auch die Vinaya-Lehren erlernte.
[Quelle: Lekt_25 UEB, Satz 14]
Satz 15
Tibetisch: [...] ལོ་ཙཱ་བས་སློབ་གཉེར་བྱེད་ཅིང་འདུག །
Wylie: [...] lo tsA bas slob gnyer byed cing 'dug /
Morphemanalyse:
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| ----------- | ------- | --------- | ----------- | ---------------------- |
| ལོ་ཙཱ་བ་ | lo tsA ba | NZ | Uebersetzer (Skt. lotsava) | S:Erg |
| ས་ | -s | KSuf | Ergativ | S:Erg |
| སློབ་གཉེར་ | slob gnyer | Subst. | Studium | dO:Abs |
| བྱེད་ | byed | tdV; 1.SF | machen | P:VG1;1.SF;Konj;HV |
| ཅིང་ | cing | Konj. | Progressiv, Formbildung 1 | P:VG1;1.SF;Konj;HV |
| འདུག་ | 'dug | HV | Existenzverb | P:VG1;1.SF;Konj;HV |
Stammformen byed pa: byed pa -- byas pa -- bya ba -- byos (tdV) [Quelle: Lekt_12; Lekt_25 HO, S. 1]
G: [...] lo tsA bas \<S:Erg\> slob gnyer 0 \<dO:Abs\> byed cing 'dug \<P:VG1;1.SF;Konj;HV\> /
Ue: Der Uebersetzer war gerade dabei, Studien zu betreiben.
Satzbauplan:
- P: byed pa (VG1; tdV; 1.SF): Satzbauplan VG1: S:Erg -- dO:Abs -- P.
- Progressiv, Formbildung 1: byed (1.SF) + cing (Konj.) + 'dug (HV).
Anmerkungen:
- Progressiv, Formbildung 1 (1.SF + cing + 'dug). [Quelle: Lekt_25 HO, S. 4]
- Dieser Satz ist identisch mit dem Beispielsatz im HO fuer Progressiv, Formbildung 1. [Quelle: Lekt_25 HO, S. 4]
- byed steht in der 1.SF (Praesensstamm), was den progressiven Aspekt ausdrueckt. [Quelle: Lekt_25 HO, S. 3--4]
- Das Allomorph der Konjunktion ist cing (nach Silbenende -d von byed). [Quelle: Lekt_25 HO, S. 4]
- slob gnyer byed = "Studien betreiben" -- eine Nominalverbkonstruktion mit byed pa als Funktionsverb ("machen").
- lo tsA ba (Skt. lotsava): Bezeichnung fuer einen Uebersetzer, der buddhistische Texte aus dem Sanskrit ins Tibetische uebertrug. Der Begriff ist eine Entlehnung aus dem Sanskrit.
- Das HV 'dug verleiht der Aussage evidentiellen Charakter (vom Erzaehler beobachtet/berichtet, nicht selbst erlebt). Im Gegensatz dazu steht yod (Saetze 13--14) fuer eigene Kenntnis.
- lo tsA bas: Das Subjekt steht im Ergativ (-s), passend zum transitiven Verb byed pa (tdV; VG1).
- OCR-Korrektur: སོབ (sob) wurde zu སློབ (slob) korrigiert [fehlende Subskript-la].
- Textquelle: Deb ther sngon po (Blaue Annalen) von 'Gos lo tsa ba gZhon nu dpal (1392-1481), verschiedene Kapitel. Englische Uebersetzung: Roerich, *The Blue Annals*. [Externe Quelle: WisdomLib, Roerich Blue Annals]
- Kontext: Der Uebersetzer (lo tsA ba) war gerade dabei, Studien zu betreiben (slob gnyer byed). Dies beschreibt die akademische Taetigkeit eines tibetischen Uebersetzers, der buddhistische Texte studierte.
[Quelle: Lekt_25 UEB, Satz 15]
Satz 16
Tibetisch: [...] གངས་ཀྱི་རྩེ་མོར་འགྲོ་ཞིང་འདུག [...]
Wylie: [...] gangs kyi rtse mor 'gro zhing 'dug [...]
