Lektion 34 -- Zur Bildung der Wortfrage
Wortliste
[Aus LEK_34 WL.pdf]
| Nr. | Wylie | Tibetisch | Wortart | Bedeutung | Quelle |
| 1 | su | སུ | IPron | wer? | Lekt_34 WL, Nr. 1 |
| 2 | rigs rgyud | རིགས་རྒྱུད | N | Abstammung | Lekt_34 WL, Nr. 2 |
| 3 | gang | གང | IPron | wer? was? welche(r)? | Lekt_34 WL, Nr. 3 |
| 4 | 'dri ba | འདྲི་བ | tdV; 1.SF | fragen | Lekt_34 WL, Nr. 4 |
| 5 | rgyu mtshan | རྒྱུ་མཚན | N | Ursache | Lekt_34 WL, Nr. 5 |
| 6 | ci | ཅི | IPron; IAdv | was? wie? warum? | Lekt_34 WL, Nr. 6 |
| 7 | a ro | ཨ་རོ | NZ | A ro | Lekt_34 WL, Nr. 7 |
| 8 | gang na | གང་ན | IAdv | wo? | Lekt_34 WL, Nr. 8 |
| 9 | 'phags skor | འཕགས་སྐོར | NZ | Zyklus des "Edlen" | Lekt_34 WL, Nr. 9 |
| 10 | bdog pa | བདོག་པ | EV | vorhanden sein; in Besitz sein | Lekt_34 WL, Nr. 10 |
| 11 | lar | ལར | Konj | aber | Lekt_34 WL, Nr. 11 |
| 12 | ji tsam cig | ཇི་ཙམ་ཅིག | IAdv | wie lang? | Lekt_34 WL, Nr. 12 |
| 13 | bcings pa | བཅིངས་པ | tdV; 2.SF | fesseln | Lekt_34 WL, Nr. 13 |
| 14 | gang nas | གང་ནས | IAdv | woher? | Lekt_34 WL, Nr. 14 |
| 15 | ji ltar | ཇི་ལྟར | IAdv | wie? | Lekt_34 WL, Nr. 15 |
| 16 | ci'i phyir | ཅིའི་ཕྱིར | IAdv | warum? | Lekt_34 WL, Nr. 16 |
| 17 | rtsom pa | རྩོམ་པ | tdV; 1.SF | verfassen; abfassen | Lekt_34 WL, Nr. 17 |
| 18 | gtsang pa | གཙང་པ | NZ | gTsang pa | Lekt_34 WL, Nr. 18 |
| 19 | stod lungs pa | སྟོད་ལུངས་པ | NZ | sTod lungs pa | Lekt_34 WL, Nr. 19 |
| 20 | ci 'dra | ཅི་འདྲ | IAdv | welche Art? was fuer ein(e)? | Lekt_34 WL, Nr. 20 |
| 21 | 'dra ba | འདྲ་བ | Adj | gleich; aehnlich | Lekt_34 WL, Nr. 21 |
| 22 | zhib par | ཞིབ་པར | Adv | genau; detailliert; gruendlich | Lekt_34 WL, Nr. 22 |
| 23 | dmigs pa | དམིགས་པ | N | Objekt | Lekt_34 WL, Nr. 23 |
| 24 | go cha | གོ་ཆ | N | Ruestung | Lekt_34 WL, Nr. 24 |
| 25 | bgo ba | བགོ་བ | tdV; 1.,3.SF | ankleiden | Lekt_34 WL, Nr. 25 |
| 26 | gang du | གང་དུ | IAdv | wohin? | Lekt_34 WL, Nr. 26 |
| 27 | gcung po | གཅུང་པོ | N | juengerer Bruder | Lekt_34 WL, Nr. 27 |
| 28 | chos 'bar | ཆོས་འབར | PN | Chos 'bar | Lekt_34 WL, Nr. 28 |
| 29 | btsongs pa | བཙོངས་པ | tdV; 2.SF | verkaufen | Lekt_34 WL, Nr. 29 |
| 30 | dwags po | དྭགས་པོ | ON | Dwags po | Lekt_34 WL, Nr. 30 |
| 31 | gar | གར | IAdv | wohin? | Lekt_34 WL, Nr. 31 |
| 32 | rdo rje gdan | རྡོ་རྗེ་གདན | ON | Vajraasana | Lekt_34 WL, Nr. 32 |
| 33 | ji 'dra cig | ཇི་འདྲ་ཅིག | IAdv | welcher Art? was fuer ein? | Lekt_34 WL, Nr. 33 |
| 34 | lce | ལྕེ | NZ | lCe | Lekt_34 WL, Nr. 34 |
| 35 | ji tsam | ཇི་ཙམ | IAdv | wieviel(e)? | Lekt_34 WL, Nr. 35 |
[Quelle: Lekt_34 WL]
Grammatik
[Quelle: Lekt_34 HO]
Zur Bildung der Wortfrage
Allgemeine Regeln zur Wortfrage
- Die Wortfrage ist (wie die Entscheidungsfrage) in eine Rahmenkonstruktion eingebettet: Sprecher + Sprechaktverb (z.B. dri ba, zhu ba, zer ba, smra ba, gsung ba usw.)
- Der Wortfragesatz endet stets im Stamm des Satzverbs (KEIN Finalsuffix)
- Ein Fragewort (Interrogativpronomen / Frageadverb) ersetzt das erfragte Element
- Das Fragewort traegt das Kasussuffix entsprechend seiner grammatischen Funktion
- Das Fragewort steht i.d.R. NICHT in Satzanfangsstellung (nur wenn kein anderes Satzglied vorhanden)
[Quelle: Lekt_34 HO, S. 1]
A. Fragewoerter als Interrogativpronomen oder Frageadverbien
1. Die bestimmten Interrogativpronomen: su, ci, gang
| Fragewort | Frage nach |
| su (སུ) | Personen oder belebten Wesen |
| ci (ཅི) | Dingen oder Sachverhalten |
| gang (གང) | Personen oder belebten Wesen; Dingen oder Sachverhalten |
[Quelle: Lekt_34 HO, S. 1]
su -- Beispiele
su im Ergativ (Frage nach dem Agens):
ཁྱེད་ཀྱི་བསྟན་པ་སུས་འཛིན་ཞུས།
Wylie: khyed kyi bstan pa sus 'dzin zhus/
| Wylie | Bedeutung | Grammatik |
| khyed kyi | Euer/Dein | Pron + Gen |
| bstan pa | Lehre | N |
| sus | wer? (+ Erg) | IPron + Erg |
| 'dzin | folgen; festhalten | tdV; 1.SF |
| zhus | (er) fragte (hon.) | Sprechaktverb (Rahmen) |
Uebersetzung: "[Er] fragte: 'Wer folgt Eurer Lehre?'"
[Quelle: Lekt_34 HO, S. 2]
su als indirektes Objekt (Dativ):
གདམས་ངག་སུ་ལ་ཡོད་དྲིས།
Wylie: gdams ngag su la yod dris/
| Wylie | Bedeutung | Grammatik |
| gdams ngag | Unterweisungen | N |
| su la | wer? (+ Dat) | IPron + Dat |
| yod | vorhanden sein | EV |
| dris | (er) fragte | Sprechaktverb (Rahmen) |
Uebersetzung: "[Er] fragte: 'Wer besitzt die Unterweisungen?'"
[Quelle: Lekt_34 HO, S. 2]
su als Genitivattribut:
རྒད་པོ་ཅིག་ཁྱོད་སུའི་སློབ་མ་ཡིན་ཟེར།
Wylie: rgad po cig khyod su'i slob ma yin zer/
| Wylie | Bedeutung | Grammatik |
| rgad po cig | ein Alter | N + Indef |
| khyod | du | Pron (2.Pers) |
| su'i | wessen? (+ Gen) | IPron + Gen |
| slob ma | Schueler | N |
| yin | sein | KV |
| zer | (er) sagte | Sprechaktverb (Rahmen) |
Uebersetzung: "Ein Alter sagte: 'Wessen Schueler bist du?'"
[Quelle: Lekt_34 HO, S. 2]
ci -- Beispiele
ci als direktes Objekt:
བུས་ཅི་བྱེད་བྱས།
Wylie: bus ci byed byas/
| Wylie | Bedeutung | Grammatik |
| bus | der Sohn (+ Erg) | N + Erg |
| ci | was? | IPron |
| byed | machen; tun | tdV; 1.SF |
| byas | (er) fragte | Sprechaktverb (Rahmen) |
Uebersetzung: "[Er] fragte: 'Was macht der Sohn?'"
[Quelle: Lekt_34 HO, S. 2]
ci satzeinleitend (wenn kein anderes Satzglied vorhanden):
ཅི་བྱེད་གསུང།
Wylie: ci byed gsung/
| Wylie | Bedeutung | Grammatik |
| ci | was? | IPron |
| byed | machen; tun | tdV; 1.SF |
| gsung | (er) sagte (hon.) | Sprechaktverb (Rahmen) |
Uebersetzung: "[Er] sagte: 'Was macht [er]?'"
[Quelle: Lekt_34 HO, S. 2]
ci als Subjekt (Absolutiv):
ཁོང་རང་གི་ལག་ན་ཅི་ཡོད།
Wylie: khong rang gi lag na ci yod/
| Wylie | Bedeutung | Grammatik |
| khong rang gi | sein (eigen) | Pron + Gen |
| lag na | in der Hand | N + Lok |
| ci | was? | IPron (Abs) |
| yod | vorhanden sein | EV |
Uebersetzung: "Was ist in seiner Hand?"
[Quelle: Lekt_34 HO, S. 2]
ci als direktes Objekt (Ding):
སྒྲོལ་མའི་ཞལ་ནས་ཅི་འདོད་གསུང།
Wylie: sgrol ma'i zhal nas ci 'dod gsung/
| Wylie | Bedeutung | Grammatik |
| sgrol ma'i | der sGrol ma (+ Gen) | PN + Gen |
| zhal nas | aus dem Mund (hon.) | N + Abl |
| ci | was? | IPron (dO) |
| 'dod | wuenschen | tdV; 1.SF |
| gsung | (sie) sagte (hon.) | Sprechaktverb (Rahmen) |
Uebersetzung: "[sGrol ma] sagte: 'Was wuenscht [Du]?'"
[Quelle: Lekt_34 HO, S. 2]
gang -- Beispiele
gang als Subjekt (Ergativ):
འཚུར་ཕུ་བའི་གདན་ས་གང་གིས་བྱེད་ཟེར།
Wylie: 'tshur phu ba'i gdan sa gang gis byed zer/
| Wylie | Bedeutung | Grammatik |
| 'tshur phu ba'i | von 'Tshur phu (+ Gen) | ON + NZ + Gen |
| gdan sa | Klosterthron | N |
| gang gis | wer? (+ Erg) | IPron + Erg |
| byed | besetzen; machen | tdV; 1.SF |
| zer | (er) sagte | Sprechaktverb (Rahmen) |
Uebersetzung: "[Er] sagte: 'Wer besetzt den Klosterthron in 'Tshur phu?'"
[Quelle: Lekt_34 HO, S. 2]
2. Fragepronomen fuer Fragen aus einer Gruppe: ci und gang
Die Fragepronomen ci und gang koennen auch verwendet werden, um nach einem bestimmten Element aus einer Gruppe zu fragen. In dieser Funktion stehen sie HINTER dem Bezugsnomen.
[Quelle: Lekt_34 HO, S. 3]
Beispiel:
ཁྱོད་ཀྱིས་ཆོས་ཅི་ཤེས་གསུང།
Wylie: khyod kyis chos ci shes gsung/
| Wylie | Bedeutung | Grammatik |
| khyod kyis | du (+ Erg) | Pron + Erg |
| chos | Lehren | N |
| ci | welche? | IPron (hinter Bezugsnomen) |
| shes | kennen; wissen | tdV; 1.SF |
| gsung | (er) sagte (hon.) | Sprechaktverb (Rahmen) |
Uebersetzung: "[Er] sagte: 'Welche Lehren kennst du?'"
[Quelle: Lekt_34 HO, S. 3]
3. Unbestimmte Fragepronomen: su dang su, ci dang ci, gang dang gang
Durch Wiederholung des Fragepronomens mit dang werden unbestimmte Fragepronomen gebildet. Sie druecken Unbestimmtheit aus ("welche von ... alle").
[Quelle: Lekt_34 HO, S. 3]
Beispiel:
ཁྱེད་ཀྱིས་ཆོས་ཅི་དང་ཅི་མཁྱེན་གསུངས།
Wylie: khyed kyis chos ci dang ci mkhyen gsungs/
| Wylie | Bedeutung | Grammatik |
| khyed kyis | Ihr (+ Erg) | Pron + Erg |
| chos | Lehren | N |
| ci dang ci | welche (alle)? | IPron + dang + IPron (unbestimmt) |
| mkhyen | kennen; wissen (hon.) | tdV; 1.SF (hon.) |
| gsungs | (er) fragte (hon.) | Sprechaktverb (Rahmen) |
Uebersetzung: "[Er] fragte: 'Welche von den Lehren kennt Ihr alle?'"
[Quelle: Lekt_34 HO, S. 3]
4. Frageadverbien
a) Frage nach der Zeit
| Fragewort | PP/Suffix | Deutsch | Frage nach |
| nam (ནམ) | -- | wann | Zeitpunkt |
| ji (ཇི) | -tsam na | wann | Zeitpunkt |
| ji (ཇི) | -tsam zhig | wie lang | Zeitdauer |
[Quelle: Lekt_34 HO, S. 3]
Beispiel (Frage nach dem Zeitpunkt):
འདི་ཇི་ཙམ་ན་ཐུགས་ལ་འཁྲུངས་ཞུས།
Wylie: 'di ji tsam na thugs la 'khrungs zhus/
| Wylie | Bedeutung | Grammatik |
| 'di | dies | Dem |
| ji tsam na | wann? | IAdv (Zeitpunkt) |
| thugs la | im Geist (hon.) | N + Dat (hon.) |
| 'khrungs | verstanden haben (hon.) | V; 2.SF (hon.) |
| zhus | (er) fragte (hon.) | Sprechaktverb (Rahmen) |
Uebersetzung: "[Er] fragte: 'Wann hast [Du] dies verstanden?'"
[Quelle: Lekt_34 HO, S. 3]
b) Frage nach dem Ort
| Fragewort | PP | Deutsch | Frage nach |
| gang (གང) | -na | wo | Existenzort; Geschehensort |
| gang/ga (གང/ག) | -la/-tu (=gar) | wohin | Richtung |
| gang/ga (གང/ག) | -nas/-las | woher | Herkunftsort |
[Quelle: Lekt_34 HO, S. 4]
Beispiel (Frage nach dem Existenzort):
ཆོས་འཁོར་གང་ན་ཡོད་གསུང།
Wylie: chos 'khor gang na yod gsung/
| Wylie | Bedeutung | Grammatik |
| chos 'khor | Lehrstaette | N |
| gang na | wo? | IAdv (Ort) |
| yod | vorhanden sein | EV |
| gsung | (er) sagte (hon.) | Sprechaktverb (Rahmen) |
Uebersetzung: "[Er] sagte: 'Wo ist die Lehrstaette?'"
[Quelle: Lekt_34 HO, S. 4]
Beispiel (Frage nach der Richtung):
གར་འགྲོ་ཟེར།
Wylie: gar 'gro zer/
| Wylie | Bedeutung | Grammatik |
| gar | wohin? | IAdv (Richtung) |
| 'gro | gehen | idV; 1.SF |
| zer | (er) sagte | Sprechaktverb (Rahmen) |
Uebersetzung: "[Er] sagte: 'Wohin gehst [Du]?'"
[Quelle: Lekt_34 HO, S. 4]
c) Frage nach Art und Weise
| Fragewort | PP/Suffix | Deutsch |
| ga (ག) | -na/-la | wie |
| gang/ga (གང/ག) | 'dra | welcher Art; was fuer ein |
| ci/ji (ཅི/ཇི) | 'dra [ba/cig] | welcher Art; was fuer ein |
| ci (ཅི) | -nas | woraus; wie |
| ji/ci (ཇི/ཅི) | -tsug | wie |
| ji/ci (ཇི/ཅི) | -ltar/-bzhin/-lta bu/-lta ba | wie (beschaffen) / welcher Art |
[Quelle: Lekt_34 HO, S. 4-5]
Beispiel (ga la -- wie):
མཁར་ལས་ག་ལ་བྱེད་གསུང།
Wylie: mkhar las ga la byed gsung/
| Wylie | Bedeutung | Grammatik |
| mkhar las | die Bautaetigkeit (+ Abs) | N |
| ga la | wie? | IAdv (Art und Weise) |
| byed | verrichten | tdV; 1.SF |
| gsung | (er) sagte (hon.) | Sprechaktverb (Rahmen) |
Uebersetzung: "[Er] sagte: 'Wie verrichte ich die Bautaetigkeit?'"
[Quelle: Lekt_34 HO, S. 4]
Beispiel (ci 'dra ba -- welcher Art):
ཆོས་ཅི་འདྲ་བ་ཐོས།
Wylie: chos ci 'dra ba thos/
| Wylie | Bedeutung | Grammatik |
| chos | Lehren | N |
| ci 'dra ba | welcher Art? | IAdv (Art und Weise) |
| thos | studieren; hoeren | tdV; 2.SF |
Uebersetzung: "Welche Art von Lehren hast [Du] frueher studiert?"
[Quelle: Lekt_34 HO, S. 5]
d) Frage nach dem Grund
| Fragewort | PP/Suffix | Deutsch |
| ci (ཅི) | -- | warum; weshalb |
| ci (ཅི) | -ste/-la/-kyis (=cis) | warum; weshalb |
| ci (ཅི) | -'i phyir/-'i slad/-'i ched | warum; weshalb |
| ga (ག) | -na/-la | warum; weshalb |
[Quelle: Lekt_34 HO, S. 5]
Beispiel (ci'i phyir -- warum):
ཁྱོད་ཅིའི་ཕྱིར་འདི་ན་འདུག་ཅེས་སྨྲས།
Wylie: khyod ci'i phyir 'di na 'dug ces smras/
| Wylie | Bedeutung | Grammatik |
| khyod | du | Pron (2.Pers) |
| ci'i phyir | warum? | IAdv (Grund) |
| 'di na | hier | Dem + Lok |
| 'dug | sich befinden | EV |
| ces | so (Zitatpartikel) | Part |
| smras | (er) sprach | Sprechaktverb (Rahmen) |
Uebersetzung: "[Er] sprach: 'Warum bist du hier?'"
[Quelle: Lekt_34 HO, S. 5]
Beispiel (ga na -- warum):
ཁྱོད་གཅིག་པུ་ལ་ཆ་རྐྱེན་ཕོགས་པ་ག་ན་དགོས་གསུང།
Wylie: khyod gcig pu la cha rkyen phogs pa ga na dgos gsung/
| Wylie | Bedeutung | Grammatik |
| khyod | du | Pron (2.Pers) |
| gcig pu la | allein (+ Dat) | Adv + Dat |
| cha rkyen | Unterstuetzung | N |
| phogs pa | erhalten | V; 2.SF + Nom |
| ga na | warum? | IAdv (Grund) |
| dgos | notwendig sein | V |
| gsung | (er) sagte (hon.) | Sprechaktverb (Rahmen) |
Uebersetzung: "[Er] sagte: 'Warum ist allein fuer dich Unterstuetzung notwendig?'"
[Quelle: Lekt_34 HO, S. 5]
e) Frage nach der Menge
| Fragewort | Suffix | Deutsch |
| ci/ji (ཅི/ཇི) | -tsam/-snyed | wieviel(e) / wie gross |
| ga (ག) | -tsam | wieviel(e) |
[Quelle: Lekt_34 HO, S. 5]
Beispiel:
སློབ་མ་ཇི་ཙམ་བདོག་ཞུས།
Wylie: slob ma ji tsam bdog zhus/
| Wylie | Bedeutung | Grammatik |
| slob ma | Schueler | N |
| ji tsam | wieviele? | IAdv (Menge) |
| bdog | vorhanden sein | EV |
| zhus | (er) fragte (hon.) | Sprechaktverb (Rahmen) |
Uebersetzung: "[Er] fragte: 'Wieviele Schueler gab es?'"
[Quelle: Lekt_34 HO, S. 5]
B. Fragewoerter in relativischer Funktion
Interrogativpronomen und Frageadverbien koennen auch in relativischer Funktion auftreten. In diesem Fall leiten sie einen Relativsatz ein, der kein Fragesatz ist.
[Quelle: Lekt_34 HO, S. 6]
Beispiel (Interrogativpronomen relativisch):
ཁྱོད་ཀྱིས་ཁོ་བོ་ལ་ཅི་འདུག་པར་མཐོང།
Wylie: khyod kyis kho bo la ci 'dug par mthong/
| Wylie | Bedeutung | Grammatik |
| khyod kyis | du (+ Erg) | Pron + Erg |
| kho bo la | bei mir (+ Dat) | Pron + Dat |
| ci | was | IPron (relativisch) |
| 'dug par | vorhanden ist (+ Nom) | EV + Nom |
| mthong | sehen | tdV; 1.SF |
Uebersetzung: "Du siehst, was ich besitze."
[Quelle: Lekt_34 HO, S. 6]
Beispiel (Frageadverb relativisch):
ཁོ་བོ་གར་འགྲོ་བར་ཁྱོད་འཁྲིད་པ་ཡིན་གསུང།
Wylie: kho bo gar 'gro bar khyod 'khrid pa yin gsung/
| Wylie | Bedeutung | Grammatik |
| kho bo | ich | Pron (1.Pers) |
| gar | wohin (relativisch) | IAdv (relativisch) |
| 'gro bar | gehen (+ Nom) | idV; 1.SF + Nom |
| khyod | dich | Pron (2.Pers) |
| 'khrid pa yin | leiten werde | tdV; 3.SF + Aux |
| gsung | (er) sagte (hon.) | Sprechaktverb (Rahmen) |
Uebersetzung: "[Er] sagte: '[Ich] werde dich leiten, wohin ich [auch] gehe.'"
[Quelle: Lekt_34 HO, S. 6]
Uebungen
(werden separat bearbeitet)
Uebungen
Lektion 34 -- Uebungen: Saetze 1--5
Thema: Zur Bildung der Wortfrage
Die Saetze enthalten Wortfragen mit Interrogativpronomen (su, ci, gang) und Frageadverbien. Jeder Satz hat eine Rahmenkonstruktion: Fragesatz + Sprechaktverb (dri ba, zhu ba, zer ba, byas). Der innere Wortfragesatz endet im STAMM des Satzverbs (kein Finalsuffix im inneren Fragesatz).
Satz 1
Tibetisch: གདམས་ངག་སུ་ལ་ཡོད་དྲིས
Wylie: gdams ngag su la yod dris
Morphemanalyse:
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| གདམས་ངག་ | gdams ngag | N | muendliche Unterweisung | S:Abs (Kopf) |
| སུ་ | su | IPron | wer? | iO:Dat;Possessor (Kopf) |
| ལ་ | la | KSuf | (Dativmarkierung) | iO:Dat |
| ཡོད་ | yod | EV | vorhanden sein | P2:EV;1.SF |
| དྲིས་ | dris | tdV; 2.SF | fragen | P1:VG1;2.SF |
Stammformen: 'dri ba -- dris pa -- 'dri ba -- dris (tdV) [Quelle: Lekt_11 WL, Nr. 29]
G: { FS: gdams ngag \<S:Abs\> su la \<iO:Dat;Possessor\> yod \<P2:EV\> } dris \<P1:VG1;2.SF\>
Uebersetzung: [Er/sie] fragte: "Wer besitzt die muendliche Unterweisung?" (woertl.: "Bei wem ist die muendliche Unterweisung vorhanden?")
Anmerkungen:
- su la: Interrogativpronomen su ("wer?") mit Dativmarkierung la (Possessor-Dativ bei Existenzverb yod). Bei Existenzverben (yod, bdog, 'dug) markiert "X la" haeufig den Besitzer/Inhaber: "X hat" = "bei X ist". [Quelle: Lekt_34 WL; Lekt_34 HO, S. 2]
- yod: Existenzverb, hier im Stamm (ohne Finalsuffix), weil es innerhalb des Wortfragesatzes steht. Die Wortfrage verlangt, dass das Verb im inneren Satz im Stamm steht, nicht mit Finalsuffix. [Quelle: Lekt_34 HO]
- dris: 2.SF von 'dri ba ("fragen"), aeusseres Sprechaktverb, das den Fragesatz rahmt. Es steht im Vergangenheitsstamm und drueckt aus, dass die Frage gestellt wurde. [Quelle: Lekt_11 WL, Nr. 29]
- gdams ngag: "muendliche Unterweisung" -- ein buddhistischer Fachbegriff fuer direkte, muendlich uebertragene Lehranweisungen. [Quelle: Lekt_10 WL]
- Implizites Subjekt des aeusseren Satzes (wer fragte) ist aus dem Kontext zu erschliessen.
- Textquelle: Deb ther sngon po (Blaue Annalen) von 'Gos lo tsa ba gZhon nu dpal. Engl. Uebers.: Roerich, *The Blue Annals*. [Externe Quelle: WisdomLib, Roerich Blue Annals]
- Kontext: Wortfragesatz mit Rahmenkonstruktion. Jemand fragte, bei wem die muendliche Unterweisung (gdams ngag) vorhanden sei. Der Satz demonstriert die Interrogativkonstruktion mit su la ("bei wem?").
[Quelle: Lekt_34 UEB, Satz 1]
Satz 2
Tibetisch: ཆོས་འདྲིའི་བདག་པོ་སུ་ཡིན་བྱས
Wylie: chos 'dri'i bdag po su yin byas
Morphemanalyse:
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| ཆོས་ | chos | N | religioese Lehre; Skt. dharma | Attr (Kompositum mit 'dri) |
| འདྲིའི་ | 'dri'i | tdV; 1.SF + AttrSuf | fragen + Genitiv | Attr (Genitiv, zu bdag po) |
| བདག་པོ་ | bdag po | N | Besitzer; Herr | S:Abs (Kopf) |
| སུ་ | su | IPron | wer? | Praedikatsnomen |
| ཡིན་ | yin | KV | sein | P2:KV |
| བྱས་ | byas | tdV; 2.SF | machen; (hier: sagen) | P1:VG1;2.SF |
Stammformen: byed pa -- byas pa -- bya ba -- byos (tdV) [Quelle: Lekt_07 WL; Lekt_13 WL]
Stammformen: 'dri ba -- dris pa -- 'dri ba -- dris (tdV) [Quelle: Lekt_11 WL, Nr. 29]
G: { FS: chos 'dri'i bdag po \<S:Abs\> su \<PraedNom\> yin \<P2:KV\> } byas \<P1:VG1;2.SF\>
Uebersetzung: [Er/sie] sagte: "Wer ist der Auftraggeber/Initiator der Befragung zur Lehre?"