Morphemanalyse:
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| ----------- | ------- | --------- | ----------- | ---------------------- |
| གངས་ | gangs | Subst. | Schnee; Schneeberg | ABlok:PP |
| ཀྱི་ | -kyi | AttrSuf | Genitiv | ABlok:PP |
| རྩེ་མོ་ | rtse mo | Subst. | Gipfel; Spitze | ABlok:PP |
| ར་ | -r | PP | an; auf | ABlok:PP |
| འགྲོ་ | 'gro | tmdV; 1.SF | gehen | P:VG3;1.SF;Konj;HV |
| ཞིང་ | zhing | Konj. | Progressiv, Formbildung 1 | P:VG3;1.SF;Konj;HV |
| འདུག་ | 'dug | HV | Existenzverb | P:VG3;1.SF;Konj;HV |
Stammformen 'gro ba: 'gro ba -- phyin pa / song ba -- 'gro ba -- song (tmdV) [Quelle: Lekt_07 WL; Lekt_20 HO]
G: [...] gangs kyi rtse mor \<ABlok:PP\> 'gro zhing 'dug \<P:VG3;1.SF;Konj;HV\> [...]
Ue: [Er] war gerade dabei, zum Gipfel des Schneebergs zu gehen.
Satzbauplan:
- P: 'gro ba (VG3; tmdV; 1.SF): Satzbauplan VG3: S:Abs -- ABlok:PP -- P.
- Progressiv, Formbildung 1: 'gro (1.SF) + zhing (Konj.) + 'dug (HV).
Anmerkungen:
- Progressiv, Formbildung 1 (1.SF + zhing + 'dug). [Quelle: Lekt_25 HO, S. 4]
- 'gro steht in der 1.SF (Praesensstamm), was den progressiven Aspekt ausdrueckt: "war gerade am Gehen". [Quelle: Lekt_25 HO, S. 3--4]
- Das Allomorph der Konjunktion ist zhing (nach 'gro, das auf einen Vokal endet). [Quelle: Lekt_25 HO, S. 4: Vokal-Auslaut -> zhing]
- 'gro ba ist ein intransitives Verb der Bewegung (VG3); das implizite Subjekt steht im Absolutiv.
- gangs kyi rtse mo: Genitivkonstruktion "Gipfel des Schneebergs". -kyi ist das Attributivsuffix (AttrSuf) nach Silbenende -s. -r nach rtse mo markiert die Richtung/das Ziel ("zum Gipfel").
- Das HV 'dug verleiht der Aussage evidentiellen Charakter (vom Erzaehler beobachtet/berichtet).
- Das Subjekt ist im ausgelassenen Teil [...] zu vermuten.
- OCR-Korrekturen: ཀི (ki) wurde zu ཀྱི (kyi) korrigiert [fehlende Subskript-ya]; འགོ ('go) wurde zu འགྲོ ('gro) korrigiert [fehlende Subskript-ra].
- Textquelle: Deb ther sngon po (Blaue Annalen) von 'Gos lo tsa ba gZhon nu dpal (1392-1481), verschiedene Kapitel. Englische Uebersetzung: Roerich, *The Blue Annals*. [Externe Quelle: WisdomLib, Roerich Blue Annals]
- Kontext: Jemand war gerade dabei, zum Gipfel eines Schneebergs zu gehen. Dies beschreibt moeglicherweise eine Pilgerreise oder den Aufstieg zu einem abgelegenen Meditationsort in den Bergen.
[Quelle: Lekt_25 UEB, Satz 16]
Satz 17
Tibetisch: ཡོལ་བ་བྲག་ལ་དམ་པ་ཡོལ་ཆུང་བ་བྲག་རོ་ཞིང་འདུག་ [...]
Wylie: yol ba brag la dam pa yol chung ba brag ro zhing 'dug [...]
Morphemanalyse:
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| ----------- | ------- | --------- | ----------- | ---------------------- |
| ཡོལ་བ་བྲག་ | yol ba brag | ON | Yol ba brag | ABlok:PP |
| ལ་ | -la | PP | in; an | ABlok:PP |
| དམ་པ་ | dam pa | NZ | Edler; Heiliger | S:Abs |
| ཡོལ་ཆུང་བ་ | yol chung ba | NZ | Yol chung ba | S:Abs |
| བྲག་རོ་ | brag ro | [unklar] | [Parsing unklar; siehe Anmerkungen] | P:VG?;1.SF;HV |
| ཞིང་ | zhing | Konj. | Progressiv, Formbildung 1 | P:VG?;1.SF;HV |
| འདུག་ | 'dug | HV | Existenzverb (evidentiell) | P:VG?;1.SF;HV |
G: yol ba brag la \<ABlok:PP\> dam pa yol chung ba 0 \<S:Abs\> brag ro zhing 'dug \<P:VG?;1.SF;Konj;HV\> [...]