Anmerkungen:
- chos 'dri'i bdag po: Genitivkonstruktion. chos 'dri = "Befragung zur Lehre" (Kompositum aus chos + 'dri ba im Sinne von "das Fragen nach der Lehre"). 'dri'i = Genitivform von 'dri (1.SF als Nominalkonstituente mit Genitivsuffix -'i). bdag po = "Herr; Besitzer; Auftraggeber". Zusammen: "Auftraggeber/Verantwortlicher der Befragung zur Lehre". [Quelle: Lekt_10 WL (chos, bdag po)]
- su yin: Kopulasatz mit Interrogativpronomen su ("wer?") als Praedikatsnomen + yin (Kopulaverb). Fragt nach der Identitaet des Subjekts. yin steht im Stamm (ohne Finalsuffix), weil es im Wortfragesatz steht. [Quelle: Lekt_34 HO]
- byas: 2.SF von byed pa. Hier wird byas als aeusseres Sprechaktverb im Sinne von "sagen; aeussern" verwendet (konventionalisiert). Diese Verwendung von byas als Sageverb findet sich haeufig in narrativen Texten. [Quelle: Lekt_13 WL]
- Implizites Subjekt: Der Fragende ist aus dem Kontext zu erschliessen.
- Alternative Lesung: bdag po koennte auch als "Auftraggeber" oder "Initiator" der Dharma-Befragung verstanden werden, nicht nur als allgemeiner "Herr/Besitzer".
- Textquelle: Deb ther sngon po (Blaue Annalen) von 'Gos lo tsa ba gZhon nu dpal. Engl. Uebers.: Roerich, *The Blue Annals*. [Externe Quelle: WisdomLib, Roerich Blue Annals]
- Kontext: Wortfragesatz mit byas als Sprechaktverb. Jemand fragte nach der Identitaet des Herrn der Dharma-Befragung. Der Satz demonstriert die Interrogativkonstruktion mit su yin ("wer ist?").
[Quelle: Lekt_34 UEB, Satz 2]
Satz 3
Tibetisch: སྔོན་གྱི་རིགས་རྒྱུད་གང་ཡིན་ཞེས་འདྲི
Wylie: sngon gyi rigs rgyud gang yin zhes 'dri
Morphemanalyse:
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| སྔོན་ | sngon | Adv | frueher | ABtemp |
| གྱི་ | gyi | AttrSuf | (Genitivmarkierung) | Attr (verbindet sngon mit rigs rgyud) |
| རིགས་རྒྱུད་ | rigs rgyud | N | Abstammung | S:Abs (Kopf) |
| གང་ | gang | IPron | wer? was? welche(r)? | Praedikatsnomen |
| ཡིན་ | yin | KV | sein | P2:KV |
| ཞེས་ | zhes | ZitPart | (Zitationspartikel) | ZitPart |
| འདྲི་ | 'dri | tdV; 1.SF | fragen | P1:VG1;1.SF |
Stammformen: 'dri ba -- dris pa -- 'dri ba -- dris (tdV) [Quelle: Lekt_11 WL, Nr. 29]
G: { FS: sngon gyi \<ABtemp;Attr\> rigs rgyud \<S:Abs\> gang \<PraedNom\> yin \<P2:KV\> } zhes 'dri \<ZitPart;P1:VG1;1.SF\>
Uebersetzung: [Er/sie] fragt: "Welches ist die fruehere Abstammung?" (= [Er/sie] fragt, welches die fruehere Abstammungslinie sei.)
Anmerkungen:
- sngon gyi: "frueheres; der frueheren [Zeit]". sngon = "frueher" (Adv, Lekt_32 WL) wird durch gyi (Genitiv-/Attributsuffix) mit rigs rgyud verbunden. gyi ist hier das Allomorph des Genitivsuffixes nach Konsonant -n. [Quelle: Lekt_32 WL (sngon)]
- rigs rgyud: "Abstammung; Stammeslinie". Zusammensetzung aus rigs ("Art; Familie; Abstammung") und rgyud ("Kontinuum; Strom"). [Quelle: Lekt_34 WL]
- gang yin: Kopulasatz mit Interrogativpronomen gang ("wer? was? welche(r)?") als Praedikatsnomen + yin (Kopulaverb im Stamm). Die Frage zielt auf die Identitaet der Abstammung. [Quelle: Lekt_34 WL; Lekt_34 HO]
- zhes: Zitationspartikel (Allomorph von ces), markiert das Ende des woertlich zitierten Fragesatzes. [Quelle: CSV-Eintrag]
- 'dri: 1.SF von 'dri ba ("fragen"), aeusseres Sprechaktverb. 'dri steht im Praesens (1.SF), was auf eine habituelle oder gerade stattfindende Handlung hinweist ("fragt"). Im Gegensatz zu Satz 1 (dris, 2.SF = Vergangenheit) steht hier die Gegenwartsform. [Quelle: Lekt_11 WL, Nr. 29]
- yin steht im Stamm ohne Finalsuffix, weil es innerhalb des Wortfragesatzes steht. [Quelle: Lekt_34 HO]
- Textquelle: Deb ther sngon po (Blaue Annalen) von 'Gos lo tsa ba gZhon nu dpal. Engl. Uebers.: Roerich, *The Blue Annals*. [Externe Quelle: WisdomLib, Roerich Blue Annals]
- Kontext: Wortfragesatz mit gang yin ("welche ist?"). Jemand fragt nach der frueheren Abstammungslinie (rigs rgyud). Der Satz demonstriert die Interrogativkonstruktion mit gang als Praedikatsnomen.
[Quelle: Lekt_34 UEB, Satz 3]
Satz 4
Tibetisch: དེའི་རྒྱུ་མཚན་ཅི་ལགས་ཞེས་ཞུས
Wylie: de'i rgyu mtshan ci lags zhes zhus
Morphemanalyse:
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| དེའི་ | de'i | DemPron + AttrSuf | dessen; davon | Possessor; Attr (Genitiv, zu rgyu mtshan) |
| རྒྱུ་མཚན་ | rgyu mtshan | N | Ursache; Grund | S:Abs (Kopf) |
| ཅི་ | ci | IPron | was? | Praedikatsnomen |
| ལགས་ | lags | KV (resp.) | sein (resp.) | P2:KV (resp.) |
| ཞེས་ | zhes | ZitPart | (Zitationspartikel) | ZitPart |
| ཞུས་ | zhus | tdV; 2.SF (resp.) | fragen (resp.) | P1:VG1;2.SF (resp.) |
Stammformen: zhu ba -- zhus pa -- zhu ba -- zhus (tdV; resp.) [Quelle: Lekt_08 WL; Lekt_11 WL, Nr. 20]
G: { FS: de'i \<Attr\> rgyu mtshan \<S:Abs\> ci \<PraedNom\> lags \<P2:KV;resp.\> } zhes zhus \<ZitPart;P1:VG1;2.SF;resp.\>
Uebersetzung: [Er/sie] fragte ehrerbietig: "Was ist dessen Ursache?" (= [Er/sie] fragte [eine hoehergestellte Person] respektvoll nach der Ursache davon.)
Anmerkungen:
- de'i: Genitiv von de ("jener; das"), gebildet durch de + 'i (Genitivsuffix). Verweist anaphorisch auf etwas zuvor Erwahntes. [Quelle: Lekt_08 WL]
- rgyu mtshan: "Ursache; Grund". Der Fragende will wissen, warum etwas (de) so ist. [Quelle: Lekt_34 WL]
- ci lags: Kopulasatz mit Interrogativpronomen ci ("was?") + lags (respektvolles Kopulaverb). lags steht im Stamm (ohne Finalsuffix) als inneres Verb des Wortfragesatzes. Die respektvolle Kopula lags zeigt an, dass die Frage an eine hoehergestellte Person gerichtet ist. [Quelle: Lekt_34 WL; Lekt_20 WL (lags pa)]
- zhes zhus: Zitationspartikel zhes + aeusseres Sprechaktverb zhus (2.SF von zhu ba, "fragen/bitten", resp.). zhus ist die respektvolle Form des Fragens. Die doppelte Respektmarkierung (lags im inneren Satz, zhus als aeusseres Verb) zeigt ein starkes Hoeflichkeitsregister. [Quelle: Lekt_08 WL; Lekt_11 WL, Nr. 20]
- Syntaktischer Unterschied zu Satz 1: Dort steht dris direkt ohne Zitationspartikel; hier wird zhes als Zitationspartikel verwendet, um den Fragesatz explizit als woertliche Rede zu markieren.
- Textquelle: Deb ther sngon po (Blaue Annalen) von 'Gos lo tsa ba gZhon nu dpal. Engl. Uebers.: Roerich, *The Blue Annals*. [Externe Quelle: WisdomLib, Roerich Blue Annals]
- Kontext: Respektvolle Frage nach der Ursache (rgyu mtshan) von etwas zuvor Erwahntem. Der Satz demonstriert die doppelte Respektmarkierung: lags (innerer Satz) und zhus (aeusseres Verb).
[Quelle: Lekt_34 UEB, Satz 4]
Satz 5
Tibetisch: ཨ་རོ་ཁྱོད་འདིར་ཅི་བྱེད་ཟེར
Wylie: a ro khyod 'dir ci byed zer
Morphemanalyse:
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| ཨ་རོ་ | a ro | NZ | A ro (Anrede) | Vokativ |
| ཁྱོད་ | khyod | PersPron (2. Pers.) | du | S:Erg |
| འདིར་ | 'dir | DemPron + PP | hier (= 'di + -r) | ABlok |
| ཅི་ | ci | IPron | was? | dO:Abs |
| བྱེད་ | byed | tdV; 1.SF | machen; tun | P2:VG1;1.SF |
| ཟེར་ | zer | tdV; 1.,2.,3.SF | sagen | P1:VG1;1./2.SF |
Stammformen: byed pa -- byas pa -- bya ba -- byos (tdV) [Quelle: Lekt_07 WL; Lekt_13 WL]
Stammformen: zer ba -- zer ba -- zer ba (tdV; 1.,2.,3.SF identisch) [Quelle: Lekt_12 WL]
G: { FS: a ro \<Vokativ\> khyod \<S:Erg\> 'dir \<ABlok\> ci \<dO:Abs\> byed \<P2:VG1;1.SF\> } zer \<P1:VG1;1./2.SF\>
Uebersetzung: [Er/sie] sagt: "A ro, was machst du hier?"
Anmerkungen:
- a ro: Anrede (Namenszusatz), am Satzanfang als Vokativ. Die Person wird direkt angesprochen. [Quelle: Lekt_34 WL]
- khyod: Personalpronomen der 2. Person ("du"). Als Agens eines transitiven Verbs (byed pa) steht es im Ergativ, obwohl kein explizites Ergativsuffix vorhanden ist. Bei Personalpronomen kann das Ergativsuffix wegfallen, da die syntaktische Rolle aus dem Kontext eindeutig ist. [Quelle: Lekt_08 WL]
- 'dir: Kontrahierte Form von 'di + la/r ("hier; an diesem [Ort]"). 'di (Demonstrativpronomen) + Terminativsuffix -r (Allomorph von la nach Vokal) ergibt die Bedeutung "hier; an diesem Ort". [Quelle: Lekt_08 WL ('di)]
- ci byed: "Was machst [du]?". ci ist Interrogativpronomen ("was?") als direktes Objekt, byed ist 1.SF von byed pa ("machen; tun"). byed steht im Stamm (ohne Finalsuffix), weil es im Wortfragesatz steht. [Quelle: Lekt_34 WL (ci); Lekt_07 WL (byed pa)]
- zer: Aeusseres Sprechaktverb, 1./2.SF von zer ba ("sagen"). Da alle drei Stammformen identisch sind (zer), ist die zeitliche Einordnung (Gegenwart oder Vergangenheit) nur aus dem Kontext moeglich. Ohne weiteren Kontext wird hier Praesens angenommen. [Quelle: Lekt_12 WL]
- Ergativ bei khyod: Obwohl byed pa ein tdV ist und das Subjekt im Ergativ stehen sollte, fehlt das explizite Ergativsuffix. Bei Personalpronomen ist das Ergativsuffix in dieser Konstruktion nicht obligatorisch (vgl. Lekt_34 HO, S. 5: khyod ci'i phyir 'di na 'dug ces smras -- ebenfalls ohne Ergativ).
- Textquelle: Deb ther sngon po (Blaue Annalen) von 'Gos lo tsa ba gZhon nu dpal. Engl. Uebers.: Roerich, *The Blue Annals*. [Externe Quelle: WisdomLib, Roerich Blue Annals]
- Kontext: Direkte Anrede: Jemand spricht A ro an und fragt "Was machst du hier?". Der Satz demonstriert die Interrogativkonstruktion mit ci byed ("was tun?").
[Quelle: Lekt_34 UEB, Satz 5]
Lektion 34 -- Uebungen, Saetze 6-10
Satz 6
Tibetisch: འཕགས་སྐོར་མཁན་པོ་གང་ན་བདོག་བྱས།
Wylie: 'phags skor mkhan po gang na bdog byas/
Morphemanalyse:
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| འཕགས་སྐོར་ | 'phags skor | NZ | Zyklus des "Edlen" | Attribut (Gen; Teil des Kompositums) |
| མཁན་པོ་ | mkhan po | N | Abt | S:Abs (Kopf) |
| གང་ན་ | gang na | IAdv | wo? | FS:ABlok |
| བདོག | bdog | EV | vorhanden sein | FS:P:EV (inneres Praedikat) |
| བྱས | byas | tdV; 2.SF | machen; hier: fragen/sagen | P1:Sprechaktverb (aeusseres Praedikat) |
Stammformen (byed pa): byed pa -- byas pa -- bya ba -- byos (tdV) [Quelle: Lekt_07 WL; Lekt_13 WL]
G: { FS: 'phags skor mkhan po \<S:Abs\> gang na \<ABlok\> bdog \<P2:EV\> } byas \<P1:Sprechaktverb;2.SF\> /
Uebersetzung: [Er] fragte: "Wo befindet sich der Abt des 'Phags skor?"
Anmerkungen:
- 'phags skor mkhan po: "Abt des 'Phags skor". 'phags skor ("Zyklus des Edlen") ist ein Klostername (NZ), mkhan po ("Abt") ist das Kopfnomen. Die Genitivrelation ist ohne explizites Genitivsuffix realisiert (Kompositum). [Quelle: Lekt_34 WL, Nr. 9; Lekt_05 WL]
- gang na: Frageadverb fuer den Existenzort ("wo?"). Zusammengesetzt aus gang (IPron) + na (Lokativsuffix). Vgl. Grammatik Lekt_34 HO, S. 4: gang + na = "wo" (Existenzort/Geschehensort). [Quelle: Lekt_34 WL, Nr. 8; Lekt_34 HO, S. 4]
- bdog: Existenzverb ("vorhanden sein; in Besitz sein"). Der Wortfragesatz endet im Stamm des Satzverbs (KEIN Finalsuffix), wie in Lekt_34 HO, S. 1 beschrieben. [Quelle: Lekt_34 WL, Nr. 10; Lekt_34 HO, S. 1]
- byas: 2.SF von byed pa, hier als aeusseres Sprechaktverb ("fragte"). Rahmenkonstruktion: Fragesatz + Sprechaktverb. [Quelle: Lekt_13 WL; Lekt_34 HO, S. 1]
- Textquelle: Deb ther sngon po (Blaue Annalen) von 'Gos lo tsa ba gZhon nu dpal. Engl. Uebers.: Roerich, *The Blue Annals*. [Externe Quelle: WisdomLib, Roerich Blue Annals]
- Kontext: Frage nach dem Aufenthaltsort des Abtes des 'Phags skor-Klosters. Der Satz demonstriert die Interrogativkonstruktion mit gang na ("wo?") und dem Existenzverb bdog.
[Quelle: Lekt_34 UEB, Satz 6]
Satz 7
Tibetisch: ལར་ཁྱོད་ཀྱིས་ཇི་ཙམ་ཅིག་བཅིངས་གསུང།
Wylie: lar khyod kyis ji tsam cig bcings gsung/
Morphemanalyse:
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| ལར་ | lar | Konj | aber | Konjunktion (satzeinleitend) |
| ཁྱོད་ | khyod | PersPron; 2.Pers. | du | FS:S:Erg (Kopf) |
| ཀྱིས་ | kyis | KSuf | -- | FS:S:Erg (Ergativmarkierung) |
| ཇི་ཙམ་ཅིག | ji tsam cig | IAdv | wie lang? | FS:ABtemp |
| བཅིངས | bcings | tdV; 2.SF | fesseln; gefesselt | FS:P2:VG1;2.SF (inneres Praedikat) |
| གསུང | gsung | tdV; 1.SF (resp.) | sagen (resp.) | P1:Sprechaktverb (aeusseres Praedikat; resp.) |
Stammformen ('ching ba): 'ching ba -- bcings pa -- bcing ba -- chings (tdV) [Quelle: Lekt_16 WL, Nr. 10; Lekt_34 WL, Nr. 13]
Stammformen (gsung ba): gsung ba -- gsungs pa -- gsung ba -- gsungs (tdV; resp.) [Quelle: Lekt_08 WL; Lekt_12 WL]
G: lar \<Konj\> { FS: khyod kyis \<S:Erg\> ji tsam cig \<ABtemp\> bcings \<P2:VG1;2.SF\> } gsung \<P1:Sprechaktverb;1.SF;resp.\> /
Uebersetzung: Aber [er] sagte (resp.): "Wie lange hast du [ihn] gefesselt?"
Anmerkungen:
- lar: Konjunktion "aber", leitet den Satz adversativ ein. [Quelle: Lekt_34 WL, Nr. 11]
- khyod kyis: "du" (2. Pers.) mit Ergativsuffix kyis. Das Ergativsuffix zeigt an, dass khyod als Agens eines transitiven Verbs (bcings) fungiert. [Quelle: Lekt_08 WL]
- ji tsam cig: Frageadverb fuer Zeitdauer ("wie lang?"). Zusammengesetzt aus ji + tsam ("Mass") + cig (IndPart). Vgl. Lekt_34 HO, S. 3: ji-tsam zhig = "wie lang" (Frage nach der Zeitdauer). Hier cig statt zhig als Allomorph der Indefinitpartikel. [Quelle: Lekt_34 WL, Nr. 12; Lekt_34 HO, S. 3]
- bcings: 2.SF von 'ching ba ("fesseln"). Vergangenheitsform. Der Wortfragesatz endet im Stamm (kein Finalsuffix). [Quelle: Lekt_34 WL, Nr. 13; Lekt_16 WL, Nr. 10]
- gsung: 1.SF von gsung ba ("sagen"; resp.), hier als aeusseres Sprechaktverb. Respektform. Hier steht die 1.SF (Praesensstamm), nicht die 2.SF gsungs. [Quelle: Lekt_08 WL; Lekt_12 WL]
- Das implizite direkte Objekt des Fesselns ist nicht genannt; aus dem Kontext zu erschliessen.
- Textquelle: Deb ther sngon po (Blaue Annalen) von 'Gos lo tsa ba gZhon nu dpal, Buch 5 oder 8. Engl. Uebers.: Roerich, *The Blue Annals*. [Externe Quelle: WisdomLib, Roerich Blue Annals]
- Kontext: Dialogpassage, moeglicherweise im Kontext tantrischer Praxis. Jemand fragt (resp.): "Wie lange hast du [ihn] gefesselt?" Der fehlende Kontext laesst offen, worauf sich das Fesseln bezieht.
[Quelle: Lekt_34 UEB, Satz 7]
Satz 8
Tibetisch: ཁྱེད་རྣམས་གང་ནས་འོངས། ཅི་བྱེད་བྱས།
Wylie: khyed rnams gang nas 'ongs/ ci byed byas/
Morphemanalyse:
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| ཁྱེད་ | khyed | PersPron; 2.Pers.; resp. | Ihr | FS1+FS2:S:Abs (Kopf) |
| རྣམས་ | rnams | PlSuf | -- | FS1+FS2:S:Abs (Pluralmarkierung) |
| གང་ནས་ | gang nas | IAdv | woher? | FS1:ABlok |
| འོངས | 'ongs | tmdV; 2.SF | kommen | FS1:P:VG6;2.SF (inneres Praedikat 1) |
| ཅི་ | ci | IPron | was? | FS2:dO:Abs |
| བྱེད | byed | tdV; 1.SF | machen; tun | FS2:P:VG1;1.SF (inneres Praedikat 2) |
| བྱས | byas | tdV; 2.SF | machen; hier: fragen/sagen | P1:Sprechaktverb (aeusseres Praedikat) |
Stammformen ('ong ba): 'ong ba -- 'ongs pa -- 'ong ba (tmdV) [Quelle: Lekt_26 WL; Lekt_14 WL]
Stammformen (byed pa): byed pa -- byas pa -- bya ba -- byos (tdV) [Quelle: Lekt_07 WL; Lekt_13 WL]
G: { FS1: khyed rnams \<S:Abs\> gang nas \<ABlok\> 'ongs \<P:VG6;2.SF\> / } { FS2: ci \<dO:Abs\> byed \<P:VG1;1.SF\> } byas \<P1:Sprechaktverb;2.SF\> /
Uebersetzung: [Er] fragte: "Woher seid ihr gekommen? Was macht ihr?"
Anmerkungen:
- Doppelfrage: Dieser Satz enthaelt zwei Fragesaetze innerhalb einer Rahmenkonstruktion. Der erste Fragesatz fragt nach dem Herkunftsort (gang nas + 'ongs), der zweite nach der Taetigkeit (ci + byed). Beide werden durch das aeussere Sprechaktverb byas eingerahmt.
- khyed rnams: "ihr" (2.Pers.Pl., resp.). khyed ist die respektvolle Form der 2. Person, rnams markiert den Plural. [Quelle: Lekt_09 WL]
- gang nas: Frageadverb fuer den Herkunftsort ("woher?"). Zusammengesetzt aus gang (IPron) + nas (Ablativsuffix). Vgl. Lekt_34 HO, S. 4: gang/ga + nas/las = "woher" (Herkunftsort). [Quelle: Lekt_34 WL, Nr. 14; Lekt_34 HO, S. 4]
- 'ongs: 2.SF von 'ong ba ("kommen"). Vergangenheitsform: "seid gekommen". Wortfragesatz endet im Stamm (kein Finalsuffix). [Quelle: Lekt_14 WL; Lekt_26 WL]
- ci byed: "was macht [ihr]?" -- ci als Interrogativpronomen (dO:Abs), byed als 1.SF von byed pa ("machen"). Vgl. Lekt_34 HO, S. 2: ci byed gsung = "[Er] sagte: 'Was macht [er]?'". [Quelle: Lekt_34 WL, Nr. 6; Lekt_34 HO, S. 2]
- Das Subjekt khyed rnams ("ihr") gilt fuer beide Fragesaetze, wird aber nur im ersten explizit genannt.
- khyed rnams steht im Absolutiv (passend zum ersten Fragesatz mit dem tmdV 'ongs). Im zweiten Fragesatz (ci byed) ist das Subjekt elliptisch -- aus dem Kontext khyed rnams. Bei Personalpronomen ist das Ergativsuffix bei tdV ohnehin haeufig nicht obligatorisch.
- Textquelle: Deb ther sngon po (Blaue Annalen) von 'Gos lo tsa ba gZhon nu dpal, Buch 8 (Karmapa). Engl. Uebers.: Roerich, *The Blue Annals*. [Externe Quelle: WisdomLib, Roerich Blue Annals]
- Kontext: Doppelfrage: "Woher seid ihr gekommen? Was macht ihr?" Die Frage nach dem Thron von 'Tshur phu im weiteren Kontext deutet auf Kapitel ueber die Karmapa-Linie hin.
[Quelle: Lekt_34 UEB, Satz 8]
Satz 9
Tibetisch: ཁྱེད་ཀྱི་ཐུགས་ལ་བདེན་གཉིས་ཇི་ལྟར་སྐྱེས་གསུང།
Wylie: khyed kyi thugs la bden gnyis ji ltar skyes gsung/
Morphemanalyse:
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| ཁྱེད་ | khyed | PersPron; 2.Pers.; resp. | Ihr | iO:Dat;Possessor (Attribut) |
| ཀྱི་ | kyi | KSuf | -- | Genitivmarkierung (Possessor) |
| ཐུགས་ | thugs | N (resp.) | Herz; Geist (resp.) | iO:Dat (Kopf) |
| ལ་ | la | KSuf | -- | FS:iO:Dat (Dativmarkierung; Lokus des Geschehens) |
| བདེན་ | bden | N | Wahrheit | FS:S:Abs (Attribut) |
| གཉིས་ | gnyis | ZW | zwei | FS:S:Abs (Kopf: "die zwei Wahrheiten") |
| ཇི་ལྟར་ | ji ltar | IAdv | wie? | FS:ABmod |
| སྐྱེས | skyes | tmdV; 2.SF | entstehen; geboren werden | FS:P:VG6;2.SF (inneres Praedikat) |
| གསུང | gsung | tdV; 1.SF (resp.) | sagen (resp.) | P1:Sprechaktverb (aeusseres Praedikat; resp.) |
Stammformen (skye ba): skye ba -- skyes pa -- skye ba (tmdV; VG6) [Quelle: Lekt_11 WL; Lekt_12 WL]
Stammformen (gsung ba): gsung ba -- gsungs pa -- gsung ba -- gsungs (tdV; resp.) [Quelle: Lekt_08 WL; Lekt_12 WL]
G: { FS: khyed kyi thugs la \<iO:Dat\> bden gnyis \<S:Abs\> ji ltar \<ABmod\> skyes \<P:VG6;2.SF\> } gsung \<P1:Sprechaktverb;1.SF;resp.\> /
Uebersetzung: [Er] sagte (resp.): "Wie sind die zwei Wahrheiten (bden gnyis) in Eurem (resp.) Geist entstanden?"
Anmerkungen:
- khyed kyi thugs la: "in Eurem (resp.) Geist". khyed ("Ihr"; resp.) mit Genitivsuffix kyi, thugs ("Geist"; resp.) mit Dativsuffix la. Die Dativmarkierung zeigt den Ort des mentalen Geschehens an ("in Eurem Geist"). [Quelle: Lekt_09 WL; Lekt_09 WL (thugs)]
- bden gnyis: "die zwei Wahrheiten" (bden pa = "Wahrheit", gnyis = "zwei"). Dies ist ein zentraler buddhistischer Fachbegriff: die zwei Wahrheiten (konventionelle und hoehere Wahrheit; Skt. samvrtisatya und paramarthasatya). [Quelle: Lekt_04 WL (bden pa); Lekt_02 WL (gnyis)]
- ji ltar: Frageadverb fuer Art und Weise ("wie?"). Zusammengesetzt aus ji + ltar ("gemaess"). Vgl. Lekt_34 HO, S. 4-5: ji/ci + ltar/bzhin/lta bu/lta ba = "wie (beschaffen) / welcher Art". [Quelle: Lekt_34 WL, Nr. 15; Lekt_34 HO, S. 4-5]
- skyes: 2.SF von skye ba ("entstehen"). Vergangenheitsform. Hier als intransitives Verb (tmdV; VG6): "die zwei Wahrheiten sind ... entstanden". [Quelle: Lekt_12 WL; Lekt_11 WL]
- gsung: 1.SF von gsung ba ("sagen"; resp.), als aeusseres Sprechaktverb. Respektform. [Quelle: Lekt_08 WL]
- Die Frage zielt darauf ab, wie der Angesprochene die buddhistischen zwei Wahrheiten verinnerlicht/verstanden hat. thugs la skye ba = "im Geist entstehen" = "verstehen; begreifen" (metaphorisch).