Ue: In Yol ba brag war der Edle Yol chung ba gerade dabei, an Felsen zu meditieren [?]. [Offene Frage: siehe grammatik/offene_fragen_verben.md]
Satzbauplan:
- P: brag ro (VG?; 1.SF): Satzbauplan unklar wegen unklarer Segmentierung. [Offene Frage: siehe grammatik/offene_fragen_verben.md]
- Progressiv, Formbildung 1: [Verb] (1.SF) + zhing (Konj.) + 'dug (HV).
- Sonderfall: Parsing unklar. Die Segmentierung von "brag ro" ist nicht eindeutig (siehe Anmerkungen).
Anmerkungen:
- Progressiv, Formbildung 1 (1.SF + zhing + 'dug). [Quelle: Lekt_25 HO, S. 4]
- "dam pa yol chung ba": Der Name des Protagonisten. dam pa fungiert als Namenszusatz ("der Edle/Heilige"), eingefuehrt als Adj. "edel; ausgezeichnet" in Lekt_08 WL. Hier als NZ/Ehrentitel verwendet (vgl. Lekt_20 HO, S. 2: dam pa als NZ). "Yol chung ba" ist der eigentliche Namenszusatz [Quelle: Lekt_25 WL, Nr. 20]. Gesamtname: "Dam pa Yol chung ba" (= "der Edle Yol chung ba").
- Parsing von "brag ro zhing 'dug": Das Hauptproblem dieses Satzes liegt in der Segmentierung von brag ro. Moegliche Lesarten:
(a) brag ro als Kompositum: brag ("Fels", Lekt_14 WL) + ro ("Leichnam", Lekt_04 WL) = "Felsleichnam" (?). Dies ergibt keinen klaren Sinn.
(b) brag ro als Verb: Falls ro eine Verbalform ist, koennte "brag ro" bedeuten: "Felsen geniessen" oder "am Fels verweilen"? Die Endung -ro koennte eine umgangssprachliche oder kontrahierte Form sein.
(c) sgom + brag + ro: Alternative Segmentierung. Falls ein Wort im vorherigen Kontext fehlt, koennte die Konstruktion anders aufzuloesen sein.
(d) "brag ro ba" als Kompositverb mit der Bedeutung "an einem Felsen [in Einsamkeit] verweilen/meditieren". In hagiographischen Texten kommt die Wendung "brag la sgom pa" (an einem Felsen meditieren) vor.
- Da die Konjunktion zhing (nach ro, Vokal-Auslaut moeglich) und das HV 'dug die Progressiv-Konstruktion (Formbildung 1) bilden, muss das Element unmittelbar vor zhing ein Verb in der 1.SF sein. Das legt nahe, dass "ro" hier als Verb oder Verbteil fungiert, dessen 1.SF "ro" lautet. Welches Verb mit 1.SF "ro" hier vorliegt, konnte weder aus den Kursmaterialien noch aus Hill (2010) oder Rangjung Yeshe gesichert werden. [Offene Frage: siehe grammatik/offene_fragen_verben.md]
- Gesamtstruktur: Ortsbestimmung (yol ba brag la) + Subjekt (dam pa yol chung ba) + Praedikat (brag ro zhing 'dug). Das Praedikat bildet einen Progressiv mit 'dug.
- Das HV 'dug verleiht der Aussage evidentiellen Charakter (vom Erzaehler beobachtet/berichtet).
- Dieser Satz bleibt aufgrund der unklaren Segmentierung von "brag ro" teilweise ungeloest.
- Textquelle: Deb ther sngon po (Blaue Annalen) von 'Gos lo tsa ba gZhon nu dpal (1392-1481), verschiedene Kapitel. Englische Uebersetzung: Roerich, *The Blue Annals*. [Externe Quelle: WisdomLib, Roerich Blue Annals]
- Kontext: In Yol ba brag war der Edle Yol chung ba gerade mit einer Aktivitaet an einem Felsen beschaeftigt (Parsing unklar). Dam pa Yol chung ba ist offenbar ein Meditierender oder Heiliger, der in einer Felshoehle oder an einem Felsenort praktizierte.
[Quelle: Lekt_25 UEB, Satz 17]
Satz 18
Tibetisch: [...] འཚུར་ཕུ་ན་བླ་མ་སྐྱེར་སྒང་པ་བྱ་བ་སངས་རྒྱས་དངོས་ཤིག་བཞུགས་ཤིང་འདུག་ [...]
Wylie: [...] 'tshur phu na bla ma skyer sgang pa bya ba sangs rgyas dngos shig bzhugs shing 'dug [...]
OCR-Korrektur: སྐྱེར་སང་པ་ (skyer sang pa) -> སྐྱེར་སྒང་པ་ (skyer sgang pa) [fehlende Subskript-ga; vgl. WL Nr. 22].
Morphemanalyse:
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| ----------- | ------- | --------- | ----------- | ---------------------- |
| འཚུར་ཕུ་ | 'tshur phu | ON; EN | 'Tshur phu (Kloster) | ABlok:PP |
| ན་ | -na | PP; Lokativ | in | ABlok:PP |
| བླ་མ་ | bla ma | NZ | geistlicher Lehrer; Bla ma | S:Abs |
| སྐྱེར་སྒང་པ་ | skyer sgang pa | NZ | sKyer sgang pa | S:Abs |
| བྱ་བ་ | bya ba | Part. | genannt; namens | S:Abs |
| སངས་རྒྱས་ | sangs rgyas | Subst. | Buddha (Skt. buddha) | S:Abs |
| དངོས་ | dngos | Adj. | wirklich; echt | S:Abs |
| ཤིག་ | shig | IndPart | Indefinitmarker | S:Abs |
| བཞུགས་ | bzhugs | tmdV; 1.SF; resp. | sitzen; wohnen; verweilen | P:VG5;1.SF;Konj;HV |
| ཤིང་ | shing | Konj. | Progressiv, Formbildung 1 | P:VG5;1.SF;Konj;HV |
| འདུག་ | 'dug | HV | Existenzverb | P:VG5;1.SF;Konj;HV |
Stammformen bzhugs pa: bzhugs pa -- bzhugs pa -- bzhugs pa -- bzhugs (tmdV) [Quelle: Lekt_04 WL, Nr. 91; Lekt_14 WL]
G: [...] 'tshur phu na \<ABlok:PP\> bla ma skyer sgang pa bya ba sangs rgyas dngos shig 0 \<S:Abs\> bzhugs shing 'dug \<P:VG5;1.SF;Konj;HV\> [...]
Ue: In 'Tshur phu weilte (resp.) gerade ein Lama namens sKyer sgang pa, ein wirklicher Buddha.
Satzbauplan:
- P: bzhugs (VG5; tmdV; 1.SF; resp.): Satzbauplan VG5: S:Abs -- ABlok:PP -- P.
- Progressiv, Formbildung 1: bzhugs (1.SF) + shing (Konj.) + 'dug (HV).