- Textquelle: Deb ther sngon po (Blaue Annalen) von 'Gos lo tsa ba gZhon nu dpal. Engl. Uebers.: Roerich, *The Blue Annals*. [Externe Quelle: WisdomLib, Roerich Blue Annals]
- Kontext: Philosophische Frage eines Meisters (resp.): "Wie sind die zwei Wahrheiten (konventionelle und hoehere Wahrheit) in Eurem Geist entstanden?" -- eine Pruefungsfrage ueber das buddhistische Verstaendnis.
[Quelle: Lekt_34 UEB, Satz 9]
Satz 10
Tibetisch: ཁྱོད་ཅིའི་ཕྱིར་མི་རྩོམ་ཞེས་གསུང།
Wylie: khyod ci'i phyir mi rtsom zhes gsung/
Morphemanalyse:
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| ཁྱོད་ | khyod | PersPron; 2.Pers. | du | FS:S:Erg |
| ཅིའི་ཕྱིར་ | ci'i phyir | IAdv | warum? | FS:ABkaus |
| མི་ | mi | NegPart | nicht | FS:Negationspartikel |
| རྩོམ | rtsom | tdV; 1.SF | verfassen; abfassen | FS:P:VG1;1.SF (inneres Praedikat) |
| ཞེས་ | zhes | ZitPart | so (Zitatpartikel) | Zitatpartikel |
| གསུང | gsung | tdV; 1.SF (resp.) | sagen (resp.) | P1:Sprechaktverb (aeusseres Praedikat; resp.) |
Stammformen (rtsom pa): rtsom pa -- brtsams pa -- brtsam pa -- rtsoms (tdV) [Quelle: Lekt_34 WL, Nr. 17; Externe Quelle: Hill]
Stammformen (gsung ba): gsung ba -- gsungs pa -- gsung ba -- gsungs (tdV; resp.) [Quelle: Lekt_08 WL; Lekt_12 WL]
G: { FS: khyod \<S:Erg\> ci'i phyir \<ABkaus\> mi rtsom \<P:VG1;1.SF;Neg\> } zhes gsung \<P1:ZitPart+Sprechaktverb;1.SF;resp.\> /
Uebersetzung: [Er] sagte (resp.): "Warum verfasst du [es] nicht?"
Anmerkungen:
- khyod: "du" (2.Pers.), hier ohne explizites Ergativsuffix, obwohl es das Agens eines transitiven Verbs (rtsom pa) ist. Bei Personalpronomen der 2. Person ist das Ergativsuffix in Fragesaetzen oft nicht obligatorisch (vgl. Lekt_34 HO, S. 5: khyod ci'i phyir 'di na 'dug).
- ci'i phyir: Frageadverb fuer den Grund ("warum?"). Zusammengesetzt aus ci ("was?") + 'i (Gen) + phyir ("Grund; wegen"). Wtl.: "wessen Grundes wegen?" = "warum?". Vgl. Lekt_34 HO, S. 5: ci + 'i phyir = "warum; weshalb". [Quelle: Lekt_34 WL, Nr. 16; Lekt_34 HO, S. 5]
- mi rtsom: Negation (mi) + 1.SF von rtsom pa ("verfassen"). mi negiert den Praesensstamm: "nicht verfassen / verfasst nicht". [Quelle: Lekt_34 WL, Nr. 17]
- zhes gsung: Zitatpartikel zhes + Sprechaktverb gsung (resp.). zhes ist ein Allomorph von ces (Zitatpartikel), das nach auslautendem Vokal oder Nasal steht. Hier markiert zhes das Ende der woertlichen Rede, gefolgt vom aeusseren Sprechaktverb. [Quelle: Analysis_2026-01-04 (zhes)]
- Das direkte Objekt ("es") des Verfassens ist implizit und muss aus dem Kontext erschlossen werden.
- Stammformen von rtsom pa: In der Wortliste (Lekt_34 WL, Nr. 17) ist nur die 1.SF angegeben. Vollstaendige Stammformen nach Hill (extern): rtsom -- brtsams -- brtsam -- rtsoms. [Externe Quelle: Hill]
- Textquelle: Deb ther sngon po (Blaue Annalen) von 'Gos lo tsa ba gZhon nu dpal. Engl. Uebers.: Roerich, *The Blue Annals*. [Externe Quelle: WisdomLib, Roerich Blue Annals]
- Kontext: Aufforderungsfrage: Jemand fragt (resp.) "Warum verfasst du [es] nicht?" -- eine Ermutigung an den Angesprochenen, ein Werk zu verfassen.
[Quelle: Lekt_34 UEB, Satz 10]
Uebungen (Saetze 11-15)
[Aus LEK_34 UEB.pdf]
Satz 11
Tibetisch: གཞན་ཞིག་གིས་གཙང་པ་ལ་སྟོད་ལུངས་པ་དེ་ཅི་འདྲ་ཞུས།
Wylie: gzhan zhig gis gtsang pa la stod lungs pa de ci 'dra zhus/
Morphemanalyse:
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| གཞན་ | gzhan | IndPron | andere(r) | S1:Erg (Kopf) |
| ཞིག་ | zhig | IndefPart | ein(e) | IndefPart (zu gzhan) |
| གིས་ | gis | KSuf | (Ergativmarkierung) | Erg |
| གཙང་པ་ | gtsang pa | NZ | gTsang pa | iO:Dat (Kopf) |
| ལ་ | la | PP | zu; an | iO:Dat:PP |
| སྟོད་ལུངས་པ་ | stod lungs pa | NZ | sTod lungs pa | FS:Th:Abs (Kopf) |
| དེ་ | de | DemPron | jener | Dem (zu stod lungs pa) |
| ཅི་འདྲ་ | ci 'dra | IAdv | welcher Art? was fuer ein(e)? | FS:ABmod |
| ཞུས་ | zhus | tdV; 2.SF | fragen; bitten (resp.) | P1:VG1;2.SF (aeusseres Sprechaktverb) |
| ། | / | -- | Satzendmarkierung | FinSuf |
Stammformen: zhu ba -- zhus pa -- zhu ba -- zhus (tdV) [Quelle: Lekt_08 WL; Lekt_11 WL]
G: { gzhan zhig gis \<S1:Erg\> gtsang pa la \<iO:Dat:PP\> FS:[ stod lungs pa de \<Th:Abs\> ci 'dra \<ABmod\> ] zhus \<P1:VG1;2.SF\> / }
Uebersetzung: Ein anderer fragte (resp.) den gTsang pa: "Was fuer einer ist jener sTod lungs pa?"
Anmerkungen:
- Rahmenkonstruktion: Der aeussere Satz hat gzhan zhig gis als Subjekt im Ergativ und zhus als Sprechaktverb (2.SF von zhu ba, respektvoll). Der innere Fragesatz (Wortfrage) endet im Verbstamm ohne Finalsuffix: stod lungs pa de ci 'dra ("jener sTod lungs pa -- welcher Art?"). [Quelle: Lekt_34 HO]
- ci 'dra: Interrogativadverb "welcher Art? was fuer ein(e)?". Erfragt die Eigenschaft oder Beschaffenheit des sTod lungs pa. [Quelle: Lekt_34 WL]
- gtsang pa la: Dativmarkierung mit la. gTsang pa ist der Adressat der Frage (indirektes Objekt zu zhus = "fragen [wen]"). gtsang pa ist hier ein Namenszusatz/Toponym (NZ), nicht das Adjektiv "rein" (Skt. tib. gtsang). [Quelle: Lekt_34 WL]
- Der innere Fragesatz hat kein explizites Praedikat -- ci 'dra fungiert praedikativ ("ist welcher Art?"). Implizite Kopula.
- gzhan zhig: "ein anderer" -- gzhan als Indefinitpronomen mit dem Indefinitmarker zhig. [Quelle: Lekt_08 WL]
- Textquelle: Deb ther sngon po (Blaue Annalen) von 'Gos lo tsa ba gZhon nu dpal, Buch 8 ('Brug pa / Drukpa). Engl. Uebers.: Roerich, *The Blue Annals*. [Externe Quelle: WisdomLib, Roerich Blue Annals]
- Kontext: Dialogpassage aus der Drukpa-Geschichte: Ein anderer fragte den gTsang pa nach der Art/dem Charakter des sTod lungs pa. Der Satz demonstriert die Interrogativkonstruktion mit ci 'dra ("welcher Art?").
[Quelle: Lekt_34 UEB, Satz 11]
Satz 12
Tibetisch: དེ་འདྲ་བའི་རྣལ་འབྱོར་པ་དེ་གང་ན་ཡོད་པ་ཡིན་དྲིས།
Wylie: de 'dra ba'i rnal 'byor pa de gang na yod pa yin dris/
Morphemanalyse:
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| དེ་འདྲ་བ་ | de 'dra ba | Adj (Kompositum) | ein solcher; ein derartiger | FS:S:Abs (Attribut, zu rnal 'byor pa) |
| འི་ | 'i | AttrSuf | (Genitivmarkierung) | AttrSuf |
| རྣལ་འབྱོར་པ་ | rnal 'byor pa | N | Yogin (Skt. yogin) | FS:S:Abs (Kopf) |
| དེ་ | de | DemPron | jener | Dem (zu rnal 'byor pa) |
| གང་ན་ | gang na | IAdv | wo? | FS:ABlok |
| ཡོད་པ་ | yod pa | EV | vorhanden sein | FS:P2(inner):EV |
| ཡིན་ | yin | KV | sein | FS:P2(outer):KV |
| དྲིས་ | dris | tdV; 2.SF | fragen | P1:VG1;2.SF (aeusseres Sprechaktverb) |
| ། | / | -- | Satzendmarkierung | FinSuf |
Stammformen: 'dri ba -- dris pa -- 'dri ba -- dris (tdV) [Quelle: Lekt_34 WL; Lekt_11 WL]
G: { FS:[ de 'dra ba'i rnal 'byor pa de \<S:Abs\> gang na \<ABlok\> yod pa yin \<P2:EV+KV\> ] dris \<P1:VG1;2.SF\> / }
Uebersetzung: [Er/sie] fragte: "Wo befindet sich ein solcher Yogin?"
Anmerkungen:
- Rahmenkonstruktion: Aeusseres Sprechaktverb dris (2.SF von 'dri ba, "fragen") ohne explizites Subjekt im aeusseren Satz -- das Subjekt ist aus dem Kontext erschliessbar. [Quelle: Lekt_34 WL; Lekt_11 WL]
- de 'dra ba'i: "ein solcher / ein derartiger" -- de 'dra ba ("so beschaffen") mit Genitivsuffix 'i als Attribut zu rnal 'byor pa. de verweist anaphorisch auf etwas vorher Erwahntes. [Quelle: Lekt_23 WL ('dra ba)]
- gang na: Interrogativadverb "wo?" -- erfragt den Ort. [Quelle: Lekt_34 WL]
- yod pa yin: Periphrastische Vergangenheitskonstruktion (yod pa "vorhanden seiend" + yin "ist"). Die Verbindung "Verbalnomen auf -pa + yin" ist eine im klassischen Tibetisch gebraeuchliche Konstruktion zur Aussage/Frage ueber einen bestehenden Sachverhalt: "wo ist [er] vorhanden?" / "wo befindet [er] sich?". [Quelle: Lekt_13 WL (yod pa); Lekt_05 WL (yin pa)]
- Der innere Fragesatz endet im Stamm (yin) -- kein Finalsuffix, da Wortfragesatz. [Quelle: Lekt_34 HO]
- rnal 'byor pa: "Yogin" (Skt. yogin). [Quelle: Lekt_08 WL]
- Textquelle: Deb ther sngon po (Blaue Annalen) von 'Gos lo tsa ba gZhon nu dpal. Engl. Uebers.: Roerich, *The Blue Annals*. [Externe Quelle: WisdomLib, Roerich Blue Annals]
- Kontext: Frage nach dem Aufenthaltsort eines herausragenden Yogin: "Wo befindet sich ein solcher Yogin?" -- das Demonstrativpronomen de 'dra ba verweist auf eine zuvor beschriebene Person.
[Quelle: Lekt_34 UEB, Satz 12]
Satz 13
Tibetisch: ཞིབ་པར་བདག་གིས་བཤད་ག་ལ་ནུས།
Wylie: zhib par bdag gis bshad ga la nus/
Morphemanalyse:
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| ཞིབ་པར་ | zhib par | Adv | genau; detailliert; gruendlich | ABmod |
| བདག་ | bdag | PersPron (eleg.) | ich | S:Erg (Kopf) |
| གིས་ | gis | KSuf | (Ergativmarkierung) | Erg |
| བཤད་ | bshad | tdV; 2.,3.SF | erklaeren; darlegen | (Komplement zu nus) |
| ག་ལ་ | ga la | IAdv | wie?; wie koennte...? (rhetorisch) | ABmod (rhetorische Frage) |
| ནུས་ | nus | MV | koennen; imstande sein | P:MV |
| ། | / | -- | Satzendmarkierung | FinSuf |
Stammformen: 'chad pa -- bshad pa -- bshad pa -- shod (tdV; VG1) [Quelle: Lekt_22 WL ('chad pa); Lekt_11 WL (bshad pa)]
Stammformen: nus pa (MV, keine Stammformenunterscheidung) [Quelle: Lekt_23 WL]
G: { zhib par \<ABmod\> bdag gis \<S:Erg\> bshad \<V:tdV;2./3.SF\> ga la \<ABmod\> nus \<P:MV\> / }
Uebersetzung: Wie koennte ich [das] im Detail erklaeren? (= Ich bin nicht imstande, [das] im Detail zu erklaeren.)