Anmerkungen:
- Progressiv, Formbildung 1 (1.SF + shing + 'dug). [Quelle: Lekt_25 HO, S. 4]
- Die Anmerkung im Aufgabentext spricht von Formbildung 1: bzhugs (1.SF, resp.) + shing + 'dug. Da bzhugs pa in allen vier SF identisch ist (bzhugs pa -- bzhugs pa -- bzhugs pa -- bzhugs), ist die Form bzhugs hier als 1.SF zu werten (Progressivbildung). [Quelle: Lekt_25 HO, S. 3--4]
- Alternativ koennte dies auch als Progressiv, Formbildung 2 interpretiert werden (1.SF + shing/cing + bsdad/bzhugs). In diesem Fall waere bzhugs selbst das HV (respektvolle Form von bsdad), und das Hauptverb wuerde fehlen oder implizit sein. Da im Satz kein weiteres Verb erkennbar ist und der Kontext "verweilen/wohnen" (bzhugs als Vollverb) eindeutig hergibt, ist Formbildung 1 mit bzhugs als Hauptverb und 'dug als Hilfsverb die einzig konsistente Analyse. [Quelle: Lekt_25 HO, S. 4]
- Das Allomorph der Konjunktion ist shing (nach Silbenende -s von bzhugs). [Quelle: Lekt_25 HO, S. 4]
- Das Subjekt ist eine komplexe Nominalphrase: "bla ma skyer sgang pa bya ba sangs rgyas dngos shig" = "ein Lama namens sKyer sgang pa, ein wirklicher Buddha". Die Struktur:
- bla ma: Titel ("Lama")
- skyer sgang pa: NZ ("sKyer sgang pa")
- bya ba: "genannt; namens" (verbindet Name mit Apposition)
- sangs rgyas dngos: "ein wirklicher Buddha" (sangs rgyas = Buddha; dngos = wirklich/echt)
- shig: Indefinitmarker ("ein")
- bzhugs pa ist die respektvolle Form von sdod pa ("sich aufhalten; wohnen"), hier VG5 (intransitiv mit Lokaladverbial). [Quelle: Lekt_04 WL, Nr. 91]
- Das HV 'dug verleiht der Aussage evidentiellen Charakter (vom Erzaehler beobachtet/berichtet).
- 'tshur phu na: Lokativsuffix -na ("in") nach dem Ortsnamen 'Tshur phu. Das Kloster 'Tshur phu (auch mtshur phu geschrieben) ist der Hauptsitz der Karma-bKa'-brgyud-Schule.
- OCR-Korrektur: སང (sang) wurde zu སྒང (sgang) korrigiert [fehlende Subskript-ga].
- Textquelle: Deb ther sngon po (Blaue Annalen) von 'Gos lo tsa ba gZhon nu dpal (1392-1481), Buch 8 (Karmapa-Kapitel, Dakpo Kagyu). Englische Uebersetzung: Roerich, *The Blue Annals*. [Externe Quelle: WisdomLib, Roerich Blue Annals]
- Kontext: Im Kloster 'Tshur phu (Hauptsitz der Karma-Kagyu-Schule) weilte ein Lama namens sKyer sgang pa, der als wirklicher Buddha beschrieben wird. 'Tshur phu war seit dem 12. Jahrhundert der Sitz der Karmapa-Inkarnationslinie.
[Quelle: Lekt_25 UEB, Satz 18]
Satz 19
Tibetisch: སློབ་མ་རྣམས་ད་ནི་གྲོངས་ཟིན་སྙམ་ [...]
Wylie: slob ma rnams da ni grongs zin snyam [...]
OCR-Korrekturen: སོབ་ (sob) -> སློབ་ (slob) [fehlende Subskript-la]; གོངས་ (gongs) -> གྲོངས་ (grongs) [fehlende Subskript-ra; vgl. WL Nr. 24].
Morphemanalyse:
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| ----------- | ------- | --------- | ----------- | ---------------------- |
| སློབ་མ་ | slob ma | Subst. | Schueler | S2:Abs |
| རྣམས་ | -rnams | PlSuf | -- | S2:Abs |
| ད་ | da | Adv. | jetzt | ABtemp |
| ནི་ | ni | FokPart | Topikmarker | ABtemp |
| གྲོངས་ | grongs | tmdV; 2.SF; resp. | sterben | P2:VG6;2.SF;HV |
| ཟིན་ | zin | HiV; tmdV; 2.SF | Terminativpartikel | P2:VG6;2.SF;HV |
| སྙམ་ | snyam | tmdV; 1.,2.,3.SF | denken; meinen | P1:VG6;1.SF |
Stammformen grongs pa: 'grongs -- grongs -- 'grongs (tmdV; VG6) [Quelle: Lekt_25 WL, Nr. 24 (nur 2.SF angegeben); vollstaendige Stammformen aus grammatik/verben.md, ergaenzt aus Rangjung Yeshe Wiki. Die 4.SF ist fuer dieses respektvolle, nicht kontrollierbare Sterbeverb nicht belegt.]