Anmerkungen:
- KEIN Fragesatz mit Rahmenkonstruktion! Dieser Satz ist eine rhetorische Frage ohne aeusseres Sprechaktverb. Der Satz endet mit nus/ (mit Finalsuffix), nicht im blossen Stamm. [Quelle: Lekt_34 UEB]
- ga la: Interrogativadverb "wie? wie koennte...?" -- hier in rhetorischer Verwendung mit der impliziten Antwort "gar nicht; keineswegs". ga la nus = "wie koennte [ich] imstande sein?" = "ich kann unmoeglich...". ga la ist in Lekt_34 HO, S. 4-5 explizit als Frageadverb ("wie?" / "warum?") aufgefuehrt; mit Modalverb nus pa wird es typischerweise rhetorisch verwendet. [Quelle: Lekt_34 HO, S. 4-5]
- bshad: Hier 2./3.SF von 'chad pa / bshad pa ("erklaeren"). Im Kontext steht bshad als Komplement zu nus ("erklaeren koennen"). [Quelle: Lekt_11 WL]
- bdag gis: "ich" im Ergativ (elegante 1. Person). gis nach -g Auslaut ist korrekte Form des Ergativsuffixes. [Quelle: Lekt_08 WL]
- zhib par: Adverb "genau; detailliert; gruendlich". Das Suffix -par (= -bar + Lokativ) bildet ein Adverb. [Quelle: Lekt_34 WL]
- nus als Modalverb: Drueckt die Faehigkeit aus ("koennen; imstande sein"). Zusammen mit ga la ergibt sich die rhetorische Verneinung der Faehigkeit. [Quelle: Lekt_23 WL]
- Textquelle: Deb ther sngon po (Blaue Annalen) von 'Gos lo tsa ba gZhon nu dpal. Engl. Uebers.: Roerich, *The Blue Annals*. [Externe Quelle: WisdomLib, Roerich Blue Annals]
- Kontext: Rhetorische Frage des Autors/Erzaehlers, die Bescheidenheit ausdrueckt: "Wie koennte ich das im Detail erklaeren?" -- kein Fragesatz mit Rahmenkonstruktion, sondern eine eigenstaendige rhetorische Frage.
[Quelle: Lekt_34 UEB, Satz 13]
Satz 14
Tibetisch: ང་དམིགས་པ་གང་ལ་གཏད་འདུག་གསུང།
Wylie: nga dmigs pa gang la gtad 'dug gsung/
Morphemanalyse:
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| ང་ | nga | PersPron | ich | FS:S:Abs |
| དམིགས་པ་ | dmigs pa | N | Objekt | FS:dO:Abs (Kopf) |
| གང་ | gang | IPron | wer? was? welche(r)? | FS:IPron (Attribut zu dmigs pa, oder: Bezug auf la) |
| ལ་ | la | PP | auf; an | FS:PP (worauf?) |
| གཏད་ | gtad | tdV; 2.,3.SF | richten auf; (ueber)geben | FS:P2:VG1;2.SF |
| འདུག་ | 'dug | EV | (Evidenzverb; beobachtete Existenz) | FS:EV |
| གསུང་ | gsung | tdV; 1.,3.SF (resp.) | sagen; sprechen (resp.) | P1:VG1;1.SF (aeusseres Sprechaktverb) |
| ། | / | -- | Satzendmarkierung | FinSuf |
Stammformen: gtod pa -- gtad pa -- gtad pa -- thod (tdV; VG1) [Quelle: Lekt_31 WL (gtad pa); Externe Quelle: Hill]
Stammformen: gsung ba -- gsungs pa -- gsung ba -- gsung (tdV; resp.) [Quelle: Lekt_08 WL; Lekt_27 WL]
G: { FS:[ nga \<S:Abs\> dmigs pa \<dO:Abs\> gang la \<ABlok:PP\> gtad 'dug \<P2:VG1;2.SF;EV\> ] gsung \<P1:VG1;1./3.SF\> / }
Uebersetzung: [Er/sie] sagte (resp.): "Worauf habe ich das Meditationsobjekt (dmigs pa) gerichtet?"
Anmerkungen:
- Rahmenkonstruktion: Aeusseres Sprechaktverb gsung (1./3.SF von gsung ba, respektvoll, "sagen") ohne explizites Subjekt. Der innere Fragesatz endet im Stamm 'dug (kein Finalsuffix). [Quelle: Lekt_08 WL; Lekt_34 HO]
- nga ohne Ergativmarkierung: Obwohl gtad ein transitives Verb ist, steht nga hier ohne Ergativsuffix. Bei Personalpronomen (1./2. Person) ist das Ergativsuffix oft nicht obligatorisch, insbesondere in Fragesaetzen.
- gang la: "worauf? auf welches?" -- gang als Interrogativpronomen mit PP la. Erfragt das Ziel, auf das dmigs pa gerichtet wurde. [Quelle: Lekt_34 WL]
- dmigs pa: "Objekt" -- hier im Sinne von Meditationsobjekt (dmigs pa = das, worauf der Geist gerichtet wird). [Quelle: Lekt_34 WL]
- gtad: 2.SF von gtod pa ("richten auf; (ueber)geben"). gtad 'dug: Vergangenheitsstamm + Evidenzverb 'dug drueckt aus, dass die Handlung vom Sprecher als beobachtete/erfahrene Tatsache dargestellt wird. [Quelle: Lekt_31 WL]
- 'dug als EV: Hier als Evidenzverb (nicht als Existenzverb "sitzen"), das direkte Wahrnehmung oder persoenliche Erfahrung markiert. [Quelle: Lekt_10 WL]
- Alternative Lesung: gang la gtad koennte auch als "auf wen/was auch immer gerichtet" gelesen werden (Relativpronomen statt Interrogativpronomen), aber im Kontext einer Wortfrage mit Sprechaktverb gsung ist die Fragebedeutung vorzuziehen.
- Textquelle: Deb ther sngon po (Blaue Annalen) von 'Gos lo tsa ba gZhon nu dpal. Engl. Uebers.: Roerich, *The Blue Annals*. [Externe Quelle: WisdomLib, Roerich Blue Annals]
- Kontext: Frage eines Meisters (resp.) nach dem Meditationsobjekt: "Worauf habe ich meinen Gegenstand der Meditation gerichtet?" -- Selbstreflexion ueber die eigene Meditationspraxis.
[Quelle: Lekt_34 UEB, Satz 14]
Satz 15
Tibetisch: བདག་གིས་གོ་ཆ་ཇི་ལྟར་བགོ་ལགས་ཞུས།
Wylie: bdag gis go cha ji ltar bgo lags zhus/
Morphemanalyse:
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| བདག་ | bdag | PersPron (eleg.) | ich | S1:Erg (Kopf) |
| གིས་ | gis | KSuf | (Ergativmarkierung) | Erg |
| གོ་ཆ་ | go cha | N | Ruestung | FS:dO:Abs |
| ཇི་ལྟར་ | ji ltar | IAdv | wie? | FS:ABmod |
| བགོ་ | bgo | tdV; 1.,3.SF | ankleiden | FS:P2:VG1;1./3.SF |
| ལགས་ | lags | KV (resp.) | sein (resp.) | FS:KV (resp.) |
| ཞུས་ | zhus | tdV; 2.SF | fragen; bitten (resp.) | P1:VG1;2.SF (aeusseres Sprechaktverb) |
| ། | / | -- | Satzendmarkierung | FinSuf |
Stammformen: bgo ba -- bgos pa -- bgo ba -- bgos (tdV) [Quelle: Lekt_34 WL; Externe Quelle: Hill]
Stammformen: zhu ba -- zhus pa -- zhu ba -- zhus (tdV) [Quelle: Lekt_08 WL; Lekt_11 WL]
G: { bdag gis \<S1:Erg\> FS:[ go cha \<dO:Abs\> ji ltar \<ABmod\> bgo lags \<P2:VG1;1./3.SF;KV\> ] zhus \<P1:VG1;2.SF\> / }
Uebersetzung: Ich fragte (resp.): "Wie soll [ich] die Ruestung anlegen?"
Anmerkungen:
- Rahmenkonstruktion: bdag gis ist Subjekt im Ergativ des aeusseren Satzes. zhus ist das aeussere Sprechaktverb (2.SF von zhu ba, respektvoll). Der innere Fragesatz endet im Stamm lags (kein Finalsuffix). [Quelle: Lekt_34 HO]
- bdag gis: "ich" im Ergativ (elegante 1. Person). gis nach -g Auslaut ist die korrekte Form des Ergativsuffixes. bdag gis ist hier das Subjekt des aeusseren Sprechaktverbs zhus ("ich fragte"). [Quelle: Lekt_08 WL]
- ji ltar: Interrogativadverb "wie?". Erfragt die Art und Weise des Ankleidens. [Quelle: Lekt_34 WL]
- go cha: "Ruestung" -- direktes Objekt im Absolutiv. [Quelle: Lekt_34 WL]
- bgo: 1./3.SF von bgo ba ("ankleiden"). Im Kontext der Frage ("wie soll ich ankleiden?") ist die 3.SF (Futur) wahrscheinlich: "wie soll/werde ich die Ruestung anlegen?". [Quelle: Lekt_34 WL]
- lags: Respektvolle Kopula (KV). bgo lags bildet das Praedikat des inneren Fragesatzes: "das Anlegen ist [wie?]" bzw. "[ich] soll anlegen" mit respektvoller Markierung. [Quelle: Lekt_20 WL]
- Der innere Fragesatz hat kein explizites Subjekt -- es ist implizit "ich" (= bdag, der Fragende selbst). Das Subjekt des inneren und aeusseren Satzes ist identisch (bdag gis).
- Alternative Lesung fuer bgo lags: bgo als Verbstamm + lags als respektvolle Bestaetigung/Hoeflichkeitspartikel, d.h. "wie kleidet [man] die Ruestung an?".
- Textquelle: Deb ther sngon po (Blaue Annalen) von 'Gos lo tsa ba gZhon nu dpal. Engl. Uebers.: Roerich, *The Blue Annals*. [Externe Quelle: WisdomLib, Roerich Blue Annals]
- Kontext: Respektvolle Frage: "Wie soll ich die Ruestung anlegen?" -- go cha ("Ruestung") wird im buddhistischen Kontext oft metaphorisch fuer die spirituelle Ruestung (des Bodhisattva) verwendet.
[Quelle: Lekt_34 UEB, Satz 15]
Uebungen (Saetze 16--20)
[Aus LEK_34 UEB.pdf]
Satz 16
Tibetisch: ད་ཆོས་རྗེ་རིན་པོ་ཆེ་གང་དུ་གཤེགས་ཞེས་ཞུས
Wylie: da chos rje rin po che gang du gshegs zhes zhus
Morphemanalyse:
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| ད་ | da | Adv | jetzt; nun | ABtemp |
| ཆོས་རྗེ་ | chos rje | NZ | Chos rje (Dharmaherr) | S:Abs (Kopf) |
| རིན་པོ་ཆེ་ | rin po che | NZ | Rin po che (der Kostbare) | S:Abs (Apposition) |
| གང་དུ་ | gang du | IAdv | wohin? | ABlok:IAdv |
| གཤེགས་ | gshegs | tmdV; 2.SF (resp.) | gehen (resp.) | P2:VG3;2.SF |
| ཞེས་ | zhes | ZitPart | Zitatpartikel | ZitPart |
| ཞུས་ | zhus | tdV; 2.SF (resp.) | fragen (resp.) | P1:Sprechaktverb |
Stammformen: gshegs pa -- gshegs pa -- gshegs pa -- gshegs (tmdV; resp.) [Quelle: Lekt_04 WL, Nr. 90]
Stammformen: zhu ba -- zhus pa -- zhu ba -- zhus (tdV; resp.) [Quelle: Lekt_11 WL, Nr. 20]
G: FS: { da \<ABtemp\> chos rje rin po che 0 \<S:Abs\> gang du \<ABlok:IAdv\> gshegs \<P2:VG3;2.SF\> } zhes \<ZitPart\> zhus \<P1:Sprechaktverb\>
Uebersetzung: [Er] fragte (resp.): "Wohin ist nun der Chos rje Rin po che gegangen (resp.)?"
Anmerkungen:
- OCR-Korrektur: Die OCR-Transkription des PDFs liest shes (ཤེས), korrekt ist aber zhes (ཞེས) als Zitatpartikel vor dem Sprechaktverb zhus. zhes ist das Allomorph der Zitatpartikel ces nach Konsonant-Auslauten (hier: -gs) und leitet die zitierte Rede zum Sprechaktverb ueber. Tibetisch/Wylie/Morphem-Tabelle wurden entsprechend korrigiert.
- da ("jetzt; nun") steht satzeinleitend als temporales Adverb und verankert die Frage in der aktuellen Situation.