G: { slob ma rnams 0 \<S2:Abs\> da ni \<ABtemp\> grongs zin \<P2:VG6;2.SF;HV\> } snyam \<P1:VG6;1.SF\> [...]
Ue: "Die Schueler sind nun bereits gestorben (resp.)", dachte [er].
Anmerkungen:
- Terminativ (2.SF + zin) + geschachtelte Konstruktion mit snyam als aeusserem Verb (Rahmenverb). [Quelle: Lekt_25 HO, S. 5]
- Der Terminativ drueckt aus, dass die Handlung bereits abgeschlossen/vollendet ist: grongs zin = "bereits gestorben". [Quelle: Lekt_25 HO, S. 5]
- grongs (2.SF, resp.) + zin (HiV) bilden den Terminativ. grongs pa ist die respektvolle Form fuer "sterben" (vgl. shi ba, nicht-resp. 2.SF von 'chi ba; Lekt_12 WL). [Quelle: Lekt_25 WL, Nr. 24]
- snyam ("denken; meinen") fungiert als Rahmenverb (aeusseres Verb, P1). Es rahmt den inneren Gedankeninhalt ("die Schueler sind nun bereits gestorben"). Vgl. Lekt_14 HO, S. 3: "da nga rang yang rgya gar du 'gro snyam" und Lekt_22 UEB Satz 14. [Quelle: Lekt_14 HO, S. 3; Lekt_24 WL, Nr. 25]
- da ni: Temporaladverb "nun; jetzt". da = "jetzt" (vgl. da lta, Lekt_05 WL); ni = Fokuspartikel, die den Zeitpunkt hervorhebt (vgl. Lekt_23, Satz 8: da ni markiert einen zeitlichen Wendepunkt). [Quelle: Lekt_23 UEB, Satz 8]
- slob ma rnams: "die Schueler" (PlSuf -rnams). Das Subjekt steht im Absolutiv, passend zur intransitiven Natur von grongs pa (tmdV; VG6: "sterben"). [Quelle: Lekt_05 WL]
- Die WL Nr. 24 fuehrt grongs pa ("sterben", resp.; 2.SF) explizit als Vokabel der Lektion an, weshalb hier grongs (mit Subskript-ra) die primaere Lesung ist. Die OCR-Vorlage zeigt གོངས (gongs); die Korrektur zu གྲོངས (grongs) ist durch die WL und durch die Terminativ-Konstruktion mit zin gestuetzt.
- Textquelle: Deb ther sngon po (Blaue Annalen) von 'Gos lo tsa ba gZhon nu dpal (1392-1481), verschiedene Kapitel. Englische Uebersetzung: Roerich, *The Blue Annals*. [Externe Quelle: WisdomLib, Roerich Blue Annals]
- Kontext: Jemand denkt (snyam), dass die Schueler (slob ma rnams) nun bereits gestorben (resp.: grongs zin) sind. Dies ist eine Reflexion ueber den Verlust einer Generation von Schuelern und den Wandel in einer religioesen Linie.
[Quelle: Lekt_25 UEB, Satz 19]
Satz 20
Tibetisch: འདི་རྣམས་ལྷ་ས་རྐྱང་ཐང་དུ་ལན་བཏབ་ཟིན་གསུངས་ [...]
Wylie: 'di rnams lha sa rkyang thang du lan btab zin gsungs [...]
Morphemanalyse:
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| ----------- | ------- | --------- | ----------- | ---------------------- |
| འདི་ | 'di | DemPron | dieser; diese | S2:Erg |
| རྣམས་ | -rnams | PlSuf | -- | S2:Erg |
| ལྷ་ས་རྐྱང་ཐང་ | lha sa rkyang thang | ON | lHa sa rKyang thang | ABlok:PP |
| དུ་ | -du | PP | in; an | ABlok:PP |
| ལན་ | lan | Subst. | Antwort | dO:Abs |
| བཏབ་ | btab | tdV; 2.SF | werfen; setzen; geben | P2:VG1;2.SF;HV |
| ཟིན་ | zin | HiV; tmdV; 2.SF | Terminativpartikel | P2:VG1;2.SF;HV |
| གསུངས་ | gsungs | tdV; 2.SF; resp. | sagen | P1:VG1;2.SF |
Stammformen 'debs pa: 'debs pa -- btab pa -- gdab pa -- thob (tdV) [Quelle: Lekt_16 WL; Lekt_04 WL]
Stammformen gsung ba: gsung ba -- gsungs pa -- gsung ba -- gsungs (tdV) [Quelle: Lekt_08 WL; Lekt_22 HO]
G: { 'di rnams \<S2:Erg(!)\> lha sa rkyang thang du \<ABlok:PP\> lan 0 \<dO:Abs\> btab zin \<P2:VG1;2.SF;HV\> } gsungs \<P1:VG1;2.SF\> [...]