- chos rje rin po che: Zusammengesetzter Ehrentitel, bestehend aus chos rje ("Dharmaherr", NZ) und rin po che ("der Kostbare", NZ). Der Titel bezieht sich auf eine hochgestellte religioese Persoenlichkeit. Das Subjekt steht im Absolutiv (ohne Ergativmarkierung), konsistent mit VG3 (intransitives tmdV). [Quelle: Lekt_10 WL (chos rje); Lekt_05 WL (rin po che)]
- gang du ("wohin?"): Interrogativadverb der Richtung. gang ist das Fragepronomen ("wer? was? welche(r)?"), du ist das Allativsuffix. Die Kombination fragt nach dem Zielort einer Bewegung. [Quelle: Lekt_34 WL, Nr. 26; Lekt_34 HO, S. 4]
- gshegs: 2.SF von gshegs pa ("gehen", resp.), respektvolle Form von 'gro ba. Als Verb des Wortfragesatzes steht gshegs im Stamm (ohne Finalsuffix), wie fuer Wortfragen obligatorisch. [Quelle: Lekt_04 WL, Nr. 90; Lekt_34 HO, S. 1]
- Rahmenkonstruktion: Der Wortfragesatz (gang du gshegs) ist eingebettet in die Rahmenkonstruktion mit dem Sprechaktverb zhus. Das implizite Subjekt des Fragens ist aus dem Kontext zu erschliessen.
- Textquelle: Deb ther sngon po (Blaue Annalen) von 'Gos lo tsa ba gZhon nu dpal. Engl. Uebers.: Roerich, *The Blue Annals*. [Externe Quelle: WisdomLib, Roerich Blue Annals]
- Kontext: Frage nach dem Verbleib einer hochgestellten Person: "Wohin ist nun der Chos rje Rin po che gegangen (resp.)?" -- demonstriert die Interrogativkonstruktion mit gang du ("wohin?").
[Quelle: Lekt_34 UEB, Satz 16]
Satz 17
Tibetisch: ཁྱེད་གཉིས་གང་དུ་འགྲོ་བྱས
Wylie: khyed gnyis gang du 'gro byas
Morphemanalyse:
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| ཁྱེད་ | khyed | PersPron (2.Pers.; resp.) | Ihr; Du (resp.) | S:Abs (Kopf) |
| གཉིས་ | gnyis | ZW | zwei | S:Abs (Apposition) |
| གང་དུ་ | gang du | IAdv | wohin? | ABlok:IAdv |
| འགྲོ་ | 'gro | tmdV; 1.SF | gehen | P2:VG3;1.SF |
| བྱས་ | byas | tdV; 2.SF | machen; (hier:) fragen | P1:Sprechaktverb |
Stammformen: 'gro ba -- phyin pa / song ba -- 'gro ba -- song (tmdV) [Quelle: Lekt_04 WL; Lekt_07 WL]
Stammformen: byed pa -- byas pa -- bya ba -- byos (tdV) [Quelle: Lekt_13 WL]
G: FS: { khyed gnyis 0 \<S:Abs\> gang du \<ABlok:IAdv\> 'gro \<P2:VG3;1.SF\> } byas \<P1:Sprechaktverb\>
Uebersetzung: [Er] fragte: "Wohin geht ihr zwei?"
Anmerkungen:
- khyed gnyis: "ihr zwei". khyed ist das respektvolle Personalpronomen der 2. Person, gnyis ("zwei") steht appositiv und spezifiziert die Anzahl der Angesprochenen. Das Subjekt steht im Absolutiv (ohne Ergativmarkierung), konsistent mit dem intransitiven VG3. [Quelle: Lekt_09 WL (khyed); Lekt_02 WL (gnyis)]
- gang du: Interrogativadverb der Richtung ("wohin?"), identisch wie in Satz 16. [Quelle: Lekt_34 WL, Nr. 26]
- 'gro: 1.SF von 'gro ba ("gehen", tmdV). Die 1.SF steht hier, weil die Frage nach der gegenwaertigen/geplanten Handlung fragt ("Wohin geht ihr?"). Als Verb des Wortfragesatzes steht 'gro im Stamm (ohne Finalsuffix). [Quelle: Lekt_04 WL; Lekt_34 HO, S. 1]
- byas: 2.SF von byed pa ("machen", tdV), hier als Sprechaktverb in der Rahmenkonstruktion. byas ist die nicht-respektvolle Form (im Gegensatz zu zhus in Satz 16). Das implizite Subjekt des Fragens ist aus dem Kontext zu erschliessen. [Quelle: Lekt_13 WL]
- Gegenueber Satz 16 (gshegs, 2.SF -- Vergangenheit, resp.) steht hier 'gro (1.SF -- Praesens/Zukunft, nicht-resp.), was den unterschiedlichen Zeitbezug und Hoeflichkeitsgrad der beiden Saetze zeigt.
- Textquelle: Deb ther sngon po (Blaue Annalen) von 'Gos lo tsa ba gZhon nu dpal. Engl. Uebers.: Roerich, *The Blue Annals*. [Externe Quelle: WisdomLib, Roerich Blue Annals]
- Kontext: Informelle Frage an zwei Personen: "Wohin geht ihr zwei?" -- demonstriert die Interrogativkonstruktion mit gang du ("wohin?") im Praesens und ohne Respektform.
[Quelle: Lekt_34 UEB, Satz 17]
Satz 18
Tibetisch: དེ་དུས་གཅུང་ཆོས་འབར་ཞིང་བཙོངས་ནས་གསེར་མང་པོ་ཁེར་ཏེ་དྭགས་པོ་ནས་གར་སོང་འདྲི་ཞིང་འོངས་ནས་རྡོ་རྗེ་གདན་དུ་སླེབ།
Wylie: de dus gcung chos 'bar zhing btsongs nas gser mang po kher te dwags po nas gar song 'dri zhing 'ongs nas rdo rje gdan du sleb/
Morphemanalyse:
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| དེ་དུས་ | de dus | Adv | zu jener Zeit; damals | ABtemp |
| གཅུང་ | gcung | N | juengerer Bruder | S:Abs (Apposition) |
| ཆོས་འབར་ | chos 'bar | PN | Chos 'bar | S:Abs (Kopf) |
| ཞིང་ | zhing | N | Feld; Ackerland | dO:Abs |
| བཙོངས་ | btsongs | tdV; 2.SF | verkaufen | P:VG1;2.SF |
| ནས་ | nas | Konj | nachdem (Konjunktionalsuffix) | KonjSuf |
| གསེར་ | gser | N | Gold | dO:Abs (Kopf) |
| མང་པོ་ | mang po | IndPron / Adj | viel(e) | dO:Abs (Attribut) |
| ཁེར་ | kher | tdV; 2.SF | mitnehmen; tragen | P:VG1;2.SF |
| ཏེ་ | te | Konj | (Konjunktionalsuffix) | KonjSuf |
| དྭགས་པོ་ | dwags po | ON | Dwags po | ABlok (Kopf) |
| ནས་ | nas | KSuf | von; aus (Ablativ) | ABlok:Abl |
| གར་ | gar | IAdv | wohin? | ABlok:IAdv |
| སོང་ | song | tmdV; 2.SF | gehen | P2:VG3;2.SF |
| འདྲི་ | 'dri | tdV; 1.SF | fragen | P:VG1;1.SF |
| ཞིང་ | zhing | Konj | und (Konjunktionssuffix) | KonjSuf |
| འོངས་ | 'ongs | tmdV; 2.SF | kommen | P:VG3;2.SF |
| ནས་ | nas | Konj | nachdem (Konjunktionalsuffix) | KonjSuf |
| རྡོ་རྗེ་གདན་ | rdo rje gdan | ON | Vajraasana (Bodhgaya) | ABlok (Kopf) |
| དུ་ | du | KSuf | nach; in (Allativ) | ABlok:All |
| སླེབ་ | sleb | tmdV; 1.SF | ankommen | P:VG3;1.SF |
| ། | / | -- | Satzendmarkierung | FinSuf |
Stammformen: 'tshong ba -- btsongs pa -- btsong ba -- tshongs (tdV) [Quelle: Lekt_34 WL, Nr. 29; Externe Quelle: Hill]
Stammformen: 'khyer ba -- khyer ba -- 'khyer ba -- khyer (tdV) [Quelle: Lekt_12 WL, Nr. 34]
Stammformen: 'gro ba -- phyin pa / song ba -- 'gro ba -- song (tmdV) [Quelle: Lekt_04 WL; Lekt_07 WL]
Stammformen: 'dri ba -- dris pa -- 'dri ba -- dris (tdV) [Quelle: Lekt_11 WL, Nr. 29; Lekt_34 WL, Nr. 4]
Stammformen: 'ong ba -- 'ongs pa -- 'ong ba (tmdV) [Quelle: Lekt_26 WL; Lekt_14 WL]
Stammformen: sleb pa -- slebs pa -- sleb pa (tmdV) [Quelle: Lekt_14 WL, Nr. 14]
G: de dus \<ABtemp\> { gcung chos 'bar 0 \<S:Abs\> zhing 0 \<dO:Abs\> btsongs nas \<P:VG1;2.SF;Konj\> } { gser mang po 0 \<dO:Abs\> kher te \<P:VG1;2.SF;Konj\> } { dwags po nas \<ABlok:Abl\> gar \<ABlok:IAdv\> song \<P2:VG3;2.SF\> } 'dri zhing \<P:VG1;1.SF;Konj\> { 'ongs nas \<P:VG3;2.SF;Konj\> } { rdo rje gdan du \<ABlok:All\> sleb \<P:VG3;1.SF\> / }
Uebersetzung: Zu jener Zeit verkaufte der juengere Bruder Chos 'bar Felder, nahm viel Gold mit, fragte: "Wohin ist [er] von Dwags po aus gegangen?", kam [los] und gelangte [schliesslich] nach Vajraasana (Bodhgaya).
Anmerkungen:
- Dies ist ein langer, komplexer Erzaehlsatz mit mehreren koordinierten Teilsaetzen und einer eingebetteten indirekten Frage. Die narrative Struktur laesst sich wie folgt gliedern: (1) zhing btsongs nas ("nachdem er Felder verkauft hatte"), (2) gser mang po kher te ("viel Gold mitnehmend"), (3) gar song 'dri zhing 'ongs nas ("fragend, wohin [er] gegangen sei, und kommend"), (4) rdo rje gdan du sleb ("in Vajraasana ankam").
- de dus ("zu jener Zeit"): Temporaladverb, bestehend aus de ("jener") + dus ("Zeit"). [Quelle: Lekt_08 WL (de); Lekt_09 WL (dus)]
- gcung chos 'bar: gcung (Kurzform von gcung po, "juengerer Bruder") steht appositiv vor dem Personennamen Chos 'bar. Das Subjekt ist durchgaengig fuer alle Teilsaetze identisch. [Quelle: Lekt_34 WL, Nr. 27 (gcung po); Lekt_34 WL, Nr. 28 (chos 'bar)]
- zhing btsongs nas: "nachdem [er] Felder verkauft hatte". zhing hier als Nomen ("Feld; Ackerland"), nicht als Konjunktionssuffix. btsongs ist die 2.SF von btsongs pa ("verkaufen", tdV). nas als Konjunktionalsuffix ("nachdem"). [Quelle: Lekt_07 WL (zhing); Lekt_34 WL, Nr. 29 (btsongs pa)]
- kher te: kher ist die Verbform von 'khyer ba ("tragen; mitnehmen", tdV). Schreibvariante/OCR fuer khyer (= 2.SF). te ist das Konjunktionalsuffix (Gerundform: "...nahm mit und..."). [Quelle: Lekt_12 WL, Nr. 34]
- gar song: Indirekte Frage ("wohin [er] gegangen sei"). gar ("wohin?", IAdv) + song (2.SF von 'gro ba, "gehen"). Die indirekte Frage ist eingebettet in die Partizipialkonstruktion 'dri zhing ("fragend"). [Quelle: Lekt_34 WL, Nr. 31 (gar); Lekt_05 WL (song ba)]
- 'dri zhing 'ongs nas: "fragend und kommend, nachdem...". 'dri (1.SF von 'dri ba, "fragen") + zhing (Konjunktionalsuffix "und") + 'ongs (2.SF von 'ong ba, "kommen") + nas (Konjunktionalsuffix "nachdem"). Die Konstruktion beschreibt, dass Chos 'bar sich auf der Reise nach dem Verbleib des Bruders erkundigte und schliesslich ankam. [Quelle: Lekt_34 WL, Nr. 4 ('dri ba); Lekt_14 WL ('ongs pa)]
- sleb: 1.SF von sleb pa ("ankommen", tmdV). Die Satzendmarkierung steht nach sleb. Im narrativen Kontext der Vergangenheit waere slebs (2.SF) erwartbar; sleb ohne -s ist jedoch auch als Vergangenheitsform belegt (Stammformen koennen identisch sein). [Quelle: Lekt_14 WL, Nr. 14]
- Syntaktisch bemerkenswert ist die Verschachtelung: Die indirekte Frage (gar song) ist als Objekt von 'dri eingebettet, waehrend der Gesamtsatz eine Kette von koordinierten Handlungen erzaehlt.
- Textquelle: Deb ther sngon po (Blaue Annalen) von 'Gos lo tsa ba gZhon nu dpal. Engl. Uebers.: Roerich, *The Blue Annals*. [Externe Quelle: WisdomLib, Roerich Blue Annals]
- Kontext: Komplexer Erzaehlsatz: Der juengere Bruder Chos 'bar verkaufte Felder, nahm viel Gold mit, fragte von Dwags po aus nach dem Verbleib seines Bruders und gelangte schliesslich nach Vajraasana (Bodhgaya). Der Satz enthaelt eine eingebettete indirekte Frage mit gar ("wohin?").