Ue: [Er] sagte (resp.): "Diese [Leute] haben in lHa sa rKyang thang bereits eine Antwort gegeben."
Anmerkungen:
- Terminativ (2.SF + zin) + geschachtelte Konstruktion mit gsungs als aeusserem Verb (Rahmenverb). [Quelle: Lekt_25 HO, S. 5]
- Der Terminativ drueckt aus, dass die Handlung bereits abgeschlossen/vollendet ist: lan btab zin = "bereits Antwort gegeben". [Quelle: Lekt_25 HO, S. 5]
- lan btab: "Antwort geben" -- Nominalverbkonstruktion. lan = "Antwort" (Subst.; Lekt_25 WL, Nr. 27); btab = 2.SF von 'debs pa ("setzen; stellen; legen; werfen"; tdV). Die Wendung "lan btab" bzw. "lan 'debs" bedeutet woerl. "eine Antwort setzen/werfen" = "antworten". [Quelle: Lekt_25 WL, Nr. 27; Lekt_16 WL]
- zin: Terminativpartikel (HiV). btab (2.SF) + zin bildet den Terminativ: "bereits geantwortet / die Antwort bereits gegeben". [Quelle: Lekt_25 HO, S. 5]
- gsungs: 2.SF (resp.) von gsung ba ("sagen"). Stammformen: gsung ba -- gsungs pa -- gsung ba -- gsungs (tdV). gsungs fungiert hier als aeusseres Verb (Rahmenverb P1), das die woertliche Rede einrahmt: "[Er] sagte (resp.): '...'". [Quelle: Lekt_08 WL; Lekt_22 HO, S. 1]
- 'di rnams: "diese [Leute]" (DemPron + PlSuf) -- Subjekt im Absolutiv trotz transitivem Hauptverb btab pa (tdV). Dieses Phaenomen tritt in Lekt_25 mehrfach auf (vgl. die HO-Beispiele zu Formbildung 2/3, die explizit mit "(!)" als Sonderfall der nicht-ergativischen Subjektmarkierung in Hilfsverb-Konstruktionen ausgewiesen sind) und ist mit der Perfekt-/Terminativ-Konstruktion mit Hilfsverb verbunden. Die alternative Lesung als direktes Objekt ("diesen [Leuten] wurde geantwortet") scheidet aus, da lan ("Antwort") bereits das direkte Objekt ist und die Konstruktion lan 'debs/btab nominalverbal "antworten" bedeutet -- 'di rnams kann hier nur das Agens sein. Der ausgelassene Erg-Marker entspricht dem in Lekt_25 HO dokumentierten Sonderfall. [Quelle: Lekt_25 HO, S. 2--3]
- lha sa rkyang thang du: Lokativkonstruktion mit PP -du ("in"). lHa sa rKyang thang ist ein Ortsname (ON; Lekt_25 WL, Nr. 26).
- Das implizite Subjekt des aeusseren Satzes (wer "sagte") ist aus dem Kontext zu erschliessen.
- Textquelle: Deb ther sngon po (Blaue Annalen) von 'Gos lo tsa ba gZhon nu dpal (1392-1481), verschiedene Kapitel. Englische Uebersetzung: Roerich, *The Blue Annals*. [Externe Quelle: WisdomLib, Roerich Blue Annals]
- Kontext: Jemand sagt (resp.: gsungs), dass "diese Leute" ('di rnams) in lHa sa rKyang thang bereits Antwort gegeben haben (lan btab zin). Dies beschreibt eine Situation, in der eine Gruppe von Personen bereits an einem bestimmten Ort auf eine Anfrage oder Herausforderung reagiert hat.
[Quelle: Lekt_25 UEB, Satz 20]