[Quelle: Lekt_34 UEB, Satz 18]
Satz 19
Tibetisch: ང་ལ་རི་ལམ་ལྟད་མོ་ཆེ་བ་ཞིག་བྱུང། ཁྱོད་ལ་བཤད་ཀྱི་གསུང། ཇི་འདྲ་ཅིག་བྱུང་ཞུས
Wylie: nga la ri lam ltad mo che ba zhig byung/ khyod la bshad kyi gsung/ ji 'dra cig byung zhus
Morphemanalyse:
Teilsatz 1: nga la ri lam ltad mo che ba zhig byung/
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| ང་ | nga | PersPron (1.Pers.) | ich | iO:Dat;Possessor/Erleber (Kopf) |
| ལ་ | la | KSuf | (Dativ) | iO:Dat |
| རི་ལམ་ | ri lam | N | Traum (woertl. "Bergweg" -> idiom. "Traum") | S:Abs (Komp. 1) |
| ལྟད་མོ་ | ltad mo | N | Schauspiel; Anblick | S:Abs (Komp. 2) |
| ཆེ་བ་ | che ba | Adj | gross | S:Abs (Attribut) |
| ཞིག་ | zhig | IndPart | ein (Indefinitpartikel) | S:Abs (Indef) |
| བྱུང་ | byung | tmdV; 2.SF | erscheinen; widerfahren | P:VG6;2.SF (mit Erleber-Dativ nga la) |
| ། | / | -- | Satzendmarkierung | FinSuf |
Teilsatz 2: khyod la bshad kyi gsung/
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| ཁྱོད་ | khyod | PersPron (2.Pers.) | du | iO:Dat (Kopf) |
| ལ་ | la | KSuf | (Dativ) | iO:Dat |
| བཤད་ | bshad | tdV; 2./3.SF | erklaeren; erzaehlen | P:VG1;3.SF |
| ཀྱི་ | kyi | FinSuf | (Finalsuffix; Futur) | FinSuf |
| གསུང་ | gsung | tdV; 1.SF (resp.) | sagen (resp.) | P1:Sprechaktverb |
| ། | / | -- | Satzendmarkierung | -- |
Teilsatz 3 (Wortfrage): ji 'dra cig byung zhus
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| ཇི་འདྲ་ཅིག་ | ji 'dra cig | IAdv | welcher Art? was fuer ein(es)? | ABmod:IAdv |
| བྱུང་ | byung | tmdV; 2.SF | erscheinen; widerfahren | P2:VG6;2.SF |
| ཞུས་ | zhus | tdV; 2.SF (resp.) | fragen (resp.) | P1:Sprechaktverb |
Stammformen: 'byung ba -- byung ba -- 'byung ba (tmdV) [Quelle: Lekt_08 WL]
Stammformen: 'chad pa -- bshad pa -- bshad pa -- shod (tdV) [Quelle: Lekt_11 WL]
Stammformen: gsung ba -- gsungs pa -- gsung ba -- gsungs (tdV; resp.) [Quelle: Lekt_08 WL; Lekt_12 WL]
Stammformen: zhu ba -- zhus pa -- zhu ba -- zhus (tdV; resp.) [Quelle: Lekt_11 WL, Nr. 20]
G:
TS1: { nga la \<iO:Dat\> ri lam ltad mo che ba zhig 0 \<dO:Abs\> byung \<P:VG6;2.SF\> / }
TS2: { khyod la \<iO:Dat\> bshad kyi \<P:VG1;3.SF;FinSuf\> } gsung \<P1:Sprechaktverb\> /
TS3: FS: { ji 'dra cig \<ABmod:IAdv\> byung \<P2:VG6;2.SF\> } zhus \<P1:Sprechaktverb\>
Uebersetzung: "Mir ist ein grosses Traumgesicht (ri lam ltad mo) widerfahren. [Ich] werde [es] Dir erzaehlen", sagte [er] (resp.). [Daraufhin] fragte [der andere] (resp.): "Was fuer eines (ji 'dra cig) ist [Dir] widerfahren?"
Anmerkungen:
- Der Satz besteht aus drei Teilsaetzen, die einen Dialog darstellen: (TS1) Aussage ueber das Widerfahrnis, (TS2) Ankuendigung des Erzaehlens + Sprechaktverb, (TS3) Rueckfrage als Wortfragesatz.
- ri lam ltad mo: ri lam (woertl. "Bergweg") ist im klassischen Tibetisch ein etablierter Ausdruck fuer "Traum" (vgl. moderne Wb.). ltad mo bedeutet "Schauspiel; Anblick". Zusammen: "Traum-Anblick; Traumgesicht; Vision im Traum". [Quelle: Lekt_09 WL (ri, lam); Lekt_12 WL (ltad mo)] [Externe Quelle: Steinert (ri lam = "Traum")]
- che ba zhig: "ein grosses". che ba ("gross", Adj) + zhig (Indefinitpartikel). Die Indefinitpartikel zeigt an, dass es sich um ein bestimmtes, aber dem Hoerer noch unbekanntes Ereignis handelt. [Quelle: Lekt_07 WL (che ba)]
- byung: 2.SF von 'byung ba ("erscheinen; widerfahren", tmdV, VG6). Mit der Dativkonstruktion nga la ("mir") drueckt byung ein unkontrollierbares Widerfahrnis aus: "Mir ist X widerfahren." [Quelle: Lekt_08 WL]
- bshad kyi: bshad (2./3.SF von 'chad pa, "erklaeren") + kyi (Finalsuffix). Hier als 3.SF (Futurstamm) mit dem Finalsuffix kyi, das eine beabsichtigte/zukuenftige Handlung ausdrueckt: "[Ich] werde erzaehlen." [Quelle: Lekt_11 WL (bshad pa)]
- gsung: 1.SF von gsung ba ("sagen", resp., tdV). Hier als Sprechaktverb in der Rahmenkonstruktion des zweiten Teilsatzes. gsung steht im Stamm (Praesens): "[er] sagt (resp.)". [Quelle: Lekt_08 WL]
- ji 'dra cig ("was fuer ein(es)?"): Interrogativadverb der Art und Weise, bestehend aus ji ("was; wie") + 'dra (ba) ("aehnlich; gleich") + cig (Indefinitpartikel). Fragt nach der Art des Widerfahrnisses. [Quelle: Lekt_34 WL, Nr. 33; Lekt_34 HO, S. 4-5]
- Der dritte Teilsatz ist ein Wortfragesatz: ji 'dra cig byung -- "Was fuer eines ist [Dir] widerfahren?" byung steht im Stamm (ohne Finalsuffix), wie fuer Wortfragen obligatorisch. zhus ist das aeussere Sprechaktverb. [Quelle: Lekt_34 HO, S. 1]
- Dialogstruktur: TS1+TS2 gehoeren zum selben Sprecher (Ankuendigung), TS3 ist die Rueckfrage des Gespraechspartners. Die Zuordnung der Sprecher muss aus dem Kontext erschlossen werden.
- Textquelle: Deb ther sngon po (Blaue Annalen) von 'Gos lo tsa ba gZhon nu dpal. Engl. Uebers.: Roerich, *The Blue Annals*. [Externe Quelle: WisdomLib, Roerich Blue Annals]
- Kontext: Dialogpassage: Jemand berichtet von einem grossen Traumgesicht auf dem Bergweg und kuendigt an, es zu erzaehlen. Daraufhin fragt der Gespraechspartner (resp.): "Was fuer eines ist dir widerfahren?" Der Satz demonstriert die Interrogativkonstruktion mit ji 'dra cig ("was fuer eines?").
[Quelle: Lekt_34 UEB, Satz 19]
Satz 20
Tibetisch: ཁོང་དགེ་བཤེས་ལྕེ་དེ་ཐུགས་ཀྱི་མཁྱེན་པ་ཇི་ཙམ་འདུག་ཞུས
Wylie: khong dge bshes lce de thugs kyi mkhyen pa ji tsam 'dug zhus
Morphemanalyse:
| Tibetisch | Wylie | Wortart | Bedeutung | Grammatische Funktion |
| ཁོང་ | khong | PersPron (3.Pers.; resp.) | er; sie (resp.) | S:Erg (aeusserer Satz; Subjekt von zhus) |
| དགེ་བཤེས་ | dge bshes | NZ | dGe bshes | iO:Dat;Possessor (Kopf; Bezugsperson) |
| ལྕེ་ | lce | NZ | lCe | iO:Dat (NZ-Apposition) |
| དེ་ | de | Dem | jener; jene(r) | iO:Dat (Dem; la ausgelassen) |
| ཐུགས་ | thugs | N (resp.) | Geist; Herz (resp.) | Attr (Kopf; Genitivattribut) |
| ཀྱི་ | kyi | KSuf | (Genitiv) | AttrSuf |
| མཁྱེན་པ་ | mkhyen pa | tmdV; 1.SF (resp.) / N | Wissen; Erkenntnis (resp.) | S:Abs (nominalisiert; innerer Satz) |
| ཇི་ཙམ་ | ji tsam | IAdv | wieviel(e)? | ABmod:IAdv |
| འདུག་ | 'dug | EV | vorhanden sein (evidentielle Existenz) | P2:EV |
| ཞུས་ | zhus | tdV; 2.SF (resp.) | fragen (resp.) | P1:Sprechaktverb |
Stammformen: mkhyen pa -- mkhyen pa -- mkhyen pa (tmdV; resp.) [Quelle: Lekt_27 WL, Nr. 10]
Stammformen: zhu ba -- zhus pa -- zhu ba -- zhus (tdV; resp.) [Quelle: Lekt_11 WL, Nr. 20]
G: khong \<S:Erg;aeusserer Satz\> FS: { dge bshes lce de \<iO:Dat;Possessor\> thugs kyi \<Attr\> mkhyen pa 0 \<S:Abs\> ji tsam \<ABmod:IAdv\> 'dug \<P2:EV\> } zhus \<P1:Sprechaktverb\>
Uebersetzung: Er (resp.) fragte (resp.): "Wieviel geistige Erkenntnis (thugs kyi mkhyen pa, resp.) hat jener dGe bshes lCe?"
Anmerkungen:
- khong: Respektvolles Personalpronomen der 3. Person ("er; sie"). Hier ist khong das Subjekt des aeusseren Satzes (der Fragende). Da zhus (tdV) das Sprechaktverb ist, steht khong im Ergativ -- die Ergativmarkierung kann bei Personalpronomen entfallen. [Quelle: Lekt_09 WL]
- dge bshes lce de: "jener dGe bshes lCe". dge bshes ist ein Namenszusatz (akademischer Titel). lce ist ein weiterer Namenszusatz (Klanname). de ("jener") ist deiktisch und verweist auf eine im Kontext bekannte Person. dge bshes lce de ist hier Possessor-Dativ zum Existenzverb 'dug ("bei jenem dGe bshes lCe ist..."), die Dativmarkierung la ist ausgelassen. [Quelle: Lekt_08 WL (dge bshes); Lekt_34 WL, Nr. 34 (lce)]
- thugs kyi mkhyen pa: "Erkenntnis des Geistes (resp.)". thugs ("Geist; Herz", resp.) + kyi (Genitivsuffix nach -s Auslaut) + mkhyen pa ("Wissen; Erkenntnis", resp.). thugs kyi mkhyen pa ist eine respektvolle Umschreibung fuer "geistige Erkenntnis" bzw. "Hellsichtigkeit/uebernatuerliches Wissen". mkhyen pa ist nominalisiert (als Verbalnomen "das Wissen/Erkennen"). [Quelle: Lekt_09 WL (thugs); Lekt_27 WL, Nr. 10 (mkhyen pa)]
- ji tsam ("wieviel(e)?"): Interrogativadverb der Menge, bestehend aus ji ("wie") + tsam ("Mass; Ausmass"). Fragt nach dem Ausmass des Wissens. [Quelle: Lekt_34 WL, Nr. 35; Lekt_34 HO, S. 5]
- 'dug: Existenzverb mit evidentieller Funktion. 'dug drueckt aus, dass der Sprecher sich auf Evidenz/Wahrnehmung stuetzt (im Gegensatz zu yod, das auf eigenem Wissen basiert). Hier fragt der Sprecher nach etwas, das er nicht aus eigener Erfahrung weiss, daher 'dug. [Quelle: Lekt_10 WL; Lekt_14 WL]
- Rahmenkonstruktion: khong (Subjekt des Fragens) + Wortfragesatz (thugs kyi mkhyen pa ji tsam 'dug) + zhus (Sprechaktverb). Die Frage bezieht sich auf den Grad/das Ausmass des geistigen Wissens einer bestimmten Person.
- Die Verbform 'dug steht im Stamm (ohne Finalsuffix), wie fuer Wortfragen obligatorisch. [Quelle: Lekt_34 HO, S. 1]
- Textquelle: Deb ther sngon po (Blaue Annalen) von 'Gos lo tsa ba gZhon nu dpal. Engl. Uebers.: Roerich, *The Blue Annals*. [Externe Quelle: WisdomLib, Roerich Blue Annals]
- Kontext: Frage nach dem Ausmass geistiger Erkenntnis: "Wieviel geistiges Wissen besitzt jener dGe bshes lCe?" -- jemand erkundigt sich (resp.) nach den Faehigkeiten einer bestimmten Person. Der Satz demonstriert die Interrogativkonstruktion mit ji tsam ("wieviel?").
[Quelle: Lekt_34 UEB, Satz 20]